ठंड से ठहर गई जीवन की रफ्तार

2015-12-09T07:40:20Z

-आमजन के जीवन पर पड़ा विपरीत असर, खेती किसानी भी हो रही प्रभावित

-सबसे बुरी हालत गरीब परिवारों की, गर्म कपड़ों के अभाव में रात काटना हुआ मुश्किल

चंदौली : जिले में ठंड व कोहरे का असर मंगलवार को भी बना रहा। कोहरे के चलते जहां आमजन जीवन पर विपरीत असर पड़ा, वहीं जीवन की रफ्तार ही ठहर गई। आलम यह हुआ कि देर शाम से वातावरण में बना कोहरा दोपहर 12 बजे तक धुंध में तब्दील रहा। वहीं शाम होते ही कोहरे ने समूचे वातावरण को अपने आगोश में ले लिया। ठंड भी ऐसी कि लोग आग तापने के लिए मजबूर हो गए। उधर खेती किसानी में लगे किसानों पर इसका विपरीत असर पड़ा। खलिहानों में रखे गए धान के बोझ नम तो हुए ही गेहूं की बोआई भी प्रभावित हुई।

गरीबों की कौन ले सुधि

मौसम के करवट बदलने से सोमवार की सुबह से ही अचानक ठंड में इजाफा हो गया है। ऊपर से घने कोहरे के कारण हर तरफ बस धुंध का आलम है। ठंड बढ़ने से चाहे गांव की गलियां हो या फिर कस्बा, बाजार सन्नाटे में तब्दील हो गए हैं शाम होते ही लोग घरों में दुबकने को विवश हो जा रहे हैं। सबसे बुरी हालत गरीब परिवारों की है। गर्म कपड़ों के अभाव में इन्हें रात काटना मुश्किल हो गया है। वहीं धान की कटाई में जुटे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बड़े किसानों पर तो कोहरे व ठंड का खास असर नहीं है पर छोटे व मझोले किसान जगह के अभाव में अपनी फसल को खलिहानों में ही रखने को मजबूर हैं।

महिलाओं को अधिक परेशानी

दो दिनों से पड़ रहे कोहरे के कारण जहां भगवान भास्कर के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा परेशानी घरेलू महिलाओं को झेलनी पड़ी। घर में स्नान या फिर छोटे-छोटेच्बच्चों के धोए हुए कपड़े धूप न निकलने से सूख नहीं पा रहे हैं।

बुजुर्गो को अंगीठी का सहारा

दो दिनों से बढ़ रही ठंड नेच्बच्चे, युवा व बुजुर्ग सभी को हिला कर दिया है। बुजुर्गो की हालत तो यह है कि एक ही जगह बैठने के कारण वह ठंड से सिकुड़ जा रहे हैं। ऐसे में उनके लिए अंगीठी ही सहारा बनी हुई है। दिन भर अंगीठी की ताप से अपने शरीर को गर्म करने में लगे रहे।

कोहरे का वार, चालकों का बुरा हाल

-नरवन में कोहरे से एनएच-24 पर लगी रही वाहनों की लंबी कतार, पब्लिक हुई परेशान

-खेती-किसानी के काम में जुटे किसान व मजदूर भी ठंड के आगे बेबस

चंदौली : नरवन का पूरा इलाका मंगलवार को दूसरे दिन भी भीषण कोहरे की चादर में लिपटा रहा। कोहरे की रफ्तार इतनी तेज थी कि उसके आगे सबकी गति धीमी पड़ गई। हालात यह रहे की मार्गो पर चलने वाले वाहन दिन में भी लाइट जलाकर रेंगते हुए चले। वहीं कई वाहन चालक ऐसे भी थे जिन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था तो वाहन को मार्ग के किनारे खड़े कर दिए। इसका नतीजा रहा कि मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लगी रही। इससे नौकरी पेशा व अन्य कार्यो से निकलने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। विगत दो दिनों से पड़ रही कोहरे व कड़ाके की ठंड से लोगों की दिनचर्या में काफी बदलाव हो गया।

गाड़ी चलाना हो रहा मुश्किल

दो दिनों से वातावरण में कोहरे की उपस्थिति ने वाहन चालकों को मुसीबत में डाल दिया है। चाहे हाइवे हो या सर्विस रोड कोहरे के प्रभाव के कारण आवागमन करना मुश्किल हो गया है। खासकर भोर में व शाम होते ही सड़कों पर दुर्घटना की आशंका बनी रह रही। वाहन चालकों को अपने वाहनों की लाइट जलाकर चलना मजबूरी बन गई है।

ठंड से सिकुड़े लोग

हवा के झोंके के साथ बढ़ी ठंड के कारण जहां सुबह में ठिठुरन महसूस हो रही है। वहीं दिन भर बादलों के बीच भगवान भास्कर की लुकाछिपी भी ठंड को और बढ़ा रही है। सोमवार से शुरू हुआ कोहरा क्षेत्र में मंगलवार को भी जारी रहा। हालांकि मंगलवार को दिन में कुछ देर के लिए धूप हुई परंतु वह भी असहाय महसूस हो रही थी। लोग दिन भर चादरों में ही लिपटे रहे। वहीं खेती-किसानी के काम में जुटे किसान व मजदूर भी ठंड के आगे बेबस दिखे। इसके अलावा मार्गो पर फर्राटा भर कर चलने वाले वाहनों की स्पीड भी कोहरे के आगे धीमी हो गई थी। दिन में भी वाहन चालक लाइट जलाकर मार्गो पर सफर करने को मजबूर रहे।

खेती-किसानी पर संकट

वहीं शहाबगंज के नक्सल क्षेत्र में कड़ाके की ठंड व कोहरे ने खेती किसानी पर संकट ला दिया है। इसके चलते खलिहानों में रखे धान के बोझ की मड़ाई पर विपरीत असर तो पड़ ही रहा है, गेहूं की बोआई भी प्रभावित हो रही है। मंगलवार को क्षेत्र में कोहरे का आलम यह रहा कि गांव के सिवान कोहरे के आगोश में डूबे रहे।


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