यह हादसों की मंडी है

2015-04-05T07:02:30Z

-टूटी सड़कों पर चलना हुआ मुश्किल

GORAKHPUR: महेवा मंडी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। आए दिन कोई न कोई घायल हो जाता है। फिर भी इनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। मछली और गल्ला मंडी को छोड़ दिया जाए तो फल-सब्जी और आलू मंडी में कुल सात सड़के हैं। क्म् साल पहले करोड़ों रुपए की लागत से यहां सीसी रोड का निर्माण करवाया गया था। निर्माण के एक साल बाद ही यह रोड टूटने लगी। आज स्थिति यह है कि इन रोड्स से गुजरना किसी स्टंट से कम नहींहै। सड़कों पर गड्ढे मंडी प्रशासन की लापरवाही की कहानी कह रहे हैं।

पूर्वाचल की सबसे बड़ी मंडी की सड़कों का हाल जानने आई नेक्स्ट रिपोर्टर महेवा मंडी के मेन गेट पर पहुंचा। यहां जो देखा वह चौंकाने वाला था। सड़कों की बदहाल स्थिति के साथ ही कई समस्याएं नजर में सूई की तरह चुभ रही थी। करोड़ों खर्च करने के बाद भी बेहतर सुविधाओं से महरूम ये व्यापारी मंडी की दु‌र्व्यवस्था को उजागर कर रहे थे। व्यापारियों का कहना है कि फल-सब्जी और आलू मंडी की क्ब्8 दुकानें हैं। साथ ही भ्भ् केला भट्ठी और तीन बड़े चबूतरे हैं। इस एरिया में वाहनों के आने-आने के लिए कुल सात मार्ग हैं जो टूट चुके हैं।

टूटे डिवाइडर, खुले मैनहोल

रोड डिवाइडर्स का तो बुरा हाल है। खुले सीवर होल हादसे को न्योता दे रहे हैं। मंडी में कुल क्0क् सीवर होल है। इसमें से कुछ में ही लोहे की जाली लगी है। आधे से अधिक की हालत ऐसी है कि रोजाना कोई न कोई गिर कर अस्पताल पहुंच जाता है।

रोड्स की हालत खस्ता है। कई जगहों से तो बड़े वाहन जा ही नहींसकते। रोड खराब होने की वजह से जाम भी लग जाता है।

-अभिनाष गुप्ता, नारियल करोबारी

मंडी प्रशासन की उदासीनता की वजह से सड़कों की हालत खराब है। सोलह साल पहले सीसी रोड बनाया गया था, लेकिन निर्माण के कुछ ही दिनों बाद ही टूट गया।

-प्रमोद गुप्ता, उप महामंत्री, पूर्वाचल फल-सब्जी विक्रेता संघ

मंडी की समस्याओं को दूर करने के लिए मुख्यालय लखनऊ में मीटिंग हुई थी। इसमें दुकानों की रिपेयरिंग और अन्य मरम्मत के लिए चर्चा हो चुकी है। जल्द ही मंडी का कायाकल्प हो जाएगा।

एमपी गंगवार, डीडीए मंडी परिषद

इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। इसकी जानकारी निर्माण विभाग के पास है। वहीं मंडी में निर्माण और मरम्मत कार्य करवाती है।

सुभाष यादव, सचिव मंडी समिति


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