बिना जीपीएस सिस्टम के फर्राटा भर रही हेल्थ डिपार्टमेंट की गाड़ी

2018-09-29T04:00:03Z

- हेल्थ डिपार्टमेंट की सभी गाडि़यों में लगना था जीपीएस

- अगस्त महीने में निजी कंपनी को मिला था ठेका

-ठेके पर लगाई गई हैं डिपार्टमेंट की 65 गाडि़यां

-करीब 20 गाडि़यों में नहीं लगा हैं जीपीएस सिस्टम

GORAKHPUR: सरकारी वाहनों का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए हेल्थ डिपार्टमेंट ने गाडि़यों में जीपीएस लगाने की कवायद शुरू की थी। हेल्थ विभाग ने एक अगस्त से ठेके पर लगाई गई 65 गाडि़यों में से 25 ही गाडि़यों में जीपीएस सिस्टम लगाया। जबकि निजि संस्था द्वारा लगी 20 गाडि़यां बिना जीपीएस के ही अफसरों के रहमों करम पर फर्राटा भर रही हैं। इसके बाद भी किसी जिम्मेदार की नजर इस ओर नहीं जा रही है।

सिटी व रूरल एरिया में लगी हैं गाडि़यां

जिले के 19 ब्लॉकों में स्वास्थ्य सुविधा की बेहतरी और अफसरों के लिए हेल्थ डिपार्टमेंट की तरफ से ठेके पर गाडि़यां लगाई गई हैं। जो मुख्यालय से लेकर सिटी व रूरल एरिया के हेल्थ विभाग में निरीक्षण आदि कार्य के लिए लगाई गई हैं। हर ब्लॉक में करीब तीन से चार गाडि़यां लगाई गई हैं। इन सभी गाडि़यों के संचालन का जिम्मा एक प्राइवेट फर्म को दिया गया है। सृत्रों की मानें तो मुंबई की एक कंपनी द्वारा निजी गाडि़यों में जीपीएस सिस्टम लगवाने का दावा किया जा रहा है लेकिन अभी तक 20 गाडि़यां ऐसी हैं जो बिना जीपीएस सिस्टम के चल रही है। जबकि पिछले दिनों हेल्थ डिपार्टमेंट के जिम्मेदारों ने गाडि़यों का मुआयना कर जीपीएस सिस्टम लगाने का आदेश भी दिया था। फिर भी इन गाडि़यों में जीपीएस सिस्टम नहीं लगाए गए हैं।

उरुवा में चल रही दिल्ली नंबर की गाड़ी

एक निजी संचालक हेल्थ विभाग में अपनी गाड़ी लगाने के लिए सीएमओ से मुलाकात की। उसने इसके बारे में उनसे विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद संचालक ने सीएमओ से बताया कि उरुवा स्वास्थ्य केंद्र पर बिना परमिट के दिल्ली नंबर की गाड़ी चल रही है। लेकिन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। इसके बाद हेल्थ डिपार्टमेंट ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।

वर्जन

जिन गाडि़यां में जीपीएस सिस्टम नहीं लगा हैं उनका भुगतान नहीं हो सकता है। अगर बाहर की गाडि़यां चल रही हैं तो गलत हैं। इसकी जांच कराकर निजी कंपनी से बात की जाएगी और ऐसी गाडि़यों को बाहर किया जाएगा।

डॉ। श्रीकांत तिवारी, सीएमओ


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