रिसर्च और रोजगार पर जो करेंगे फोकस उन्हें ही देंगे अपना वोट

2019-02-28T06:01:03Z

-देश में रिसर्च के लिए सरकार बनाएं सकारात्मक वातावरण

PATNA: कड़क चाय पर मुद्दों की बात का सिलसिला एक बार फिर से पटना साइंस कॉलेज में शुरू हुआ। युवा वोटर बदलाव की बात करते-करते कई समाधान की बातें भी कह गए। हालांकि उनमें वर्तमान की यथास्थिति को लेकर थोड़ा असंतोष का दर्द भी छलका। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट मिलेनियल्स 2019 में शिक्षा, रिसर्च और जीवन स्तर को उठाने आदि के मुद्दे उठा गए। जिसमें युवाओं ने विभिन्न मुद्दों खुलकर अपनी बातें रखीं।

साइंस कॉलेज ग्राउंड में जैसे ही मुद्दों की बात शुरू हुई युवाओं के मन में भविष्य को लेकर कई बातें उभरने लगी। हालांकि सभी उच्च शिक्षा और रिसर्च लेवल पर केन्द्रित रहे। युवाओं ने कहा कि भारत में रिसर्च के लिए सकारात्मक वातावरण का अभाव है। मैथ, फिजिक्स, केमेस्ट्री और बॉयो टेक जैसे विषयों को पढ़ने के बाद भी छात्र सरकारी सेवाओं में जाना चाहते हैं, जबकि रिसर्च में अब भी सरकारी प्रोत्साहन राशि बेहत कम है। छात्रों ने कहा कि बिना रिसर्च में बड़ा काम किए कोई देश सुपर पावर नहीं बन सकता तो भारत में इसके लिए सही पहल क्यों नहीं हो रही है। ज्ञान गौरव झा ने कहा कि युवाओं को रिसर्च वर्क के लिए सही तरीके से ओरिएंटेशन की जरूरत है।

क्लास में हो आगे की तैयारी

ज्ञान गौरव झा ने कहा कि क्लास रूम में सिर्फ डिग्री के लिए पढ़ाई हो रही है। सरकरी और प्राइवेट में भी में यह देखा जाता है। इसलिए शिक्षक ऐसे होने चाहिए जो कोर्स को पढ़ाए और कौशल विकास के गुर भी सिखाए। यादि क्लास में ही भविष्य के लिए तैयार किया जाए तो इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रौशन राज ने कहा कि पढ़ने के मौके कम नहीं हैं लेकिन गुणवत्ता की कमी है। वहीं, रवि सिंह ने कहा कि भारत व‌र्ल्ड का हिस्सा है लेकिन तैयारी का अभाव है।

बात ज्यादा लेकिन लक्ष्य दूर

राहुल कुमार ने कहा कि अभी एनआईटी, आईआईटी में इनक्यूबेशन सेंटर बनाया गया है। लेकिन यह सिर्फ अभ्यास करने का सेंटर भर होगा। वहीं, धर्मवीर ने कहा कि आज भी कई प्रोडक्ट भारत में तैयार किए जाते हैं लेकिन उसका पेटेंट नहीं होने से दुनिया के अन्य देश अपने नाम से उस प्रोडक्ट को रजिस्टर कर आर्थिक लाभ लेते हैं।

ऐसे हासिल कर पाएंगे लक्ष्य

चर्चा के दौरान भारत के विश्वगुरु होने और इसके लिए कमियों पर भी बात हुई। इसमें रौशन राज ने कहा कि यह लक्ष्य कठिन है। लेकिन कई छोटे- छोटे सुधार कर इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। जैसे कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षक हों, उच्च स्तर के रिसर्च लैब हो। स्टूडेंट्स एक्सचेंज प्रोग्राम को व्यापक बनाया जाए। वहीं राहुल कुमार ने बेरोजगारी का बड़ा मुद्दा बताया।

मेरी बात

चार साल तक जॉब नहीं निकाली गई। पांचवें साल में कुछ वैकेंसीज ही निकली। इस कारण बेरोजगारों की भीड़ बढ़ी है। विशाल कुमार ने बताया कि इंजीनियरिंग के छात्रों को महज दो हजार रुपए स्कॉलरशिप मिल रहे हैं। जबकि 15 हजार रुपए तय किया गया था। आज युवा विकल्प हीन स्थिति में पहुंच गए हैं। सरकार के समक्ष सवाल कई हैं लेकिन उसका निदान नहीं किया जा रहा है।

कड़क बात

मिलेनियल्स स्पीक 2019 के दौरान साइंस के छात्रों ने कहा कि सरकार दम भरती है देश आगे बढ़ रहा है। लेकिन सच तो यह है कि मुट्ठी भर लोगों को सरकार खुश करने में लगी है। यदि सभी को विकास का लाभ देना है तो सभी की सहभागिता सरकार ही सुनिश्चत कर सकती है। वहीं, शिवम कुमार ने कहा कि देश बदलने की बात हो रही है। जबकि स्थानीय स्तर पर भी बदलाव के लिए प्रयास जरूरी है। शंकर कुमार का कहना था कि सभी को समान अवसर नहीं मिल रहा है, यह बड़ा मुद्दा है।


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