पिछली लोकसभा से काम हुआ ज्यादा शिक्षा का स्तर भी बढ़ा

2019-03-18T16:58:36Z

सभी पार्टियों ने 17वें लोकसभा चुनाव के लिए अपने ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवारों को सदन तक पहुंचाने की योजना बना ली है। आजादी से लेकर अभी तक की लोकसभा में ऐज एजूकेशन वर्किंग ऑवर जैसे प्रमुख मामलों में कई बदलाव देखने को मिले।

नई दिल्ली (एजेंसी)। लोकसभा चुनावी मैदान पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। सभी पार्टियों ने 17वें लोकसभा चुनाव के लिए अपने ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवारों को सदन तक पहुंचाने की योजना बना ली है। आजादी से लेकर अभी तक की लोकसभा में ऐज, एजूकेशन, वर्किंग ऑवर जैसे प्रमुख मामलों में कई बदलाव देखने को मिले। औसत देखा जाए तो वर्तमान समय में हमारी संसद में काफी सुधार हुए हैं। वहीं, कई मामलों में सुधार की उम्मीद जगी है। आज हम इन्हीं बदलावों के बारे में आपको बता रहे हैं।
ऐज
सांसद में औसत उम्र के मामले 16वीं लोकसभा में बढ़ोतरी देखी गई है। उम्र के मामले में 16वें लोकसभा चुनाव के बाद गठित सदन दूसरा सबसे उम्रदराज सदन रहा।
-1951 की लोकसभा में औसत उम्र 46.5 साल थी।
-16वीं लोकसभा में 56 साल तक पहुंच गई।
-2009 में 43 परसेंट सांसद 56 या उससे ज्यादा उम्र के थे। उस वक्त औसत उम्र 57.9 थी।
-70 के पार नहीं था कोई भी सांसद पहली लोकसभा में। जबकि 16वें लोकसभा चुनाव के बाद यह आंकड़ा 7 परसेंट हो गया।
 
एजूकेशन

वर्तमान सदन को देखा जाए तो शिक्षा के स्तर में पहले की अपेक्षा बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 1952 की अपेक्षा वर्तमान समय को देखा जाए तो अब ज्यादा पढ़े लिखे प्रतिनिधियों को जनता चुनकर सदन पहुंचा रही है।
-1952 में 23 परसेंट सांसद ऐसे थे जिन्होंने 10 तक भी पढ़ाई नहीं की थी। -16वीं लोकसभा में 75 परसेंट सांसद ग्रेजुएट थे।
-13 परसेंट ऐसे हैं जिन्होंने मैट्रिक पास नहीं की है।
 
महिलाओं की भागीदारी

महिलाओं की संख्या सदन में बढ़ी है। पहली लोकसभा की अपेक्षा आज की स्थिति में महिलाओं की भागीदारी काफी बेहतर कही जा सकती है। लेकिन अन्य देशों के मुकाबले अभी भी यहां चिंताजनक स्थिति है।
-16वें लोकसभा चुनाव में 62 महिलाएं (11.4 परसेंट) लोकसभा पहुंची।
-24 महिलाएं ही सदन पहुंचीं थीं पहली लोकसभा में।
-29.6 परसेंट महिलाएं हैं नेपाल की सदन में।
-20.3 परसेंट महिलाओं की भागीदारी है बांग्लादेश की सदन में।
-20 परसेंट महिलाओं की भागीदारी के साथ पाकिस्तान भी इस मामले में आगे है।
वर्किंग ऑवर
पिछली लोकसभा से इस लोकसभा के काम के समय की तुलना की जाए तो स्थिति काफी बेहतर है। लेकिन अगर अभी तक सदन में हुए काम के घंटों का एवरेज निकाला जाए तो काफी चिंताजनक स्थिति है।
-16वीं लोकसभा में कुल 1,615 घंटे काम हुआ।
-15वीं लोकसभा की अपेक्षा इस बार 20 परसेंट ज्यादा काम हुआ।
-2,689 घंटे काम का एवरेज रहा अभी तक की लोकसभा के कुल काम का।
-331 दिन लोकसभा की कुल कार्यवाही हुई।
-137 दिन कम है पूर्णकालिक लोकसभाओं के एवरेज से 16वीं लोकसभा के कार्य के दिन।

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