रोहतास बिल्डर्स को भरना होगा 3930 करोड़ का जुर्माना कई अन्य पर गाज

2019-06-25T06:00:36Z

-रेरा की समीक्षा बैठक में लिये गए कई महत्वपूर्ण निर्णय

-अंसल को एक करोड़ का जुर्माना, उन्नति होल्डिंग्स के खिलाफ एसआईटी जांच की सिफारिश

LUCKNOW : बायर्स के साथ धोखाधड़ी करने वाले बिल्डर्स और प्रमोटर्स पर रेरा ने अपनी नजर टेढ़ी कर ली है। सोमवार को रेरा की समीक्षा बैठक में राजधानी के रोहतास बिल्डर्स के रायबरेली रोड प्रोजेक्ट पर 39.30 करोड़ का जुर्माना लगाया है, जबकि सुल्तानपुर रोड प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन आवेदन कैंसिल कर दिया है। इतना ही नहीं, अंसल एपीआई पर भी एक करोड़ रुपये का जुर्माना ठोंका है। जबकि, उन्नाव में बन रही यूपीएसआईडीसी की ट्रांस गंगा सिटी प्रोजेक्ट को भी रजिस्टर्ड कराने का नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा नोएडा की उन्नति फ्यूचर होल्डिंग्स के खिलाफ एसआईटी जांच की सिफारिश की गई है।

जुर्माना नहीं भरा तो नीलाम होगी प्रॉपर्टी

यूपी रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी के अध्यक्ष राजीव कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को अथॉरिटी की 15वीं समीक्षा बैठक रेरा मुख्यालय में संपन्न हुई। सचिव अबरार अहमद ने बताया कि बैठक में रोहतास ग्रुप के ऑनगोइंग प्रोजेक्ट्स की समीक्षा में पाया गया कि प्रमोटर रेरा के प्राविधानों की लगातार अनदेखी करते हुए तमाम नोटिस के बावजूद रायबरेली रोड स्थित इंटीग्रेटेड टाउनशिप ऑनगोइंग प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया। इसके मद्देनजर इस प्रोजेक्ट पर 39.30 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना प्रमोटर को 30 दिन के भीतर जमा करना होगा। अगर जुर्माना अदा न किया गया तो यह रकम भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूली जाएगी। यानी ग्रुप की प्रॉपर्टी को नीलाम भी किया जा सकता है। वहीं, ग्रुप के एक अन्य सुल्तानपुर रोड प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन आवेदन प्रमोटर के संबंधित दस्तावेज पूरे न होने की वजह से कैंसिल कर दिया गया है। बताया गया कि प्रमोटर को फिर से एक माह का समय दिया गया है, जिसमें वह सभी दस्तावेज पूरे कर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन करने के लिये आवेदन कर सकता है। अगर इस मियाद में भी वह ऐसा करने में नाकाम रहा तो उस पर भी जुर्माना लगाया जाएगा। आवंटियों के हित को देखते हुए प्राधिकरण के सदस्य कल्पना मिश्रा, भानुप्रताप सिंह, एलडीए के वीसी, रेरा के फायनांस कंट्रोलर व रेरा के टेक्निकल एडवाइजर की समिति गठित की गई है। यह समिति एक माह के भीतर वर्किंग पॉलिसी को लेकर अपना प्रस्ताव उपलब्ध्ा कराएगी।

अंसल एपीआई पर भी गाज

सचिव अबरार अहमद ने बताया कि अंसल एपीआई द्वारा अथॉरिटी के आदेशों का पालन न करने की वजह से उस पर एक करोड़ रुपये जुर्माना लगाया गय है। यह धनराशि उसे एक माह के भीतर डिमांड ड्राफ्ट के जरिए रेरा में जमा करनी होगी। अगर प्रमोटर ने यह रकम तय मियाद में जमा न की तो इसकी वसूली भी भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूल की जाएगी। इसके अलावा अंसल एपीआई के छह प्रोजेक्ट्स के पेंडिंग मामलों को चार माह के लिये सस्पेंड रखने का निर्णय लिया गया है। बताया गया कि अंसल एपीआई को निर्देश दिया गया है कि वह हिंदी व अंग्रेजी के दो-दो अखबारों में नोटिस जारी कर एस्क्रो अकाउंट के बारे में सूचना दी जाए और आवंटियों से इसी एस्क्रो अकाउंट में ही रकम जमा कराई जाए। प्रमोटर इसके अलावा कोई अन्य खाते में रकम जमा नहीं करा सकेगा। इसके अलावा अंसल एपीआई को प्रोजेक्ट के ऑडिट के लिये सीएजी पैनल से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करना होगा।

एसआईटी जांच की सिफारिश

उन्नति फच्ॅच्र्यून होल्डिंग्स लिमिटेड द्वारा नोएडा स्थित पांच परियोजनाओं अरण्या फेज 1,2,3,4 व 5 में परियोजना के कार्यो को पूर्ण न करने, आवंटियों से ली गई 107 करोड़ रुपये की रकम को कहीं और डायवर्ट करने के लिये राज्य सरकार को ग्रुप के खिलाफ एसआईटी जांच की सिफारिश की गई है।

ट्रांस गंगा सिटी प्रोजेक्ट को भी नोटिस

सचिव अबरार अहमद ने बताया कि उन्नाव में यूपीएसआईडीसी की ट्रांसगंगा सिटी ऑनगोइंग प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन रेरा के आदेश के बावजूद नहीं कराया गया है। जिस पर रेरा ने नोटिस जारी करते हुए यूपीएसआईडीसी को प्रोजेक्ट का एक माह के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा है। अगर इस मियाद में यूपीएसआईडीसी ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो इस प्रोजेक्ट की कुल लागत का 10 परसेंट जुर्माना लगाया जाएगा।

262 चिन्हित प्रोजेक्ट्स पर भी कार्रवाइर् की तलवार

यूपी रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के जरिए लखनऊ व बाराबंकी के बीच एलडीए की सीमा के 10 किलोमीटर भीतर की 262 परियोजनाएं चिन्हित की गई थीं। इनमें से 75 परसेंट प्रोजेक्ट प्लॉटिंग व बाकी 25 परसेंट अपार्टमेंट निर्माण से संबंधित हैं। बताया गया कि सेंटर से मिली विस्तृत रिपोर्ट पर अपर मुख्य अधिकारी लखनऊ व बाराबंकी से इन प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी साथ ही अवैध रूप से डेवलप किये जा रहे प्रोजेक्ट्स के खिलाफ प्राविधानों के मुताबिक कार्रवाई के लिये डीएम लखनऊ व बाराबंकी से सिफारिश की जाएगी।


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