मुआवजा या मजाक: राज्य सरकार का हिट एंड रन में मरने वाले लोगों के लिए इंसाफ। यदि आप गंभीर रूप से घायल हैं तो मिलेंगे 12500 रुपए। कई घरों के चिराग बुझ जाते हैं सड़क दुर्घटना में। दस्तावेजों के दायरे से बांधकर किया जाएगा साबित तब मिलेगा मुआवजा।

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RANCHI(12 April): झारखंड सरकार ने एक ंिजंदगी की कीमत महज 25 हजार रुपए तय कर दी है। यह कीमत पीडि़त पक्ष के लिए मुआवजा है या उनके साथ किया जा रहा बुरा मजाक यह सवाल संबंधित अधिकारियों से लेकर पीडि़तों तक के मन को परेशान कर रहा है। राज्य सरकार के निर्देश पर परिवहन विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि सड़क दुर्घटनाओं में हाल के दिनों में काफी लोगों की मौत हो रही है। हिट एंड रन मामलों में गाड़ी वाले धक्का मार कर भाग निकलते हैं और उन्हें पकड़ना भी बहुत मुश्किल होता है। मौत के बाद पीडि़त पक्ष को उचित मुआवजा तक नहीं मिल पाता, जिसके कारण कई घरों में आर्थिक तंगी के हालात बन जाते हैं। ऐसे घरों को आर्थिक तंगी से बचाने के लिए सरकार की तरफ से उन्हें 25 हजार रुपए मुआवजा दिया जाएगा। ये वो रुपए होंगे, जिनके सहारे पीडि़त परिवार अपनी आर्थिक तंगी को दूर कर सकेंगे। आज की महंगाई के इस दौर में 25 हजार रुपए से तंगी कैसे दूर हो सकेगी, इसका जवाब परिवहन विभाग के पास नहीं है।

 

कानूनी दावं-पेंच का पूरा जाल

इस मुआवजे की राशि के लिए भी पीडि़त पक्ष को कई कानूनी दावं-पेंच से गुजरना होगा। उन्हें अपने परिजन की मौत का गम सरकारी बाबुओं के दफ्तरों के चक्कर लगाकर ही भुलाने होंगे। मुआवजे के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र, थाना में दर्ज प्राथमिकी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृतक का आधार कार्ड अन्य पहचान पत्र, आवेदनकर्ता का पहचान पत्र, बैंक पासबुक समेत अन्य जरूरी दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी।

 

गंभीर रूप से घायल को 12,500

हिट एंड रन मामले में यदि जान बच गई, पर पीडि़त पक्ष गंभीर रूप से घायल हो गया हो तो उसे इलाज कराने के लिए 12 हजार 500 रुपए मुआवजा राशि मिलेगी। दवाइयों की बढ़ती कीमत और अस्पतालों के भारी भरकम बिल के बीच इन 12 हजार 500 रुपए के साथ पीडि़त पक्ष कब तक खड़ा रह पाएगा, इसपर किसी का ध्यान नहीं है।

 

सरकारी अस्पतालों में दवाएं नहीं

दुर्घटना के बाद यदि कोई व्यक्ति सरकारी अस्पताल में इलाज कराता है तो वहां डाक्टरों को तो रुपया नहीं देना पड़ता, लेकिन दवाईयां बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। रिम्स के बाहर सड़क पर कई निजी दवा दुकानों के सहारे ही रिम्स चल रहा है।

 

गवाह नहीं मिलते यह मान रहा विभाग

परिवहन विभाग भी मानता है कि सड़क दुर्घटना के मामले में कानूनी दावं-पेंच के कारण कोई भी व्यक्ति गवाही नहीं देना चाहता, साथ ही अज्ञात स्थान पर कांड होने के कारण अपराधी भी नहीं पकड़े जा पाते। लेकिन, इसके समाधान का कोई तरीका सरकार के पास नहीं है।

 

एसडीओ के पास जमा करने होंगे दस्तावेज

विभाग के निर्देश के अनुसार, जिन्हें अपने परिजन की मृत्यु के लिए जिंदगी की कीमत के रूप में सरकारी मुआवजा 25 हजार रुपए चाहिए, वे लोग संबंधित एसडीओ के कार्यालय में सारे दस्तावेजों के साथ सम्पर्क करें। केस सत्यापित होने के बाद उन्हें मुआवजे की राशि मिल जाएगी।

 

वर्जन

हाल के दिनों में रोड एक्सीडेंट की काफी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसको देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। यह कमिटी केवल हिट एंड रन मामले में मुआवजे का काम करेगी। मुआवजे की राशि सिर्फ एक आर्थिक मदद है, जो पीडि़त परिवार को दी जाती है। साथ ही यह एक अभियान भी है कि लोग कानूनी पेंच के डर से मामले को दबाएं नहीं, बल्कि उसे सामने लाएं।

-अंजली यादव, एसडीओ, सदर अंचल

Posted By: Inextlive