Pulwama Terror Attack आतंक पर निर्णायक वार का वक्त

2019-02-16T15:38:13Z

पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर आतंकी हमले को लेकर जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी रहे एनके त्रिपाठी एक आंकलन पेश कर रहे हैं।

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KANPUR : कश्मीर घाटी में श्रीनगर से कुछ ही किलोमीटर दूर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर पुलवामा जिले के अवंतिपुर के पास सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें दु:खद रूप से 40 सुरक्षाकर्मियों की शहादत हो गई। अनेक जवान गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। 50 गाडिय़ों से अधिक का यह काफिला सीआरपीएफ के लगभग 2000 अधिकारियों और जवानों को लेकर जा रहा था। यह कायराना हमला पिछले अनेक वर्षों में घाटी में किया गया सबसे घातक आतंकवादी हमला बन है। दक्षिण कश्मीर के स्थानीय आतंकवादियों द्वारा किया गया यह हमला अत्यंत गंभीरता का विषय है। निश्चित रूप से इस घटना से सुरक्षाबलों को एक बड़ा धक्का लगा है।

निर्णायक और बहुत ही कारगर कार्रवाई की

पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के विरुद्ध जो जबरदस्त, निर्णायक और बहुत ही कारगर कार्रवाई की है, ये हमला उसी से उपजी बौखलाहट का परिणाम है। हमारी जांबाज सेना और सीआरपीएफ के वीर जवानों ने मिलकर पाकिस्तान से घुसपैठ करके आए तथा घाटी में स्थानीय रूप से पलने वाले आतंकवादियों का बड़े पैमाने पर सफाया किया है। बीते तीन-चार वर्षों में कश्मीर घाटी में आतंक की कमर तोडऩे में हमारे सुरक्षाबल काफी हद तक सफल रहे हैं। कुछ ही दिन पूर्व उत्तरी कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने बयान दिया था कि सुरक्षाबलों ने वर्ष 2018 में लगभग 250 आतंकवादियों का सफाया किया है। यह पिछले 10 वर्षों की सबसे प्रभावी कार्रवाई थी। लिहाजा, आतंकवादियों की ओर से ऐसे किसी कायराना पलटवार का अंदेशा तो हर समय बना ही हुआ था। इसमें कोई संदेह नहीं है कि पाकिस्तानी आतंकवादियों की घुसपैठ को सीमा पर सेना और सीआरपीएफ ने कारगर तरीके से नियंत्रित किया है।
दक्षिण कश्मीर स्थानीय आतंकवादी पैदा कर रहा
विगत कुछ वर्षों में दक्षिण कश्मीर स्थानीय आतंकवादी पैदा कर रहा है और दु:खद यह है कि इन लोगों को वहां पर शरण भी मिल रही है। इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि भारतीय सेना की जबरदस्त कार्रवाई और सरकार की ओर से मिली खुली छूट से बढ़े मनोबल के कारण आतंकवादियों की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। इसी कारण पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर जैश-ए-मोहम्मद द्वारा यह सुनियोजित कायरतापूर्ण कार्रवाई की गई है। जहां तक इस घटना का प्रश्न है, इसमें कहीं न कहीं सुरक्षा-सतर्कता में चूक अवश्य हुई है। इतने बड़े काफिले की सुरक्षा के लिए रोड ओपनिंग पार्टी की सतर्कता बहुत आवश्यक है। बताया जा रहा है कि आतंकवादियों की एसयूवी गाड़ी ने काफिले के साथ-साथ चलते हुए यह घटना कर दी। इस संदिग्ध गाड़ी को सफलतापूर्वक रोका नहीं जा सका, जिसका खामियाजा जवानों की इतनी दर्दनाक शहादत के रूप में भुगतना पड़ा। भविष्य में सीआरपीएफ तथा सेना को अपने काफिले की सुरक्षा के लिए और सतर्क होना पड़ेगा।
सुरक्षाबलों के समर्थन में पूरे विश्वास के साथ खड़ा होना होगा
भयावह त्रासदी के इस समय में हमें हमारे सुरक्षाबलों के समर्थन में पूरे विश्वास के साथ खड़ा होना होगा। यह भी समझना होगा कि बिना जोखिम लिए कोई भी सुरक्षाबल कार्रवाई नहीं कर सकता। पूर्व खुफिया सूचना न होने का विलाप करना निरर्थक है। कुछ क्षेत्रों में दबी जबान से दोबारा सर्जिकल स्ट्राइक करने की बात भी की जा रही है किंतु इन सबके साथ-साथ सर्वाधिक जरूरत इस बात की है कि इस घटना से सबक लिया जाए और निर्णायक कार्रवाई हो। यह हर हाल में सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी किसी वारदात की पुनरावृत्ति न हो। सनद रहे कि दस आतंकी मार देने से भी ज्यादा जरूरी हमारे एक भी सैनिक का बचना है। हमारे सुरक्षाबलों को अब डिफेंसिव अर्थात रक्षात्मक रणनीति न अपनाकर आक्रामक कूटनीति अपनानी होगी। हालांकि बदले जैसी किसी भी कार्रवाई की तैयारी के साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि अब हमारा कोई भी जवान हताहत न हो।

