इस रात की कभी सुबह नहीं होगी

2019-02-16T01:48:09Z

PATNA : गुरुवार शाम करीब 7 बजे थे। मसौढ़ी के तारेगना मठ मुहल्ला निवासी संजय कुमार सिन्हा के घर में बर्थडे पार्टी में जाने की तैयारी चल रही थी। संजय की दोनों बेटिंया रूबी कुमारी (22), वंदना कुमारी (20) और उनकी पत्‍‌नी बबिता नए कपड़े पहनकर पड़ोस में बर्थडे पार्टी में जा रही थी। इसी बीच बाहर से संजय के पिता महेंद्र प्रसाद सिंह बाहर से आ गए। उन्होंने कहा कि आप लोग जाओ लेकिन टीवी पर मेरे लिए न्यूज लगा दो। टीवी जैसे ही खोला ब्रेकिंग न्यूज के रूप में आतंकी हमले की घटना चल रही थी। इसके बाद सभी लोग वहीं रूक गए। टीवी पर लगातार ब्रेकिंग की पट्टी चल रही थी। संजय की दोनों बेटियां अपने पिता की जिंदगी के लिए दुआएं कर रही थी। हर पल वो यही कामना कर रही थी कि काश इस हादसे में उनके पापा नहीं होते।

करती रही फोन का इंतजार

बेटियां अपने पिता को फोन लगा रही थी लेकिन फोन आउट ऑफ रिच बता रहा था। परेशान बेटी रूबी ने पिता के दोस्त को फोन किया लेकिन वहां से भी कुछ जानकारी नहीं मिली। इसी बीच रात के करीब 9 बजे पत्‍‌नी के मोबाइल नंबर पर एक फोन आया कि आपके पति आतंकी हमले में शहीद हो गए। यह सुन पत्‍‌नी दहाड़ मारकर रोने लगी। मौत की सूचना मिलते ही बर्थडे पार्टी की तैयारी अधूरी रह गई और

खुशियों का माहौल मातम में बदल गया। संजय ने रात में पत्‍‌नी को फोन करने लिए कहा था। पत्‍‌नी फोन का इंतजार करती रही लेकिन रात में संजय की मौत की सूचना मिली। संजय की पत्‍‌नी के लिए उस रात की सुबह कभी नहीं होगी।

दूसरा भाई भी कर रहा देश सेवा

महेंद्र प्रसाद के दो बेट हैं। उनके दोनों बेटे सीआरपीएफ में हैं। संजय बड़े थे। वहीं शंकर छोटे हैं। पिता ने कहा कि देश सेवा में अगर एक बेटा कुर्बान हो गया तो क्या हुआ मेरा दूसरा बेटा अभी जिंदा है और शहीद हुए जवानों का बदला जरूर लेगा। पिता ने कहा कि देश के लिए न्योछावर होना गर्व की बात है।

पिछले महीने ही घर में मना था जन्म दिन

संजय की जन्म तिथि 24 जनवरी 1974 है। वो एक महीने की छुट्टी पर घर आए थे। इस साल उन्होंने अपना जन्मदिन घर पर ही मनाया था। तब शायद किसी ने ये सोचा नहीं था कि संजय का ये आखिरी जन्मदिन मना रहे हैं। यह बयां शहीद जवान की बेटियों का रो-रो कर कर रही थी।

जब आंसू बन गया आक्रोश

अब सरकार कुछ भी करे मेरा पापा वापस नहीं आएंगे। हमें सरकार से कोई मतलब नहीं है। ऐसी घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं। अगर पहले से इस घटना पर रोक लगाई जाती तो शायद मेरे पिता जिंदा होते। हम लोगों की दुनिया लूट गई। अब कोई साथ देकर क्या करेगा। पहली बार होता तो हम मान लेते। इससे पहले भी कितनी घटनाएं हो चुकी है। ध्यान दिया जाता तो 44 लोग शहीद नहीं हुए होते। इतना कहकर फफक पड़ी शहीद की बेटी।


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