कोशिश हुई नाकाम जेल भेजा गया हत्यारोपी डॉक्टर

2018-12-23T06:00:15Z

-पति का एप्लीकेशन ठंडे बस्ते, भाई की तहरीर पर दर्ज एफआईआर

-राखी मर्डर की सही जांच हुई तो कई चेहरों से हटेगा झूठ का नकाब

द्दह्रक्त्रन्य॥क्कक्त्र:

नेपाल के पोखरा में दूसरी पत्नी राखी की हत्या कर पहाड़ी से डेड बॉडी फेंकने के आरोपित डॉक्टर डीपी सिंह, उसके सहयोगियों देश दीपक निषाद और प्रमोद सिंह को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने तीनों को जेल भेजने का आदेश दिया। इसके पूर्व दोपहर करीब दो बजे डॉक्टर और उसके सहयोगियों का मेडिको लीगल बनवाने के लिए शाहपुर पुलिस जिला अस्पताल पहुंची। एसओ नवीन सिंह तीनों को अपने साथ लेकर जिला अस्पताल ले गए। वहां देश दीपक निषाद और प्रमोद सिंह के डॉक्टरी परीक्षण में कोई प्रॉब्लम नहीं आई। लेकिन जब डॉक्टर डीपी सिंह का मेडिकल परीक्षण शुरू हुआ तो डॉक्टरों ने ज्यादा समय दिया। अचानक आरोपित डॉक्टर के बदन में तमाम बीकारियां निकल आई। इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर्स ने डीपी सिंह को एडमिट कर इलाज शुरू कर दिया। बताया कि उसके सीने में तेज दर्द हैं। इसलिए शाम पौने बजे सीने का एक्सरे हुआ। एबडोमेन इरेक्ट की प्रॉब्लम भी बताई। डीपी सिंह को पुलिस कोर्ट में पेश करने ले जाती। इसके पहले जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे हॉयर सेंटर भेजने की तैयारी शुरू कर दी। हार्ट की प्राब्लम की जांच के लिए स्पेशलस्टि को कॉल किया गया। लेकिन बाद में डॉक्टर को कोर्ट में पेश करना। तीनों को जेल भेजते हुए न्यायालय ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक को बीमार अभियुक्त के लिए उपचार का इंतजाम करने का आदेश दिया।

डॉक्टर की तीमारदारी में लगा रहा महकमा

शाहपुर के मुकदमे में पकड़े गए डॉक्टर डीपी सिंह और उसके साथियों को कैंट थाना में रखा गया था। डॉक्टर को थाना के दफ्तर में बैठाया गया था। जबकि उसके दोनों सहयोगियों को लॉकअप की हवा खानी पड़ी। शुक्रवार की रात और शनिवार को डॉक्टर डीपी सिंह ने घर का खाना खाया। डॉक्टर से मिलने जुलने वालों का तांता भी कैंट थाना पर लगा रहा। परिचितों के पहुंचने पर डॉक्टर ने दावा किया उसे फर्जी फंसाया गया। वह कभी नेपाल नहीं गया था। उसके खिलाफ फर्जी तरीके से कार्रवाई की गई। थाना से लेकर जिला अस्पताल तक डॉक्टर के परिचित पुलिस कर्मचारी तीमारदारी में जुटे रहे।

24 जून को पुलिस अधिकारियों से मिला था मनीष

राखी मर्डर कांड की पटकथा काफी दिनों से लिखी जा रही थी। फरवरी में राखी ने जब दूसरी शादी कर ली तो उसकी डिमांड भी बढ़ गई। पति मनीष सिन्हा के साथ रहने के बावजूद वह डॉक्टर के पीछे लगी रही। जबकि, उसे रास्ते से हटाने की साजिश में लगे डॉक्टर ने नजदीकियां बढ़ा दी। जून में नेपाल गई राखी के लापता होने पर मनीष ने पुलिस अधिकारियों को सूचना दी। लेकिन तब जांच के नाम पर एप्लीकेशन दबा दी गई। इसी मामले में जब राखी के भाई अमर श्रीवास्तव ने पुलिस को एप्लीकेशन दिया तो तत्काल मनीष के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई। मुकदमे में फंसने की आशंका में जब मनीष ने दिल्ली और लखनऊ तक गुहार लगाई तब एसटीएफ ने मोर्चा संभाला। शनिवार को चर्चा रही कि यदि एसटीएफ नहीं होती तो पत्नी की हत्या के आरोप में मनीष जेल में होता।

