यह रिसर्च किरगिस्तान में शार्क मछलियों के बेहद पुराने अवशेष मिलने के बाद शुरू हुई. यह अवशेष डायनासोरों के वक्त के माने जाते हैं. इन अवशेषों को जांचने पर पाया गया कि ये साफ पानी में रहने वाले किसी जीव के हैं. बाद में जो सामने आया उसने सभी को चौंका दिया.


आपने जीव जन्तुओं की अजब अनोखी दुनिया के बारे में खूब देखा सुना होगा और अगर आप डिस्कवरी या नेशनल जियोग्राफिक चैनल के शौकीन हैं तो फिर तो बात ही कुछ और है. ह्यूमन साइन्टिस्ट्स की एक रिसर्च के मुताबिक समुद्र के सबसे खतरनाक जीवों में से एक शार्क भी कभी गाय की तरह सीधी यादी हुआ करती थी.  जर्मनी के एक इंस्टीट्यूट Geologisches Institute, TU Bergakademie Freiberg की एक रिसर्च में यह बात सामने आई है. एक साइंटिफिक जर्नल 'Journal of Vertebrate Paleontologyट में छपी इस रिसर्च में कहा गया है कि लगभग 200 मिलियन साल पहले शार्क इतनी खतरनाक नहीं थीं. उस समय यह शार्क आज के मुकाबले छोटी थीं और मीठे पानी में रहती थीं. ये रिजल्ट 230 साल पुराने टफोसिल एग कैप्स्यूल्सट और किरगिस्तान में मिले छोटे दातों के नमूनों की स्टडी के बाद सामने आए हैं.


यह रिसर्च तब शुरू हुआ जब किरगिस्तान में शार्क मछलियों के कुछ बेहद पुराने अवशेष खोजे गये. ये अवशेष डायनासोरों के वक्त के माने जाते हैं. इन अवशेषों को जांचने पर पाया गया कि ये साफ पानी में रहने वाले किसी जीव के हैं. बाद में जो रिसर्च सामने आया उसने सभी को चौंका दिया.

लगभग 10 किलो के एक सैंपल पर हुई रिसर्च में पता चला है कि उस समय शार्क की दो स्पिसीज थीं. एक छोटे दांतों और एग कैप्स्यूल वाली हाइबोडोन्टिड्स और दूसरी एग कैप्स्यूल बेस्ड जेनाकैंथिड. हाइबोडोन्टिड्स लगभग डायनासोरों के साथ (आज से 65 मिलियन साल पहले) विलुप्त हुईं जबकि जेनाकैंथिड सर्वाइव नहीं कर पाईं और ट्राइएसिक पीरिएड (200 मिलियन सालों पहले) में विलुप्त हो गईं.  इसके बाद शार्क का आगे फिर विकास हुआ. सोचिए कि अगर उस समय शार्क सर्वाइव कर पातीं और अपने उसी स्वरूप में बनी रहतीं तो आज ये सारे दुनिया के लिये एक बुरे सपने जैसी चीज न होतीं. मगर ऐसा नहीं होना था क्योंकि नेचर का रूल है यहां वही सर्वाइव करता है जो सबसे ज्यादा फिट होता है, फिर वो चाहे जानवर हों या इंसान.

Posted By: Divyanshu Bhard