इस बार भी 'इंटीग्रेटेड' नहीं होगा बीएड

2019-01-23T06:00:46Z

- संसाधनों की कमी होने से कई यूनिवर्सिटीज ने खड़े किए हाथ

- रूहेलखंड यूनिवर्सिटी को मिली दो साल के बीएड एंट्रेंस कराने की जिम्मेदारी

- 10 से भरे जा सकते हैं अप्लीकेशन फॉर्म

GORAKHPUR: इंटरमीडिएट के बाद बीए-बीएड का इंटीग्रेटेड कोर्स करने की चाह रखने वाले कैंडिडेट्स को इसके लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। संसाधनों की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर के पेंच में इस बार इंटीग्रेटेड कोर्स अटक गया है। उम्मीद है कि अब वह नेक्स्ट सेशन से लागू किया जाएगा। यानि इस बार बीए कंप्लीट करने वाले कैंडिडेट्स के पास बीएड करने का फिर एक मौका है, जो किन्हीं वजहों से अब तक इसे नहीं कर सके हैं। इसके लिए सरकार ने महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड यूनिवर्सिटी बरेली को इस बार जेईई बीएड कंडक्ट कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है जिन्होंने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

प्रपोजल एक्सेप्ट लेकिन तैयारी नहीं

इंटरमीडिएट के बाद बीएड कराने के लिए एनसीटीई ने यूजीसी के पास इंटीगे्रटेड बीएड कोर्स कराने का प्रपोजल भेजा था। इसकी एक वजह यह भी थी कि बीएड के प्रति ग्रेजुएट कैंडिडेट्स का रुझान दिन ब दिन घटता जा रहा था और अब हालत यह हो गई थी कि एंट्रेंस में शामिल सभी को कॉल लेटर भेजने के बाद भी लाखों सीट्स खाली रह जा रही थीं। इसकी वजह से इंटीग्रेटेड बीएड की कवायद शुरू हुई, लेकिन जिम्मेदारों की मानें तो कुछ यूनिवर्सिटीज इस सेशन से इसे लागू करने के लिए तैयार नहीं थीं, ऐसा इसलिए कि उनके पास संसाधनों के साथ शिक्षकों की भी कमी थी, जिसकी वजह से एजुकेशन की गाडि़यां पटरी से उतरने लगी थीं। इसकी वजह से इस सेशन में इसे लागू नहीं किया जा सका।

एक साल की होगी बचत

एनसीटीई की ओर से तैयार किए गए प्रपोजल से जहां कैंडिडेट्स को बीएड करने में आसानी होगी। वहीं इस इंटीग्रेटेड कोर्स से उनका एक साल भी बच जाएगा। अब तक बीएड करने वाले कैंडिडेट्स को ग्रेजुएशन करना पड़ता है, जिसमें तीन साल का वक्त लगता है। वहीं बीएड करने में उन्हें दो साल लगेगा। ऐसी कंडीशन में टोटल पांच साल में बीए, बीएड कंप्लीट होता है, जबकि इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू हो जाने के बाद कैंडिडेट्स बीएड तक का सफर चार साल में पूरा कर लेंगे, जिससे उनके एक साल की बचत हो जाएगी।

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आखिरी बार हो सकता है टू इयर बीएड

बीते साल जेईई बीएड कंडक्ट करा रही लखनऊ यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों ने यह उम्मीद की थी कि टू इयर बीएड के लिए यह आखिरी मौका हो सकता है। इस दौरान यह बात सामने आई थी कि अगर यूजीसी ने एनसीटीई का प्रपोजल एक्सेप्ट कर लिया तो सेशन 2019-20 से फोर इयर इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स शुरू हो जाएगा, लेकिन यूनिवर्सिटीज के निगेटिव रिस्पांस की वजह से इसकी मियाद एक साल और बढ़ गई है, जिसकी वजह से इस बार भी कैंडिडेट्स को दो साल का बीएड करने का मौका मिल रहा है, जोकि आखिरी हो सकता है।

10 फरवरी से भरे जा सकते हैं फॉर्म

ज्वॉइंट एंट्रेंस एग्जाम बीएड का बिगुल बजने को है। 10 फरवरी से फॉर्म भरने का सिलसिला भी शुरू होने की उम्मीद है, जबकि 15 अप्रैल से पहले ही एंट्रेंस एग्जाम करा दिया जाएगा। एमजेपीआरयू एडमिनिस्ट्रेशन ने इसके लिए तैयारियां भी तेज कर दी हैं। परीक्षा सलाहकार समिति, समन्वय समिति, क्रय समिति के साथ टेक्निकल कमेटी भी इस माह फॉर्म कर ली जाएंगी जिससे कि एग्जाम कंडक्ट कराने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


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