पति की दरख्वास्त को कूड़ेदान, भाई के एप्लीकेशन पर एक्शन

फरवरी में बिहार के मनीष सिन्हा से विवाह करने के बाद राखी ने नई जिंदगी शुरू कर दी थी। बावजूद इसके डॉक्टर डीपी सिंह से उसका जुड़ाव बना रहा। डॉक्टर के साथ उसकी खूब बातचीत होती थी। पिछले एक साल के भीतर राखी, उसके पति और डॉक्टर के बीच सैकड़ों बार बातचीत हुई थी। इसलिए मनीष को भी पत्नी की चिंता सताती थी। वह पहले से संशकित था कि उसकी पत्‍‌नी संग अनहोनी हो सकती थी। इसलिए राखी के लापता होने पर उसने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस से जुड़े लोगों का कहना है कि 24 जून को वह एसएसपी ऑफिस पहुंचा। राखी के नेपाल में गायब होने की जानकारी देते हुए मकान मालिक सहित कुछ लोगों पर आरोप लगाया। तब उसकी जांच सीओ और एसएचओ को सौंप दी गई। उधर, मनीष ने राखी के भाई से संपर्क साधा। यह बताया कि उसकी बहन लापता हो गई है। भाई ने किसी अन्य पर संदेह जताने के बजाय मनीष पर सारा दोष मढ़ दिया। पुलिस को बताया कि मनीष के साथ ही राखी नेपाल गई थी। तेजी दिखाते हुए शाहपुर पुलिस ने चार जुलाई को मनीष के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।

गोरखपुर से लेकर दिल्ली तक मनीष ने लगाई गुहार

घटना की छानबीन में पता लगा है कि पत्नी के अपहरण का मुकदमा दर्ज होने के बाद मनीष गोरखपुर से दिल्ली तक दौड़ता रहा। बीएसएफ से जुड़े मनीष ने गृह विभाग में पहुंचकर मामले की जानकारी दी थी। यूपी के सीएम से भी उसने मदद की गुहार लगाई। रसूखदार के खिलाफ मामला होने से गोरखपुर पुलिस एक्शन में नहीं आ रही थी। शनिवार को चर्चा रही कि डॉक्टर से जुड़ाव होने की वजह से कुछ पुलिस कर्मचारी मामले को पूरी तरह से दबाने की कोशिश में जुटे थे। उनका प्रयास था कि हर हाल में राखी के पति को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया। लेकिन गुपचुप जांच में जुटी एसटीएफ ने सारा खेल चौपट कर दिया। 17 दिसंबर को पुलिस के पास सारी डिटेल आ गई थी। उधर, फोटो की तस्दीक होने के बाद एसटीएफ जांच में जुटी थी। एसटीएफ की सक्रियता से मनीष को राहत मिल गई। जांच में पता लगा कि आठ लोगों का जुड़ाव राखी से था। शहर में शुक्ला सरनेम से चर्चित एक व्यक्ति ने मामले को मैनेज कराने के लिए काफी दौड़भाग भी की थी।

खत्म हो गया था गैंगरेप का मुकदमा

डॉक्टर डीपी सिंह एवं अन्य के खिलाफ उसकी पत्‍‌नी 31 जुलाई 2014 को गैंग रेप सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। महिला थाना को दिए गए एप्लीकेशन में उसने आरोप लगाया था कि 11 जून को उसके साथ घटना हुई थी। मुकदमा दर्ज करने के बाद महिला थाना ने मामले की जांच 24 अगस्त को कोतवाली थाना को ट्रांसफर कर दिया। जांच में डॉक्टर के खिलाफ गैंग रेप का आरोप झूठा पाया गया। तत्कालीन विवेचक ने इस मुकदमे में पहली पत्‍‌नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करने और मारपीट का दोषी पाते हुए चार्जशीट लगाई। 22 जनवरी 2016 को फाइल न्यायालय भेज दी गई।


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