नगर निगम में स्टपनी चोर

2019-02-10T06:00:49Z

20 वार्डो में डोर टू डोर कलेक्शन अभियान के लिए हुई थी पहल

Meerut। इसे नगर निगम की लापरवाही कहें या चोरों से मिलीभगत कि 8 माह पहले कूड़ा कलेक्शन के लिए आई नई गाडि़यों की स्टपनी तक चोरी होने लगी हैं। निगम के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते 40 प्रतिशत गाडि़यों की स्टपनी गायब हो चुकी है और निगम का इस ओर ध्यान तक नही जा रहा है। हालत यह है कि वर्कशॉप से लेकर निगम डिपो तक स्टपनी का पता नही है ऐसे में गाडि़यों की नई स्टपनी बेच कर चोर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। हालांकि नगर स्वास्थ्य अधिकारी गजेंद्र सिंह ने बताया कि स्टपनी चोरी की अभी तक कोई शिकायत नही है। किसी कारण से गाड़ी में स्टपनी नही लगाई गई होगी। जांच कराकर सभी गाडि़यों को अपडेट किया जाएगा।

गायब हुई स्टेपनी

दरअसल गत वर्ष अगस्त माह में निगम ने शहर के 20 वार्डो से डोर टू डोर कलेक्शन के लिए 46 गाडि़यों की शुरुआत की थी। इसके बाद 51 के करीब नई गाडि़यों की गत छह माह में कूड़ा कलेक्शन के लिए शुरुआत की गई। इससे अलग 15 के करीब पुरानी गाडि़यां कूड़ा कलेक्शन में जुटी हैं। ऐसे में करीब 95 नई टाटा ऐस गाडि़यों को गत आठ माह में कूड़ा कलेक्शन पर लगाया गया था। लेकिन इनमें से करीब 40 प्रतिशत गाडि़यों से स्टपनी गुम हो चुकी है।

कमाई का आसान जुगाड़

दरअसल निगम द्वारा लाई गई नई कूड़ा कलेक्शन गाडि़यों में स्टपनी गाड़ी के पिछले हिस्से में नीचे की तरफ लगी होती है, जो कि आसानी से खोली जा सकती है। डिपो से निकलने के बाद कूड़ा कलेक्शन के बाद या बीच में गाडि़यां शहर की सड़कों पर इधर-उधर खड़ी रहती हैं ऐसे में चोरों के ये स्टपनी निकालना मामूली बात है। नई स्टपनी की कीमत 4 से 5 हजार रुपए है ऐसे में करीब डेढ़ से पौने दो लाख रुपए की स्टपनी चोरी हो चुकी है।

न इंश्योरेंस न क्लेम

इन गाडि़यों को आए हुए एक साल से अधिक हो चुका है, लेकिन अभी तक निगम ने एक भी कूड़ा कलेक्शन गाड़ी का गत अप्रैल माह से रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस नही कराया। ऐसे में कंपनी की तरफ से गाडि़यों की सर्विसिंग पर मिलने वाला क्लेम भी नही बनता। ऐसे में गाडि़यों से धीरे धीरे गायब हो रही स्टपनी चोरों के वारे न्यारे कर रही हैं और निगम के राजस्व में लाखों का चूना लग रहा है।

जांच की मांग

इस संबंध में पार्षद अब्दुल गफ्फार ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को जानकारी देते हुए बताया कि स्टपनी समेत वाहनों के अन्य पार्टस को कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते बेचा जा रहा है। यदि इसकी जांच कराई जाए तो प्रति गाड़ी हजारों रुपए का सामान गायब मिलेगा।


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