बसों की ओवर स्पीड हो सकती जानलेवा

2019-07-12T06:00:08Z

-हादसों की मुख्य वजह बनती ओवर स्पीड

- सिटी के अंदर भी तेज रफ्तार में भरते फर्राटा

GORAKHPUR: शासन-प्रशासन की तरफ से सड़क हादसों को रोकने के लिए आए दिन रोड सेफ्टी के नियमों का पाठ पब्लिक को पढ़ाया जाता है। यही नहीं तमाम अवेयरनेस प्रोग्राम भी सिटी के स्कूलों में कराए जाते हैं जिससे बच्चे भी ट्रैफिक नियमों से परिचित हो सकें। इतना सब कुछ होने के बाद भी शहर से चलने वाली बेखौफ डग्गामार बसों के ड्राइवर सड़कों पर तेज स्पीड में फर्राटा भरकर अपनी मनमानी करते हैं। तो वहीं दूसरी तरफ रोडवेज बसों के ड्राइवर भी मेन सड़क पर आते ही नियमों को भूलकर तेज गति में गाड़ी चलाते हैं। यही वजह है कि आए दिन सड़क पर बसों की स्पीड किसी ना किसी के लिए काल बनती है। इधर हुए हादसों में अधिकतर लोगों की मौत सड़क पार करते हुए या फिर रोड पर चलतीं तेज स्पीड में आ रही गाडि़यों से हुई है।

स्पीड गवर्नर भी नहीं रोक सका रफ्तार

हर दिन की मनमानी से तंग आकर परिवहन विभाग ने तेज स्पीड पर लगाम लगाने के लिए बसों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य किया था। जिसके बाद कुछ नई बसों में तो स्पीड गवर्नर लग गया लेकिन सभी बसों में आज तक स्पीड गवर्नर नहीं लग पाया। इसके अलावा स्पीड गवर्नर लगवाना केवल रोडवेज की बसों के लिए अनिवार्य नहीं था बल्कि प्राइवेट बसों और शहर में चलने वाले सभी गाडि़यों में इसे लगाना था। इसके अभाव में फिटनेस भी नहीं जारी करना था। लेकिन ये अधिक दिन नहीं चल पाया। कुछ ही दिन बाद केवल कुछ रोडवेज बसों में भले स्पीड गवर्नर लग गया लेकिन प्राइवेट बसें आज भी बिना स्पीड गवर्नर के ही फर्राटा भर रही हैं।

जुगाड़ से निकाल देते स्पीड गवर्नर

सूत्रों की मानें तो गोरखपुर रोडवेज में कागजों में तो अधिकतर बसों में स्पीड गवर्नर लगाए गए हैं। लेकिन हकीकत में इसका भी जुगाड़ रोडवेज बसों के ड्राइवर के पास होता है। वे जुगाड़ से इस स्पीड गवर्नर को निकाल देते हैं और स्पीड मीटर तो उनका पहले से ही खराब रहता है जिससे गति का पता नहीं चलता है। इस कारण वे आराम से सड़कों पर अपनी मनमानी करते हैं।

सड़क पर प्राइवेट बसों की दहशत

शहर में सड़क पार करते समय पब्लिक ये जरूर देखती है कि किसी तरफ से डग्गामार बस तो नहीं आ रही है। ऐसा इसलिए है कि यहां की पब्लिक मानती है कि प्राइवेट बस वाले मनबढ़ होते हैं और ये ठोकर मार कर निकल जाते हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि जर्जर बसों का ब्रेक भी तुरंत नहीं लगता।

वर्जन

सड़कों पर ओवर स्पीड चलने वालों का चालान काटा जाता है। ऐसा बार-बार करने वाले का लाइसेंस भी निरस्त किया जाता है।

डीडी मिश्रा, आरटीओ प्रवर्तन


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