लापरवाह कर्मचारियों के रिटायरमेंट पर विचार सीएम

2019-07-16T06:00:39Z

- मंडे को सीएम ने सहस्त्रधारा रोड स्थित सेवा का अधिकार आयोग के कार्यालय भवन का किया लोकार्पण

- सेवा के अधिकार में 217 सेवाएं अधिसूचित, ,117 सेवाएं जोड़ने की तैयारी

DEHRADUN: सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि जन समस्याओं का समाधान करना जन प्रतिनिधियों व अधिकारियों का दायित्व होता है। सेवा का अधिकार अधिनियम लाने का मुख्य उद्देश्य जन हित से जुड़े सरोकार व जन समस्याओं का समाधान करना है। सेवा के अधिकार में 217 सेवाएं अधिसूचित हुई हैं व 117 सेवाएं जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। जबकि अन्य सेवाओं को भी इस अधिनियम में जोड़ने का प्रयास किया जायेगा।

समस्याओं का समाधान समय पर होना जरूरी

मंडे को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सहस्त्रधारा रोड स्थित उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग के भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर सीएम ने आयोग द्वारा पारित महत्वपूर्ण आदेशों के सेवावार विवरण पुस्तक का विमोचन भी किया। कहा, सेवा के अधिकार आयोग को स्थाई भवन मिलने से आम नागरिकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं का लाभ समय से मिल सकेगा। सीएम ने कहा कि समस्याओं का समाधान समय पर होना जरूरी है। जन समस्याओं के निराकरण में देरी करने वालों पर दंड की व्यवस्था का प्राविधान किया जायेगा। सरकार ने कड़ा निर्णय लिया है कि जो लोग कार्य के प्रति लापरवाह हैं या जिनका आउटकम ठीक नहीं है, उन्हें समय से पूर्व सेवानिवृत्त करने पर विचार किया जायेगा। अपने कायरें के प्रति अधिकारियों व कर्मचारियों का सजग होना जरूरी है। इस दौरान आयोग के आयुक्त डीएस गब्र्याल, पूर्व आयुक्त व डीजीपी सुभाष जोशी, आयोग के सचिव पंकज नैथानी व अपर सचिव अरूणेन्द्र चौहान आदि उपस्थित रहे।

- उत्तराखण्ड में सीएम डैशबोर्ड बनाया गया है, जो आउटकम बेस है।

- सीएम हेल्प लाइन 1905 पर कंप्लेन का समाधान तब तक नहीं, जब तक कंप्लेनर की ओर से रजामंदी नहीं मिल जाती।

- सरकार का प्रयास, जन सरोकार से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान हो।

- जन समस्याओं का त्वरित समाधान सरकार की प्राथमिकता।

- अटल आयुष्मान जैसी योजनाओं को मिलेगी मजबूती।

- 4 अक्टूबर 2011 को उत्तराखंड सेवा का अधिकार अधिनियम 2011 की हुई अधिसूचना।

- 13 मार्च 2014 को उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग का हुआ गठन।

- आयोग का उद्देश्य सरकार द्वारा विभागों के माध्यम से दी जा रही सेवाओं को समयसीमा में उपलब्ध कराना।

- 22 डिपार्टमेंट्स में 217 सेवाएं अधिसूचित हैं, स्टेट गवर्नमेंट से 117 सेवाएं जल्द होंगी अधिसूचित।

4 वर्ष, 17500 मामलों की हुइर् सुनवाई

उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त आलोक कुमार जैन ने कहा कि सेवा का अधिकार आयोग में पिछले चार सालों में 17599 मामलों में सुनवाई की जा चुकी हैं। जिसमें से 12915 मामलों का निस्तारण हुआ है, जबकि 380 गैर अधिसूचित सेवाओं के मामले भी आयोग ने निस्तारित किए हैं। मुख्य आयुक्त ने कहा कि लोगों को सशक्त बनाने व कायरें में ट्रांसपेरेंसी लाने को सेवा का अधिकार आयोग का मजबूत होना जरूरी है। जो सेवाएं इसमें अधिसूचित होनी हैं, यदि वे जल्द अधिसूचित होती हैं, तो जन समस्याओं के निराकरण में और तेजी आयेगी।


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