भारी बस्ते तोड़ रहे नन्ही कमर

2018-11-28T06:00:38Z

नियम को फॉलो नहीं करने वाले स्कूलों पर होगी कड़ी कार्रवाई

PATNA: बच्चों के कंधों पर लदे भारी बस्ते को लेकर एचआरडी मिनिस्ट्री ने जो नई गाइडलाइन जारी की है उसे लेकर पटना में भी कार्रवाई का दौर शुरू होने वाला है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जो स्कूल इस गाइडलाइन को फॉलो नहीं करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। शिक्षा विभाग कार्रवाई जब भी करे लेकिन दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए शहर के कई स्कूलों का मुआयना किया तो मासूम बच्चे भारी बस्ते के बोझ तले दबे दिखे। जब दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम ने छोटे-छोटे बच्चों के बैग का वजन किया तो बस्ता छह से सात किलो का निकला।

4 रिपोर्टर, हर ओर दिखा भारी बैग

गाइडलाइन जारी होने के बाद दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के 4 रिपोर्टर शहर के 4 बड़े स्कूलों में हाल जानने पहुंचे तो सभी जगह दिखा बच्चों के कंधे पर बस्ते का भारी बोझ दिखा। दीघा रोड स्थित सेंट माइकल हाईस्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे के पिता ने बताया कि बैग का वजन उठाने में बच्चे सक्षम नहीं हैं इसलिए खुद ही वजन ढोना पड़ता है। केंद्र सरकार की इस गाइडलाइन का शहर के सभी स्कूल फॉलो करें तो बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स को भी काफी राहत मिलेगी।

3 बार हो चुकी है शिकायत

पटना के तारिक अनवर भारी बैग को लेकर तीन बार प्रदेश के आलाअफसरों से शिकायत कर चुके हैं। शिक्षा विभाग के सचिव से लेकर प्रमुख सचिव तक से उन्होंने शिकायत की है लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

स्कूल बैग नहीं बोरा है

स्कूल बैग का वजन इतना ज्यादा बढ़ गया है कि उसे टांगने के बाद बोरा की तरह लटकने लगता है। हमारी टीम ने जब तीसरी कक्षा के स्टूडेंट का बैग चेक किया तो 12 किताबें, 5 कॉपियां, ज्योमिट्री बॉक्स, लंच बॉक्स सहित ढेर सारी आवश्यक और अनावश्यक वस्तुएं मिलीं।

सरकार के नियम को सभी स्कूलों को फॉलो करना पड़ेगा। एनालिसिस करने में ही भले थोड़ा समय लग सकता है। प्राइवेट हो या सरकारी स्कूल, प्रशासक बच्चों के बस्ते का लोड ज्यादा डालते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ज्योति कुमार डीईओ पटना

एचआरडी मिनिस्ट्री का ये कदम स्वागत योग्य है। बस्ते का वजन कम करने के लिए छोटे बच्चों को होम वर्क के लोड कम करना होगा। सीनियर क्लास के स्टूडेंट्स जरूरत के मुताबिक किताब लेकर स्कूल लेकर आएंगे तो बस्ते का वजन कम हो जाएगा ।

राजीव रंजन, अध्यक्ष सीबीएसई सहोदया

आज पैरेट्स बच्चों की कॉपी देखकर ही समझते हैं कि स्कूल में पढ़ाई हो रही है या नहीं। अगर जूनियर क्लास के बच्चों की किताबों को स्कूल में रख दिया जाए तो उन पर बस्ते का बोझ नहीं रहेगा। सीनियर बच्चे रूटीन के हिसाब से किताब लेकर आएं तो बैग का वजन कम हो जाएगा।

ए.के। नाग, कोषाध्यक्ष सीबीएसई सहोदया


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