-दिल्ली एनसीआर में रहने वाले मेरठ में तलाशेंगे आशियाना

-सालों से धड़ाम पड़े मेरठ के रियल एस्टेट सैक्टर को लगेंगे पंख

Meerut: एक ओर जहां मेरठ के लिए मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखा दी गई है, वहीं मेरठ-टू-दिल्ली के रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम यानी आरआरटीएस हाई स्पीड रैपिड रेल प्रस्ताव के लिए तैयार की जा रही जमीन मेरठ के रियल एस्टेट सैक्टर के लिए संजीवनी साबित होगी। सोमवार को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड कमेटी और प्रशासनिक अफसरों ने रैपिड रेल के संभावित ट्रैक का भौतिक निरीक्षण किया।

आआरटीएस खोलेगी मेरठ के विकास के द्वार

मेरठ में हाई स्पीड रैपिड रेल की जमीन तैयार हो रही है, वहीं प्रोजेक्ट को लेकर शहर का विकास भी करवट ले रहा है। एक ओर जहां प्रोजेक्ट के शुरू होने से शहर के हजारों लोगों को सहुलियत मिल जाएगी, वहीं शहर के विकास में भी चार चांद लग जाएंगे।

मेरठ का रियल एस्टेट करेगा बूम

शहर में रैपिड रेल की आमद सबसे बड़ा प्रभाव रियल एस्टेट मार्केट पर पड़ेगा। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पिछले कुछ सालों से मेरठ ही नहीं बल्कि दिल्ली एनसीआर में रियल एस्टेट मार्केट चौपट पड़ा है। यहां तक कि कई बड़ी कंपनियों जहां अपने प्रोजेक्ट बीच में ही रोक दिए हैं, वहीं कुछ बिल्डर अपने प्रोजेक्ट को सेल नहीं कर पा रहे हैं। रैपिड रेल प्रोजेक्ट को लेकर बिल्डरों में एक नई ऊर्जा जगी है। विशेषज्ञों की मानें तो जो लोग गाजियाबाद, नोएडा, गुडगांव या फिर दिल्ली में इनवेस्ट नहीं कर पा रहे हैं। उनके लिए दिल्ली एनसीआर में मेरठ सबसे अच्छा विकल्प साबित होगा। ना कॉलोनाइजर मेरठ की ओर रुख करेंगे।

बढ़ेंगे जमीन के रेट

प्रोजेक्ट के आने से एक ओर जहां रियल एस्टेट को बूम मिलेगा वहीं मेरठ और आस-पास की जमीन के रेट आसमान छुएंगे। जमीन के मूल्यों में होने वाली वद्धि का सबसे बड़ा प्रभाव दिल्ली व रूड़की रोड पर पड़ेगा। हालांकि प्रोजेक्ट व निकट भविष्य को देखते हुए कुछ बिल्डरों ने तो अभी से अपने प्रोजेक्ट का ब्लू प्रिंट बनाना तैयार कर दिया है। दिल्ली से आसान कनेक्टेविटी को ध्यान में रखते हुए परतापुर बाइपास, रूड़की रोड, दिल्ली रोड व हापुड बाइपास आदि जगहों के रेट भ्0 से 70 फीसद तक बढ़ सकते हैं।

इंडस्ट्री में भी आएगा उछाल

दिल्ली एनसीआर का हिस्सा होते हुए भी अभी मेरठ और दिल्ली के बीच कोई कनेक्टेविटी नहीं बन पाई है। इसका सबसे बुरा असर यहां के इंडस्ट्रीयल सेक्टर पर पड़ा है। इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर मेरठ की बिजली-पानी-सड़क के लिहाज से कोई आमूल-चूल बदलाव देखने को नहीं मिला है। बल्कि इसके विपरीत खस्ता हाल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण मल्टीनेशनल कंपनियों ने भी मेरठ की ओर से रुख मोड़ा है, जबकि यहां की अपनी इंडस्ट्रीज भी विस्तार नहीं पा चुकी है। अब चूंकि आरआरटीएस का मेरठ में आना सुनिश्चित हो गया है, तो यहां के उद्यमियों में भी निकट भविष्य को लेकर सुनहरी आस जगी है।

मेट्रो के बाद अब रैपिड रेल

हालांकि मेरठ को मेट्रो सिटी का खिताब तो काफी पहले मिल चुका है, लेकिन अभी तक मेट्रो सुविधाओं के अभाव में यहां का अपेक्षाकृत विकास नहीं हो सका है। अरसे बाद मेरठ को मिली मेट्रो और फिर आरआरटीएस रैपिड रेल के साथ रियल एस्टेट, इंडस्ट्रीयल डवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले सुधार से जनपद को सही मायनों में मेट्रो सिटी का दर्जा मिल सकेगा।

ये मिलेंगी सुविधाएं

सस्ता होगा ऐसी का सफर

दिल्ली जाने के लिए अभी तक का सफर यहां के लोगों के लिए सबसे अधिक थकान भरा और उबाउ साबित होता है। एक घंटे के सफर को पूरा करने के लिए यात्रियो को कभी-कभी ढ़ाई से तीन घंटे के सफर से गुजरना पड़ता है। लेकिन रैपिड रेल से न केवल यह सफर सिमट कर एक घंटे का रह जाएगा, वहीं कम खर्च पर ऐसी का सफर यात्रियों के लिए लाभ का सौदा साबित होगा।

शहर को मिलेगी ऑक्सीजन

सबसे बड़ा असर तो दिल्ली रोड के जाम को मिलेगा। ट्रेफिक लोड के दृष्टि से देखा जाए तो महानगर का सबसे अधिक ट्रेफिक लोड दिल्ली रोड पर ही है। पीक आवर्स में एक बार यदि आप जाम में फंस गए तो दस किमी की दूरी तय करने में आपको आधे से पौना घंटा लग सकता है। मेट्रो और फिर उसके बाद रैपिड रेल के आने से इस रोड का सारा रेल में सफर करेगा, जिससे शहर को ट्रेफिक की मार से राहत मिलेगी।

मेट्रो इंडस्ट्रीयल सेक्टर के लिए ऑक्सीजन साबित होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर लचर होने कारण यहां मल्टीनेशनल कंपनियां दूरी बनाए हुए हैं, लेकिन रैपिड रेल के आने से मेरठ दूसरा नोएडा और गुडगांव नजर आएगा।

पंकज गुप्ता, आईआईए

मेट्रो की आमद शहर के विकास को सीधा प्रभावित करेगी। आने वाले पांच सालों में मेरठ गुडगांव और नोएडा की तर्ज पर विकास करता दिखाई पड़ेगा। दिल्ली से सीधी कनेक्टेविटी और एनसीआर का पार्ट होने के कारण बड़ी तदाद में कॉलोनाइजर मेरठ का रूख करेंगे।

सुनील तनेजा, अंसल हाउसिंग

Posted By: Inextlive