कायराना वारदात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा की गई

पुलवामा में हुई यह कायराना वारदात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा की गई है। जैश का मुख्य सूत्रधार मसूद अजहर पाकिस्तानी भूमि से अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहा है। पाकिस्तान के साथ-साथ चीन भी मसूद की ढाल बना हुआ है। यह चीन ही है जो संयुक्त राष्ट्र में बार-बार मसूद अजहर के बचाव में उतर आता है। विडंबना यह है कि पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा करतारपुर साहिब कॉरिडोर जैसी छद्म शांतिपूर्ण पहल तो की गई, परंतु पाकिस्तान के आतंकवादी ढांचे को छूने का साहस उनमें नहीं है। इस आतंकी कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि भले ही लिबरल दिखने वाले इमरान खान वहां सत्ता में हैं, लेकिन पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के रवैये में कोई परिवर्तन नहीं आया है।
भारत को कूटनीतिक हलकों में नई पहल करनी होगी
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति वैसी ही बनी हुई है, जैसी सैन्य तानाशाह ने निर्मित की थी। पिछले करीब 60 वर्षों से चीन से मिल रही सतत सहायता से भी पाकिस्तान को भारत के विरुद्ध कार्रवाई करने की शक्ति प्राप्त होती रही है। संयुक्त राष्ट्र में भी अजहर मसूद के मामले में चीन ने उसका पूरा सहयोग किया है। इन सब तथ्यों और अंतर्राष्ट्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इस घटना के बाद भारत को कूटनीतिक हलकों में नई पहल करनी होगी। वर्तमान केंद्र सरकार ने बीते करीब साढ़े चार वर्षों में विदेश नीति और कूटनीति के स्तर पर काफी बेहतर रणनीति अपनाई है। मोदी सरकार ने कूटनीति को अलग स्तर पर ले जाकर दुनियाभर के देशों से प्रगाढ़ संबंध बनाए हैं और पाकिस्तान को अलग-थलग किया है। अब उन्हीं संबंधों और रणनीतियों को उचित ढंग से साधकर जवाबी कार्रवाई के लिए तैयारी करनी चाहिए।
लोकसभा चुनावों के कारण हमारी विदेश व रक्षा नीतियों में भटकाव न आए
ध्यान रहे कि आगामी लोकसभा चुनावों के कारण हमारी विदेश व रक्षा नीतियों में भटकाव न आए। देशवासियों को यह भी देखना होगा कि राजनीतिक लोगों का कार्य ही राजनीति करना है, अत: आने वाले दिनों में सभी राजनीतिक दल इस घटना की व्याख्या अपने-अपने हितों के अनुकूल करेंगे, किंतु अब समय आ गया है कि सुरक्षाबलों की कठिन परिस्थिति को देखते हुए तथा देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए सभी दल मिलकर एक समन्वित नीति तैयार करें।
नोट : लेखक के निजी विचार हैं।

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