स्वाइन फ्लू का प्रकोप हर तरफ मास्क'पोश'

2019-02-11T06:00:22Z

- स्वाइन फ्लू के शतक मारने के बाद दहशत में आए दूनाइट्स

- अस्पतालों से लेकर बाजारों में हर तरफ मास्क पहनकर नजर आए दूनाइट्स

pavan.nautiyal@inext.co.in

देहरादून,

दून में स्वाइन फ्लू दहशत का पर्याय बन गया है, सवा सौ लोगों को चपेट में लेने के बाद दूनाइट्स में स्वाइन फ्लू की दहशत और बढ़ गई है। लोग घर से मास्क लगाकर ही बाहर निकल रहे हैं। दहशत सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, अगर किसी का परिजन अस्पताल में भर्ती है तो वे वहां जाकर उसका हाल पूछने से भी कतराने लगे हैं। शादी-पार्टियों में शामिल होने से भी लोग बच रहे हैं कि कहीं स्वाइन फ्लू का वायरस उन्हें चपेट में न ले ले।

एक माह में 21 मौत

स्वाइन फ्लू का कहर बदस्तूर बढ़ता जा रहा है। पिछले माह 10 जनवरी को स्वाइन फ्लू से मौत की पहली पुष्टि हुई थी। एक माह के भीतर मृतकों का आंकड़ा जहां 21 तक पहुंच चुका है, वहीं 136 मामले पॉजिटिव पाए गए।

हमने की दहशत की पड़ताल

स्वाइन फ्लू के बेकाबू होने से लोगों में दहशत इस तरह घर कर गई है, कि वे घर से निकलते ही मास्क लगा रहे हैं। संडे को दून में हर तरफ लोग मास्क लगाकर अपने काम में जुटे दिखे। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम ने स्वाइन फ्लू की दहशत का रियलटी चेक किया।

मेडिकल स्टूडेंट्स ज्यादा दहशत में

एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे स्टूडेंट्स में स्वाइन फ्लू की ज्यादा दहशत है, इसका कारण भी है। उन्हें मरीजों के संपर्क में रहना पड़ता है, ऐसे में स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ जाता है। स्टूडेंट्स हर समय मास्क लगाए दिख रहे हैं। महंत इंदिरेश अस्पताल के कर्मचारी भी मास्क लगाए काम में जुटे दिखे। अस्पताल प्रबंधन ने स्टाफ को मास्क लगाने की हिदायत भी दी है।

अस्पताल से तौबा, शादी पार्टी से किनारा

लोगों में दहशत का आलम यह है कि अगर उनका कोई परिचित हॉस्पिटल में भर्ती है तो वे स्वाइन फ्लू के डर से उससे मिलने तक नहीं जा रहे। भीड़-भाड़ से लोग बच रहे हैं, खासतौर से शादी-पार्टी से लोग किनारा कर रहे हैं। दून अस्पताल में स्टाफ ने मास्क तो नहीं पहना लेकिन मरीजों के अटैंडेंट जरूर मास्क लगाए दिखे। दून अस्पताल के आसपास कैमिस्ट्स भी एहतियात के तौर पर मास्क लगाए मिले।

एन-95 मास्क ही कारगर

अधिकतर जिस मास्क को पहनकर लोग घरों से बाहर निकलते हैं, वो डिस्पोजेबल मास्क या सर्जिकल मास्क स्वाइन फ्लू में कारगर नहीं है। डिस्पोजेबल मास्क यूज एंड थ्रो भी होता है, जिसे 1 दिन में यूज करके फेंक दिया जाता है। स्वाइन फ्लू में एन 95 मास्क ही कारगर है।

मास्क की बिक्री बढ़ी

दून अस्पताल के सामने मेडिकल शॉप चलाने वाले रिलेक्स मेडिकल स्टोर के ओनर भानू ने बताया कि आम दिनों में रोजाना 2-3 मास्क ही लोग खरीदते हैं। जिसमें डिस्पोजेबल या सर्जिकल मास्क ही लोग खरीदते हैं। लेकिन बीते 1 हफ्ते में मास्क खरीदने वालों की संख्या काफी बढ़ गई है। इन दिनों रोजाना औसतन 25 से 30 मास्क वे बेच रहे हैं। एन 95 की डिमांड भी बढ़ गई है।

ये हैं मास्क के रेट

डिस्पोजेबल मास्क- 4 से 5 रुपए

ब्लैक मास्क- 25-30 रुपए

एन 95 मास्क- 85 से 100 रुपए

आयुर्वेदिक टोटका भी चालू

स्वाइन फ्लू की दहशत के बीच आयुर्वेदिक दवाई का भी कारगर होने का दावा किया जा रहा है। जिसमें जड़ी बूटी, आयुर्वेदिक तेल या कई प्रकार के चूर्ण खाने से बिमारी से राहत मिलने की बात सामने आ रही है। इधर स्वास्थ्य विभाग इस तरह की किसी भी दवा के कारगर होने से इनकार कर रहा है। सीएमओ डॉ। एसके गुप्ता ने बताया कि ऐसी कोई भी आयुर्वेदिक दवाई स्वाइन फ्लू के लिए पेटेंट हो इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

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कोई भी मास्क स्वाइन फ्लू में ज्यादा कारगर नहीं होते हैं। सर्जिकल मास्क तो बिलकुल भी नहीं। एन-95 मास्क ही कारगर है, लेकिन इसे भी हफ्ते भर तक ही यूज किया जा सकता है। मरीजों के संपर्क में रहने वालों को हर दो दिन में मास्क बदल देना चाहिए।

डॉ। एसके गुप्ता, सीएमओ


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