स्थापना के दिन बहुत याद आए महाराज

2015-01-25T07:01:40Z

RANCHI: छोटानागपुर पर शासन करने वाले नागवंशीय शासन की नींव 64 एडी (पहली शताब्दी का 64वां साल)में वसंत पंचमी के दिन ही महाराज फणीमुकुट राय के नेतृत्व में पड़ी थी। शनिवार को नागवंशीय शासन की स्थापना का दिन था। लेकिन इस दिन रातू पैलेस में उदासी फैली हुई थी। कारण छोटानागपुर के नागवंशी महाराज चिंतामणि शरण नाथ शाहदेव जनता के बीच नहीं है। पिछले दिनों ही उनका निधन हो गया। वह इस वंश के 62वें महाराजा थे, जो छोटनागपुर क्षेत्र में देवता की तरह माने जाते थे और राजा भी जनता को अपना बड़ा भाई मानते थे, लेकिन उनके नहीं रहने से यहां के लोगों को उनकी कमी खल रही है। 1951 साल में पहली बार स्थापना दिवस पर राजमहल की गद्दी बिना महाराज के विरान पड़ी है।

साल 2010 में युवराज का भी हो गया निधन

रातू के इकलौते युवराज गोपाल शरण नाथ शाहदेव, जो हटिया के विधायक होने के साथ ही जनता में भी काफी लोकप्रिय थे, उनका 28 जून 2010 को आकस्मिक निधन हो गया। इस घटना से महाराजा को गहरा सदमा पहुंचा था। अब रातू पैलेस में सिर्फ महाराज की बहु युवरानी और उनकी बेटियां ही रहती हैं। महाराजा की चार पुत्रियां हैं, जिसमें सबसे बड़ी रानी माधुरी हैं जिनका विवाह यूपी के विजयगढ़ रियासत में हुआ है। दूसरी पुत्री का नाम रानी कल्पना सिंह है, जो यूपी के गलगला स्टेट में ब्याही गई हैं। तीसरी का नाम कुंवरानी तृप्ति सिंह है, इनकी शादी भी यूपी के बिजुआ रियासत में हुई है। सबसे छोटी बेटी कुंवरानी गायत्री हैं, जो यूपी के नरौली स्टेट में ब्याही गई हैं।

सुतियांबे में शुरू हुआ था नागवंश शासन

आज के पिठोरिया के पास स्थित सुतियांबे गढ़ में 64वें एडी में नागवंशीय शासन की शुरुआत हुई। इतिहासकारों का कहना है कि उस समय इस गढ़ में आदिवासी राज मुदरा मुण्डा का शासन था। कहा जाता है कि एक दिन राजा मुदरा मुण्ड एक सरोवर के किनारे से गुजर रहे थे। उसी समय उन्होंने देखा कि सरोवर के पास एक नवजात शिशु पड़ा है। जिसकी एक फनधारी कोबरा नाग रक्षा कर रहा है। राजा मुदरा मुण्डा ने इस बालक को अपने घर लाकर अपने बच्चे की तरह पाला। जब राजा के उत्तराधिकारी महाराज के चुनाव की बारी आई तो महराज ने एक कॉम्पटीशन करावाया। इसमें महराज के अपने बेटों के साथ ही इस उस दत्तक पुत्र ने भी सभी राज कलाओं का प्रदर्शन किया। इसके जज उस समय के सभी कलाओं के ज्ञानी लोग थे। ऐसे में महाराज के दत्तक पुत्र को सबने सर्वश्रेष्ठ पाते हुए विजेता चुना, जिसे महाराज ने अपना उत्तराधिकारी बनाया। दत्तक पुत्र महाराजा फणि मुकुट राय थे। इन्हीं से नागवंशीय राज शासन की शुरुआत हुई। चूंकि नाग ने उनकी रक्षा की थी, इसलिए इस राजवंश ने अपना नामकरण नागवंशीय किया।


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