रमजान मुबारक लेकिन जरा सम्भलकर

2014-07-02T07:01:37Z

- डायबिटीज के पेशेंट्स रोजा रखने से पहले डॉक्टर से लें सलाह

- रोजा अफ्तार के समय खाने-पीने की चीजों में बरतें सहूलियत

LUCKNOW: रमजान के दौरान रोजा रखने वाले डायबिटीज के मरीजों को कुछ समस्याएं हो सकती हैं। जिन्हें डायबिटीज रोगियों को ध्यान में रखना जरुरी है। इससे वे आसानी से रोजे भी रख सकते हैं और अपनी बीमारी को भी नियंत्रित रख सकते हैं।

जय क्लीनिक एंड डायबिटीज केयर सेंटर के डॉ एके तिवारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक काउंसिल ने भी ख्009 में ही अतिसंवेदशील मरीजों को रोजा न रखने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि डायबिटीज के रोगियों को शुगर का कम होना (हाइपोग्लाइसीमिया), शुगर का ज्यादा होना (हाइपरग्लाइसीमिया), डायबिटीज के कारण बेहोशी (किटोसिस्डोसिस और पानी की कमी), और नसों में खून का जमना (थ्राम्बोसिस) के अलावा पैरों में अकड़न, गैस का बनना, पेट फूलना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डॉक्टर से लें सलाह

अगर आप डायबिटिक हैं और रोजे रखने जा रहे हैं तो पहले अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें। अपनी दवा व इन्सुलिन की डोज का निर्धारण करा लें। पहले हफ्ते में जांच जरुरी है। उससे दवाओं का सही निर्धारण किया जा सकता है। ख्0 साल से ज्यादा उम्र के मरीज जिनका ब्लड शुगर लेवल तीन महीनों से सामान्य चल रहा हो। जिनमें डायबिटीज सम्बंधित कोई और जटिलता जैसे गुर्दा, हार्ट सम्बंधी जटिलताएं न हों।

खुद करें जांच

शुगर की जांच सहरी से पहले, दोपहर बाद व अफ्तार के बाद जरुरी है। पेशेंट को रोजे के दौरान अपनी जेब में एक कार्ड भी रखें जिसमें अपनी बीमारी, अपने डॉक्टर का नाम और नम्बर के साथ कोई टाफी या अन्य खाने की चीज रखें। बेहोशी की स्थिति में चार चम्मच चीनी या ग्लूकोज दें।

शुगर कम होने पर लक्षण

हाइपोग्लीसिया या शुगर कम होने पर मरीज को घबराहट, पसीना आना, हार्ट तेजी से धड़कना, बेहोशी महसूस होना जैसी समस्या हो सकती है।

तब रोजा न रखें

गर्भवती महिलाएं, बच्चों को दूध पिलाने वाली डायबिटिक महिलाएं और टाईप-क् डाइबिटीज के मरीजों को रोजा नहीं रखना चाहिए।


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