अधूरी तैयारियों के साथ टीबी से लड़ रहा विभाग

2019-06-29T06:00:31Z

साल दर साल बढ़ रहे मरीज, फिर भी अवेयरनेस का अभाव

प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स और मेडिकल स्टोर्स नहीं दे रहे डाटा

कागजों में ही सिमट कर रह गई कार्रवाई की योजना

Meerut। 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने में केंद्र सरकार तमाम योजनाओं पर काम कर रही है। टीबी विभाग की लापरवाही इन योजनाओं में पलीता लगा रही है। जमीनी हकीकत पर बात करें तो विभाग आधी-अधूरी तैयारियों के साथ ही टीबी की जंग लड़ रहा है। साल दर साल मरीज बढ़ रहे हैं लेकिन विभाग इन्हें काबू करने में पूरी तरह से नाकाम हो रहा है।

नहीं मिल रहा रिकार्ड

शासन ने प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स और मेडिकल स्टोर्स को टीबी के मरीजों का अनिवार्य रूप से रिकार्ड देने के निर्देश जारी किए थे। करीब एक साल पहले दिए गए इन निर्देशों का जिले में पूरी तरह से दम निकला गया। तमाम सख्ती के बावजूद न तो प्राइवेट डॉक्टर्स डाटा दे रहे हैं, न ही मेडिकल स्टोर्स रिकार्ड देने में दिलचस्पी दिखा रहा है। वहीं विभाग की ओर से किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में न तो टीबी के सभी मरीजों सामने आ रहे हैं न ही उन्हें सरकारी सेवाओं का लाभ मिल पा रहा है।

ये है स्थिति

मेरठ में करीब 3500 मेडिकल स्टोर्स होलसेल और रिटेल के हैं। इनमें से करीब 1750 रिटेल मेडिकल स्टोर्स ने विभाग को डाटा देना था, लेकिन लगभग 15 मेडिकल स्टोर्स ने भी विभाग को डाटा प्रोवाइड नहीं करवाया है। इसके अलावा 1750 होलसेल स्टोर्स ने भी विभाग को किसी भी तरह का डाटा प्रोवाइड नहीं करवाया है। जबकि डॉक्टर्स की बात करें तो रजिस्टर्ड 400 डॉक्टर्स में से करीब 225 प्राइवेट डॉक्टर्स ही विभाग को मरीजों का रिकार्ड दे रहे हैं।

नहीं है जागरूकता

टीबी को लेकर चल रही सरकारी योजनाओं की अधिकतर लोगों को जानकारी ही नहीं है। जबकि जिला टीबी विभाग भी इन योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने में सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। अगर विभाग इन योजनाओं का व्यापक प्रसार करे तो सरकार की ओर से मिलने वाली फ्री दवाइयों और योजनाओं से भी मरीज को लाभांवित किया जा सकता है। लेकिन इससे विक्रेता को बड़ा झटका लगेगा।

कम नही हैं प्राइवेट मरीज

जिले में सरकारी मरीजों की अपेक्षा प्राइवेट मरीज भी कम नहीं हैं। इस साल प्राइवेट डॉक्टर्स के दिए गए रिकार्ड के अनुसार 3700 से अधिक मरीज प्राइवेट हैं, जबकि सरकारी मरीज की संख्या भी करीब दस हजार है। वहीं एक्सडीआर और एमबीआर मरीजों की संख्या 309 है।

एक मरीज बना सकता है 10-15 को बीमार

डीटीओ डॉ। एमएस फौजदार के मुताबिक टीबी का एक मरीज इलाज में लापरवाही बरतता है तो दूसरे 10 से 15 लोगों को वह टीबी का शिकार बना सकता है। हालांकि नियमित जांच व दवाइयों के जरिए बीमारी ठीक हो जाती है। चिंता इस बात की है कि कई मरीज बीच में इलाज छोड़ देते हैं, जो कि गलत तरीका है। इससे बीमारी बढ़ सकती है।

ये हैं लक्षण

दो हफ्ते से लगातार खांसी होना

बुखार, भूख न लगना

रात में पसीना आना

वजन में लगातार गिरावट

यह है टीबी

टीबी एक गंभीर, संक्रामक और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। नाखूनों को छोड़कर ये बीमारी शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। जो मेनली फेफड़ों को प्रभावित करती है। डॉट्स सेंटरों पर इसकी दवाएं मुफ्त मिलती हैं।

इनका है कहना

मेडिकल स्टोर्स को लगातार रिकार्ड देने के लिए कहा जा रहा है। लगातार मीटिंग और बैठक के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

डॉ। एमएस फौजदार, जिला टीबी अधिकारी, मेरठ

हमारी ओर से लगातार टीबी की दवाइयों के विक्रेताओं को लगातार जागरूक किया जा रहा है।

रजनीश कौशल, महामंत्री, कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन

सरकारी मरीज

1 जनवरी 2018 से 31 मार्च 2018- 2032

1 अप्रैल 2018 से 30 जून 2018 - 3348

1 जुलाई 2018 से 30 सितंबर 2018 - 2006

1 अक्टूबर 2018 से अब तक- 6000 से अधिक

प्राइवेट मरीजों की स्थिति

1 जनवरी 2018 से 31 मार्च 2018- 1051

1 अप्रैल 2018 से 30 जून 2018- 1246

1 जुलाई 2018 से 30 सितंबर 2018 तक- 888

1 अक्टूबर 2018 से अब तक - 400 से अधिक

एक्सट्रा पल्मोनरी

1 जनवरी 2018 से 31 मार्च 2018- 475

1 अप्रैल 2018 से 30 जून 2018- 477

1 जुलाई 2018 से 30 सितंबर 2018 तक- 612

1 अक्टूबर 2018 से 31 दिसंबर 2018 तक- 521

इन वर्षो में मिले टीबी के मरीज

2017 - 6898

2016- 6698

2015- 6536

2014- 6302

2013- 6349

यह है वजह

टय्बरक्लोसिस यानी टीबी माइक्रोबैसिल्स टय्बरक्लोसिस बैक्टीरिया की वजह से होता है। अधिकतर मामलों में यह सांस व हवा से फैलता हैं। टीबी का यह बैक्टीरिया फेफड़ों के अलावा अन्य अंगों पर वार करता है, जब एक्सट्रा पल्मोनिरी टीबी हो सकता है। एक्सप‌र्ट्स के मुताबिक नाखूनों के अलावा शरीर के किसी भी अंग में टीबी हो सकता है।

ये योजनाएं भी

रिवाइज्ड नेशनल ट्यूबरकोलिसि कंट्रोल प्रोग्राम (आरएनटीसीपी) के तहत टीबी मरीजों को नोटिफाई करने वाले डॉक्टरों को भी फंड देने की योजना पाइपलाइन में हैं।

निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के हर मरीज को हर महीने 500 रूपये दिए जाते हैं।

टीबी के सैंपल कलेक्ट करने के लिए सिर्फ मेरठ जिले में ही हयूमन कोरियर सर्विस चालू की है। इस योजना के तहत प्रति सैंपल लेकर आने के लिए 100 रूपये दिए जाते हैं।


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