10 दिन पहले बनी सड़क दो दिन में बही

2019-07-12T06:00:59Z

बारिश के चलते सड़क पर दिखाई दे रही सिर्फ कंकरीट और रेत

सड़क निर्माण के दौरान जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण तक नहीं करते

VARANASI:

पीडब्ल्यूडी की लापरवाही और अधिकारियों की मॉनिटरिंग की कमी के चलते महज 10 दिन पहले बनी सड़कें पहली बारिश भी नहीं झेल पाई। शहर की ज्यादातर सड़कें बारिश के पानी में बह चुकी हैं। मानसून के दस्तक देने से पहले पीडब्ल्यूडी ने शहर में कई सड़कों का निर्माण और मरम्मत करवाया था। अफसोस कि गिट्टी और तारकोल से बनी सड़कों पर अब सिर्फ कंकरीट और रेत बची है। सड़क गढ्डों में तब्दील हो चुकी है। इससे हर घंटे हादसे हो रहे हैं। महमूरंगंज से लेकर चितईपुर चौराहे तक सड़कों पर सिर्फ बड़े-बड़े गड्ढे और कंक्रीट ही दिखाई दे रहे हैं।

निरीक्षण तक नहीं करते अफसर

सड़कों के निर्माण के दौरान जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण तक नहीं करते। ऐसे में ठेकेदार मनमर्जी से सड़क बनाते हैं। जो सामग्री उपयोग में ली जाती है वह घटिया स्तर की होती है। इसके कारण सड़कें जरा सी बारिश में ही बह जाती हैं। ऐसा ही इस बार भी हुआ है.अब सवाल ये है कि जब पीडब्ल्यूडी लाखों रुपए का भुगतान करती है तो निर्माण कायरें की सही मॉनिटरिंग क्यों नहीं की जाती, ताकि आमजन से रोड टैक्स से वसूली जाने वाली राशि का सही उपयोग हो सके।

कैंट स्टेशन से चितईपुर तक नर्क

चितईपुर क्षेत्र में सड़क पूरी तरह से उखड़ गई है। यहां भी पानी निकासी की समस्या है। चौराहे से इंद्रानगर कालोनी तक सड़क पर 15 से 20 इंच के इतने गढ्डे है कि यहां सड़क ही नजर नहीं आ रही। बारिश के दौरान सड़कों पर पानी भर जाने से पूरी सड़क पर गढ्डे ही गढ्डे नजर आने लगे हैं। सड़क की जगह अब यहां केवल कंकरीट बची है। वहीं कैंट रेलवे स्टेशन से रोडवेज की ओर जाने वाला मार्ग भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। यहां पिछले चार दिन से पानी और कीचड़ जमा होने से नारकीय स्थिति बनी हुई है। डेली कोई न कोई बाइक सवार व आटो पलट रहे हैं। गढ्डों में पानी भर जाने से वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीरों को भी मुसीबतों से दो चार होना पड़ रहा है।

10 दिन में स्वाहा

करीब 10 दिन पहले मंडुआडीह-ककरमत्ता फ्लाइओवर के पास सड़क मरम्मत कराई गई थी। यहां पानी निकासी के लिए सिस्टम नहीं है। इसकी वजह से दो दिन में पूरी रोड खराब हो गई। वहीं अंधरापुल चौराहा और मलदहिया स्थित सिंह मेडिकल के पास 20 दिन पहले बनी सड़क भी पानी में बह गई।

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सड़क निर्माण का मानक

ग्रेडेशन

- सड़क बनाते समय लेबोरेट्री डिजाइन के अनुसार लेयर बनाई जाए। इसमें मूंगिया, डस्ट डामर की परत सही अनुपात में बिछे।

- डेनसिटी-सड़क की मजबूती के लिए डामर निर्माण सामग्री का फैलाव सही होना जरूरी है।

- सड़क बनाते समय 90 डिग्री तापमान पर गर्म किए गए डामर पर पूरी रोलिंग होनी चाहिए।

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कोलतार

कोलतार की मात्रा फिक्स करनी होती है, इससे गुणवत्ता अच्छी रहती है।

- दो लेयर की सड़क में 3.30 से 4 फीसदी डामर और तीन लेयर में 4.4 से 5 फीसदी डामर होना जरूरी है।

- ऊपरी थिल कोट सात से आठ फीसदी होनी चाहिए।

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लाख की लागत से 15 दिन पहले

बनी थी टूटी सड़के

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से 20 इंच की सड़कों पर हो गए हैं गड्ढे

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दिन से भरा है गड्ढों में बारिश का पानी

जहां भी सड़कें खराब हुई हैं उन्हें आज ही ठीक करा दिया जाएगा। हालांकि बारिश के सीजन में पक्की सड़क तो नहीं बन पाएगी, फिर भी जहां गड्ढे है, उनमें गिट्टी भरकर पाट दिया जाएगा।

ज्ञान प्रकाश पांडेय, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी

कैंट, लहरतारा फ्लाइओवर मार्ग में गड्ढा होने की वजह नगर निगम है। सीवर लाइन साफ न होने से पानी जमा हो जा रहा है। फिर भी हम गड्ढों में गिट्टी डालकर पाट देंगे।

अरुण कुमार, परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम


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