पढ़िए 'रुस्‍तम' की असली कहानी

2016-08-12T12:16:04Z

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म 'रुस्तम' आज 12 अगस्त को रिलीज हो रही है। सच्‍ची घटना पर आधारित यह फिल्‍म रिलीज से पहले ही काफी चर्चा में रही है। ऐसे में अब देखना यह है कि 1959 में मुंबई के एक चर्चित मर्डर केस पर बनी यह फिल्‍म दर्शकों को कितनी पसंद आती हैं। आइए जानें आज रिलीज फिल्‍म'रुस्‍तम' की असली कहानी


चर्चित मर्डर केस पर

अभिनेता अक्षय की कुमार की इस साल अब तक 'एयरलिफ्ट' और 'हॉउसफुल 3' जैसी फिल्म रिलीज हो चुकी है। ऐसे में आज उनकी एक और फिल्म 'रुस्तम' भी दर्शकों के सामने हैं। इस फिल्म अक्षय कुमार के आलवा इलियाना डीक्रूज और ईशा गुप्ता जैसे कई कलाकार काम कर रहे हैं।  डायरेक्टर टीनू सुरेश देसाई के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1959 में मुंबई के एक चर्चित मर्डर केस पर आधारित है।

अनोखी तस्वीर पेश

इस मामले के फैसले ने भारत के ज्यूडिशियल सिस्टम की एक अनोखी तस्वीर पेश की थी। फिल्म में एक्टर अक्षय एक नेवी अफसर केके नानावटी के किरदार में हैं। यह पूरी फिल्म विवाहेत्तर संबंधों के बीच में बाहरी प्रेम संबंधों की वजह से हुए कत्ल की कहानी पर बेस्ड है। उस दौर में यह केस काफी चर्चा में रहा है। इसमें जमकर मीडिया ट्रॉयल भी हुआ और हत्या करने वाले नेवी अफसर नानावटी के पक्ष में समाज भी खड़ा था।

अफेयर शुरू हो गया

नेवी केके नानावटी की शादी विदेशी मूल की सैलविया से हुई थी। नानावटी सैलविया अपने तीन बच्चों के साथ मुंबई में सेटल थे लेकिन नेवी में होने की वजह से वह अधिकांश समय देश से बाहर ही रहते थे। ऐसे में उनकी गैर मौजूदगी में नानावटी के दोस्त प्रेम आहूजा का घर आना जाना बढ़ गया। जिससे अमीर, खूबसूरत व गाड़ियों के शोरूम के मालिक प्रेम आहूजा और सैलविया का अफेयर शुरू हो गया।
तलाक के बाद शादी
ऐसे में जब यह बात नानावटी को पता चली तो उसकी जिंदगी भूचाल सा आ गया। उसने यह बात अपनी पत्नी से पूछी तो उसने सच्चाई को कबूल कर लिया। उसने सैलविया से यह भी पूछा कि क्या वह प्रेम आहूजा से शादी करना चाहती है। हालांकि इस दौरान सैलविया काफी अपसेट थी क्योंकि प्रेम ने उससे कहा था कि अगर वह अपने पति को तलाक दे देगी तो वह उससे शादी कर लेगा।
प्रेम आहूजा के घर
हालांकि नानावटी प्रेम को जानता था कि वह किस तरह का आदमी है। यह बात नानावटी को बरदाश्त नहीं हुई। उसने अपने मन में पूरा प्लान कर लिया। इस दौरान उसने अपनी पत्नी को डिप्रेशन से बाहर निकालने और माहौल ठीक करने के लिए उसे बच्चों के साथ मेट्रो सिनेमा पर मैटिनी शो देखने के लिए छोड़ दिया। इसके बाद अपनी सर्विस रिवाल्वर व गोलियां लेने के बाद सीधे प्रेम आहूजा के घर पहुंचे।

जिम्मेदारी से इंकार

यहां पर उसने प्रेम आहूजा से पूछा कि क्या वह सैलविया और उसके बच्चों की जिम्मेदारी उठाने को तैयार है। इस पर प्रेम ने जवाब दिया कि क्या जो औरते उसके साथ सोती हैं वह उन सबके साथ शादी कर लेगा। यह बात सुन नानावटी ने प्रेम को तीन गोलियां मारी। जिससे उसकी मौत हो गई और वह खुद पुलिस के पास पहुंच गए। ऐसे में इस केस में नानावती पर धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
हत्या करने वाले का पक्ष
कई सालों चले इस मामले में नानावटी 3 साल की सजा काटकर बरी हुए। इसके बाद बीवी और बच्चों के साथ कनाडा चले गए। कहते हैं कि इस मामले में लोग नानावटी को देशभक्त के रूप में ले रहे थे। वह जब सुनवाई के लिए अदालत जाते थे तब उनके समर्थन में लोग नारेबाजी करते थे। नेवी ने भी अपने अफसर का सपोर्ट किया था। ऐसा कम ही देखने को मिलता है जब समाज हत्या करने वाले के पक्ष में खड़ा हो।

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