करोड़ों के स्टांप ड्यूटी की होगी वसूली

2018-07-02T06:00:05Z

हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने कसा शिकंजा, किसानों से होगी वसूली

मेरठ-हापुड़ के किसानों ने स्टांप विभाग को लगाई करोड़ों की चपत

एनएचएआई द्वारा किए गए अधिग्रहण के बाद फ्री में करा ली थी रजिस्ट्री

Meerut। शासनादेश को तोड़-मरोड़कर कर करोड़ों रुपये के स्टांप का फटका मेरठ-हापुड़ के किसानों ने स्टांप विभाग को लगाया तो अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग किसानों ने स्टांप शुल्क की वसूली करेगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव स्टांप एवं निबंधन हिंमाशु कुमार ने सूबे के सभी कमिश्नर, डीएम और स्टांप विभाग के अधिकारियों को पत्र जारी कर किसानों से स्टांप ड्यूटी की वसूली के आदेश दिए हैं।

जरा समझ लें

तत्कालीन बसपा सरकार में निबंधन अनुभाग के प्रमुख सचिव नेतराम ने जुलाई 2011 में एक शासनादेश जारी किया था। इसके मुताबिक स्टेट गर्वमेंट की परियोजनाओं में जिन किसानों अथवा जनसामान्य की भूमि का अधिग्रहण किया गया है, उन्हें किसी अन्य स्थान पर जमीन/मकान/दुकान खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में छूट मिलेगी। शासनादेश के मुताबिक उन्हीं किसानों का योजना का लाभ मिलना था जिनकी भूमि का अधिग्रहण यूपी गर्वमेंट की परियोजनाओं में हुआ है। छूट की समय सीमा भी सरकार ने एक वर्ष निर्धारित की थी। प्रावधान के तहत छूट की यह धनराशि (स्टांप ड्यूटी) अधिग्रहण करने वाला विभाग रजिस्ट्री विभाग को अदा करेगा। बता दें कि रेलवे इस छूट का लाभ किसानों का दे रहा था, जबकि नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया इस छूट से हमेशा इनकार करता रहा है।

मेरठ-हापुड़ में चला खेल

शासन की पड़ताल में निकल आया कि मेरठ-हापुड़ में 2014 और 2015 के बीच सैकड़ों किसानो ने एनएचएआई के मेरठ-बुलंदशहर चौड़ीकरण और डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर परियोजनाओं में शासनादेश से छेड़छाड़ कर स्टांप ड्यूटी में छूट का लाभ ले लिया। मेरठ के उप निबंधन द्वितीय कार्यालय में सर्वाधिक गोरखधंधा हुआ। जनपद तत्कालीन एआईजी स्टांप संजय श्रीवास्तव द्वारा 80 और एडीएम फाइनेंस द्वारा 124 कुल 204 केसेस दर्ज कराए गए थे। अधिकारियों ने शासनादेश में तोड़मरोड़कर स्टांप ड्यूटी अदा न करने का आरोप किसानों पर लगाया था।

हाईकोर्ट चले गए थे किसान

मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही रजिस्ट्री विभाग ने किसानों को स्टांप शुल्क अदा करने के लिए नोटिस जारी किया। आनन-फानन में हुई इस कार्यवाही के बाद किसानों ने सरकार पर दबाव बनाया तो वहीं कुछ किसान हाईकोर्ट चले गए। किसानों के प्रत्यावेदन को शासन स्तर पर एनएचएआई को भेजा गया तो वहीं जबाव में एनएचएआई ने साफ हाथ खड़े कर दिया और रजिस्ट्री विभाग को किसी प्रकार की स्टांप ड्यूटी देने से मना कर दिया। वहीं दूसरी ओर रजिस्ट्री विभाग की पैरवी के बाद हाईकोर्ट ने 22 मई 2018 को आदेश जारी कर छूट पर किसानों के क्लेम को खारिज कर दिया।

किसानों से होगी वसूली

मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, नोएडा, मुजफ्फनगर, अमरोहा, अलीगढ़ आदि सहित कई जनपदों के किसानों ने विगत वर्षो में करोड़ों रुपये की स्टांप की चपत विभाग को लगाई है। प्रमुख सचिव ने सभी जनपदों के कमिश्नर-डीए समेत स्टांप विभाग के अधिकारियों को ऐसे प्रकरणों में किसानों से संपत्ति की खरीद-फरोख्त में नियमानुसार स्टांप ड्यूटी की वसूली के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्देश दिए हैं कि वे (रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी) स्टांप ड्यूटी पर ब्याज की वसूली भी करें।

Posted By: Inextlive

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