शिक्षा के लिए खुद को समर्पित करें शिक्षक

2018-12-03T06:00:29Z

-गवर्नर बोले, पुरानी विद्याएं और संस्कृति ले रही है अंगड़ाई

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क्कन्ञ्जहृन्: भारत का पुनर्जागरण

तेजी से हो रहा है। यहां की संस्कृति और पुरानी विद्याएं अंगड़ाई ले रही हैं। शिक्षा, संस्कार, खेल, कला, संगीत के साथ विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा देने की जरूरत है। भारतीय सांस्कृतिक बोध और ऐतिहासिक विरासतों की जानकारी तो भारतीय शिक्षण पद्धति के माध्यम से ही मिल सकती है। यह बातें गवर्नर लालजी टंडन ने कही। वे मरचा-मरची रोड के केशवपुरम स्थित केशव सरस्वती विद्या मंदिर के 25वें वार्षिकोत्सव में वह बोल रहे थे।

कन्वेंट में पूर्णता की शिक्षा नहीं

राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि विदेशी मिशनरियों द्वारा संचालित कन्वेंट स्कूलों में शिक्षा दिलाने के लिए अभिभावकों की भागदौड़ उचित नहीं है। यहां मनुष्य को सम्पूर्णता में शिक्षा नहीं मिलती है। इस अवसर पर पूर्ववर्ती विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। काफी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित हुए।

सत्य, प्रेम और अनुशासन जरूरी

स्कूल के रजत जयंती समारोह का उद्घाटन राज्यपाल लालजी टंडन ने किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में सत्य, प्रेम, अनुशासन, आध्यात्म, संस्कृति बोध और राष्ट्रीयता का संचार जरूरी है। इसी की बुनियाद में भारत एक बार फिर जगतगुरु बनेगा। शिक्षा से चरित्र का विकास होता है। राज्यपाल ने शिक्षकों से शिक्षा और समाज के लिए खुद को समर्पित करने का आह्वान किया। खेती की शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही।

बच्चों को मिले सही संस्कार

उन्होंने स्कूल के विद्यार्थियों, आचार्यों, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यहां भारतीय संस्कार बच्चों को देने का काम शुरू से होता रहा है। पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने कहा कि माधवपुर बांध तक मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण कराई जाएगी। इससे स्कूच्ी बच्चों को भी लाभ मिलेगा। आरएसएस के सह क्षेत्र प्रचारक रामनवमी प्रसाद, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद नित्यानंद राय ने भी अपने विचार रखे। रमेन्द्र राय ने स्कूल की प्रगति से अवगत कराया। स्वागत भाषण प्राचार्य दिनेश मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन सचिव अनिल कुमार ने दिया। प्रकाश नारायण सिंह, विधान पार्षद सूरजनंदन मेहता, पूर्व विधान पार्षद राजेन्द्र गुप्ता समेत अन्य गणमान्य उपस्थित थे।


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