सब्जी के ठेली पर सट्टे का 'खेल'

2014-03-31T07:00:01Z

-पुलिस की गिरफ्त में आए तीन सट्टेबाज

-ऑनलाइन चलता था सट्टे का कारोबार

-तीन आरोपियों में से दो लॉ के स्टूडेंट

पुलिस की गिरफ्त में आए तीन सट्टेबाज

-ऑनलाइन चलता था सट्टे का कारोबार

-तीन आरोपियों में से दो लॉ के स्टूडेंट

DEHRADUN :

DEHRADUN : डालनवाला पुलिस ने ख्0-ख्0 व‌र्ल्ड कप के इंग्लैंड और साउथ अफ्रिका के मैच पर सट्टा लगाते तीन लोगों को रंगेहाथ दबोच लिया। आरोपियों में दो लॉ के स्टूडेंट हैं। दोनों ही सट्टे के इस खेल को मोबाइल के जरिए ऑनलाइन अंजाम दे रहे थे, जबकि तीसरा सब्जी की ठेली लगाता है। सारा खेल ठेली पर खुलेआम किया जाता था। अभियुक्तों के पास से चार मोबाइल फोन के साथ कुछ पर्चियां मिली हैं। पर्चियों पर सट्टे का ब्योरा लिखा हुआ था।

सूचना पर हुई कार्रवाई

दरअसल, इन दिनों ख्0-ख्0 व‌र्ल्ड कप के मैच चल रहे हैं, जिस कारण सट्टेबाजों के सक्रिय होने की संभावना थी। सट्टेबाज सक्रिय न हो इसके लिए पुलिस ने सक्रिय तौर पर नजर बनाए हुए थे। इसी कड़ी में फ्राइडे ईवनिंग को करणपुर चौकी इंचार्ज बलदेव कुमार को सूचना मिली कि सीमेंट रोड वर्कशॉप वाली गली में सब्जी की ठेली पर ऑनलाइन सट्टा लगाने का काम चल रहा है। बिना देर किए चौकी इंचार्ज बलदेव कुमार मय फोर्स मौके पर पहुंचे। मौके से तीन लोगों को रंगेहाथ सट्टा लगाते दबोच लिया गया।

लॉ के स्टूडेंट हैं आरोपी

संडे को डालनवाला थाने में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए एसपी सिटी नवनीत सिंह ने बताया कि आरोपियों ने अपनी पहचान अकिल अहमद पुत्र खचड़ू अली निवासी कस्बा हसनपुर जेपी नगर यूपी, जावेद अली पुत्र वरिजद अली निवासी मुस्तफाबाद पचेंडा मुजफ्फरनगर व चेतन पुत्र धीरज कुमार निवासी रिस्पना बस्ती बताई है। अकिल और जावेद दून के डीएवी पीजी कॉलेज में लॉ सेकेंड इयर के स्टूडेंट हैं। दोनों ही नेगी रोड पर किराए के कमरे पर साथ में रहते हैं। चेतन सीमेंट रोड पर सब्जी की ठेली लगाता है। उसी की ठेली पर यह सारा खेल चल रहा था।

मोबाइल से देते थे अंजाम

एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी मैच की हर गेंद पर सट्टा लगवाते थे। सारा खेल दिल्ली से ऑनलाइन चलता था। मोबाइल से ही इस खेल को अंजाम दिया जा रहा था। सट्टे का ब्योरा पर्चियों में लिखा जाता था। पुलिस को आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन के साथ कुछ पर्चियां बरामद हुई हैं। इसके अलावा जावेद के पीएनबी बैंक के एकाउंट से ब्8 हजार रुपए भी मिले हैं। यह वह रकम है जिसे ऑनलाइन सट्टेबाज सीधे एकाउंट में जमा करते थे।


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