10 करोड़ का 'घोटाला'

2018-09-25T06:00:47Z

आई एक्सक्लूसिव

- शहर में गहरी हैं राशन घोटाले की जड़ें

- एनआईसी, लखनऊ ने शुरू की घोटाले की जांच, पिछले 6 महीने का राशन वितरण में 10 करोड़ के खेल की आशंका

-दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट की पड़ताल में खुलासा, कई महीनों तक गरीबों के राशन में खुलेआम किया गया गोलमाल

KANPUR@inext.co.in

KANPUR: कानपुर में हुए राशन घोटाले की जड़ें काफी गहरी हैं। जैसे-जैसे मामले की जांच हो रही है, घोटाले की पर्ते खुलती जा रही हैं। सिर्फ जुलाई महीने के राशन वितरण की जांच में लगभग 4 करोड़ का घोटाला सामने आया था। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट ने मामले की पड़ताल की तो मालूम चला कि ये घोटाला 10 करोड़ के आसपास का है। घोटाले में कई और बड़े नाम भी शामिल हो सकते हैं। एसटीएफ ने घोटाले में शामिल कोटेदार और 3 सप्लाई इंस्पेक्टर पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। घोटाले में शामिल नेक्सेस को जड़ से खत्म करने के लिए स्पेशल कमेटी जांच करेगी। शासन से निर्देश के बाद नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) ने जुलाई से पहले के 6 महीनों में हुए राशन वितरण की जांच शुरू कर दी है।

सिस्टम में लगाई सेंध

आपूर्ति विभाग में होने वाली राशन की कालाबाजारी को खत्म करने के लिए शासन ने ई-पॉश मशीन के जरिए राशन वितरण की शुरुआत की थी। लेकिन गरीबों का राशन हड़पने वालों ने इस सिस्टम में भी सेंध लगा दी। नए-नए आधारा नंबर्स का यूज कर घोटाले को अंजाम दिया गया। एनआईसी ने आधार कार्डो को फिल्टर करना शुरू कर दिया है। विभाग के जिम्मेदारों का भी मानना है कि यह घोटाला एक महीने में अंजाम नहीं दिया जा सकता है, यह पिछले कई महीनों से चल रहा होगा। इस हिसाब से सिर्फ कानपुर में ही घोटाला 10 करोड़ तक पहुंच सकता है।

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राशन की होगी रिकवरी

खाद्य आपूर्ति विभाग के नियमों के मुताबिक, घोटाला किए गए राशन की रिकवरी किए जाने का प्रावधान है। लेकिन अभी तक विभाग यह नहीं पता लगा पाया है कि किस कोटेदार ने कितना राशन फर्जी तरीके से निकाला है। विभाग बेहद धीमी गति से मामले की जांच कर रहा है। घोटाले में शामिल 42 कोटेदार में अभी तक एक भी कोटेदार पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है। वहीं 12 कोटेदार कोर्ट से गिरफ्तारी का स्टे ले आए हैं, बावजूद इसके वह जांच में सहयोग नहीं कर रह हैं।

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जांच के दायरे में

आपूर्ति विभाग के 5 खाद्य क्षेत्रों में राशन घोटाले को अंजाम दिया गया। नाम न पब्लिश करने की रिक्वेस्ट पर एक अधिकारी ने बताया कि कर्नलगंज व अनवरगंज में सप्लाई इंस्पेक्टर सचिन, कोतवाली व कैंट क्षेत्र में रफीक अहमद और किदवई नगर खाद्य क्षेत्र में मनीष मिश्रा घोटाले वक्त तैनात थे। इन सभी को जांच में शामिल किया गया है, लेकिन इन सभी ने अपना पल्ला झाड़ लिया है।

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आंकड़ों के आइने से घोटाला

-9292 बार फर्जी आधार आईडी के जरिए निकाला गया राशन।

-17 फर्जी आधार के जरिए बार-बार राशन निकाला गया।

-42 कोटेदारों के खिलाफ दर्ज हुई कई थानों में एफआईआर।

-18 सप्लाई इंस्पेक्टर तैनात हैं जिला आपूर्ति विभाग में।

-1393.80 कुंतल गेंहू फर्जी आधार के जरिए निकाला।

-929.20 कुंतल चावल भी कोटेदारों ने फर्जी तरीके से निकाला।

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शहर में इतने हैं राशन कार्ड होल्डर

अंत्योदय कार्ड होल्डर--- 63,147

अंत्योदय कार्ड में यूनिट की संख्या- 2,55,114

पात्र गृहस्थी के कार्ड होल्डर-- 6,91,033

टोटल कार्ड की संख्या--- 7,54,180

लिंक किए गए आधार---5,40,172

दर्ज किए गए बैंक अकाउंट---5,48,127

शहर में कोटेदारों की संख्या---910

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इस रेट पर दिया जाता है राशन

गेंहू------ 2 रुपए प्रति 1 किग्रा

चावल----3 रुपए प्रति 1 किग्रा

(यह रेट नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत तय किए गए हैं.)

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जुलाई महीने के अलावा इससे पिछले महीनों में हुए राशन वितरण की जांच एनआईसी की ओर से की जा रही है। राशन घोटाले में शामिल कोटेदारों से हुए राशन वितरण में गड़बड़ी का डाटा लगभग तैयार है, जल्द ही इसका खुलासा किया जाएगा।

-वीके पांडेय, एडीएम सप्लाई, कानपुर नगर।


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