'कंगारू केयर' से होगी नवजात की सुरक्षा

2018-09-26T06:00:07Z

-कम वजन व बेहद कमजोर पैदा हुए शिशुओं की केयर के लिए राजकीय महिला अस्पताल में की गई नई व्यवस्था

-हॉस्पिटल के एसएससीयू वॉर्ड में बना कंगारू केयर यूनिट, मॉडर्न लुक के साथ की गई है हाईटेक व्यवस्था इंतजाम

अगर किसी नवजात शिशु का वजन कम है या वह समय से पहले पैदा होने की वजह से बेहद कमजोर है तो अब उसकी मदर को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब राजकीय महिला चिकित्सालय में ऐसे शिशुओं की केयर के लिए अलग व्यवस्था कर दी गई है। यहां इस तरह के शिशुओं को सुरक्षा देने के लिए स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के पास ही कंगारू मदर केयर यूनिट (केएमसी) की शुरुआत की गई है। इस यूनिट में मदर्स अपने नवजात शिशु को सीने से लगाकर न केवल स्तनपान करा सकेंगी बल्कि उन्हें अपने स्पर्श के साथ गर्माहट देकर उसका वजन भी बढ़ा पाएंगी।

इस तरह मिलता है फायदा

डॉक्टर्स की मानें तो जो बच्चे कमजोर या कम वजन के पैदा होते हैं, उनको जल्द संक्रमण होने का खतरा रहता है। ऐसे बच्चों के पोषण के साथ साथ बेहतर केयर की जरूरत होती है। यही नहीं कमजोर बच्चों को ठंड बहुत जल्द लगती है। ऐसे में यदि इन बच्चों को जननी के सीने से चिपकाकर रखा जाए तो वे मां के शरीर की गर्मी से स्वस्थ रह सकते हैं। इस दौरान यदि बच्चा मां के पास रहता है तो उसे दूध भी ज्यादा मिलता है। इससे बच्चा दिन में कई बार स्तनपान करता है और जल्द ही सामान्य बच्चों की तरह हो जाता है।

ये है व्यवस्था

महिला हॉस्पिटल में एसएनसीयू तो काफी समय पहले से है, लेकिन केएमसी यूनिट नहीं था। एसएनसीयू में भी सिर्फ नवजात को ही रखने की व्यवस्था है। जबकि नये केएमसी यूनिट में शिशुओं के साथ उनकी जननी भी रहेंगी। बेहद ही मॉडर्न लुक में बने इस यूनिट में तीन बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा यहां तीन रिलैक्स चेयर भी रखा गया है, जिस पर बच्चे के पिता भी स्पर्श दे सकते हैं। खास बात ये भी है कि इसमें प्रवेश लेने वाली महिलाओं को हॉस्पिटल के ड्रेस कोड के तहत मैक्सी, टॉवेल व उनके बच्चे को ड्रेस, सॉक्स व ग्लब्स दिया जाता है। यूनिट की जिम्मेदारी एसएनसीयू में तैनात ट्रेंड स्टाफ को ही दी गई है।

क्यों कहते है कंगारू केयर यूनिट?

शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए बनाए गए इस यूनिट को कंगारू मदर केयर यूनिट इसीलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें बच्चों को उनकी मां बिल्कुल उसी तरह सीने से चिपका कर रखती हैं, जिस तरह कंगारू से उसका बच्चा चिपका रहता है। इससे बच्चों को ज्यादा पोषण मिलता है और वे जल्द ही स्वास्थ्य लाभ पाते हैं। बता दें कि कंगारू एक ऐसा जानवर है जो अपने बच्चे को सीने से लगाकर रखती है और उसे तब तक अपने से दूर नहीं करती, जब तक वह हिष्ट-पुष्ट न हो जाए।

ताकि न आए कोई आंच

पूरे प्रदेश में हर साल कम वजन वाले 20 प्रतिशत बच्चे पैदा होते हैं। इनमें से 15 प्रतिशत बच्चे समय से पहले हो जाते हैं। जिस कारण इन बच्चों की जान पर खतरा बना रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मदर ठीक से दूध नहीं पिला पाती और उन्हें एसएनसीयू में आने-जाने में भी दिक्कत होती है। इस तरह का खतरा उन बच्चों को अधिक होता है, जिनका जन्म ऑपरेशन से होता है। अब जच्चा-बच्चा के साथ ऐसा न हो, इसलिए प्रदेश के हर जिले के हॉस्पिटल में कंगारू मदर केयर यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया गया है।

एक नजर

15

दिन पहले शुरू हुई यूनिट

30

महिलाएं अब तक उठा चुकी हैं यूनिट का लाभ

15 से 20

डिलिवरी रोज होती है यहां

125

बेड का है महिला चिकित्सालय

वर्जन--

सुरक्षित मातृत्व की दिशा में यह कदम उठाया गया है। इस तरह के मामलों में अब बच्चे व उनकी जननी को यहा से रेफर करने की जरूरत नहीं होगी। इससे जच्चा-बच्चा दोनों का स्वास्थ्य बेहतर होगा।

डॉ। आरपी कुशवाहा, एसआईसी, राजकीय महिला अस्पताल, कबीरचौरा


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