मुहैया करते थे सॉल्वर पहुंचे सलाखों के पीछे

2018-12-24T06:00:18Z

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सही आधार कार्ड एसटीएफ ने किया बरामद

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फर्जी आधार कार्ड दोनों के पास से बरामद किए गए हैं

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मतदाता पहचान पत्र भी दोनों के कब्जे से किया गया बरामद

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मोबाइल फोन व दो एटीएम कार्ड भी एसटीएफ को मिले

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मोबाइल वॉट्सएप स्क्रीन शॉट कॉपी व दो हजार 10 रुपए भी मिले

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उत्तर प्रदेश पंचायत राज विभाग का परिचय पत्र चतुर्थ श्रेणी भी मिला

-छह से आठ लाख रुपए में अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा में बैठाते थे सॉल्वर

-पटना बिहार में रहता है गैंग का मास्टरमाइंड, वही तैयार करते हैं फर्जी दस्तावेज

PRAYAGRAJ: छह से आठ लाख रुपए लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर देने वाले गैंग के दो सदस्यों को एसटीएफ ने रविवार को धर दबोचा। दोनों धूमनगंज एरिया स्थित झलवा तिराहे पर ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी की परीक्षा में सॉल्वर बैठाने का प्लान बना रहे थे। इनके कब्जे से एसटीएफ को कई फर्जी आधार कार्ड के अलावा पैन कार्ड मोबाइल, आदि मिले हैं। पूछताछ में दोनों ने चौंकाने वाले मामलों का खुलासा किया।

स्कूल प्रबंधक संग ढूंढते थे क्लाइंट

पुलिस उपाधीक्षक एसटीएफ नावेन्दु कुमार ने बताया कि निरीक्षक केशव चंद्र राय व कांस्टेबल प्रवीण जायसवाल पकड़े सॉल्वरों ने अपनी पहचान गौतम मित्र उर्फ विपिन चंद्र मिश्र पुत्र गोकुल प्रसाद मिश्र निवसी नवाबगंज कूढ़ा गांव व शैलेष कुमार मिश्र उर्फ दीपू पुत्र लक्ष्मी नारायण मिश्र निवासी उल्टा महेशगंज थाना नवाबगंज के रूप में दीप। पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे राजरूपपुर में किराए का कमरा लेकर रहते हैं। संदीप प्रजापति निवासी बेरावा रोड नवाबगंज प्रबंधक कौशल्या देवी जूनियर हाईस्कूल के साथ मिलकर अभ्यर्थियों की तलाश करते हैं। धूमनगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद पुलिस दोनों से गैंग के अन्य सदस्यों की बाबत पूछताछ में जुटी है।

पटना से भी कनेक्शन

-अभ्यर्थियों से छह से आठ लाख रुपए लेकर उनकी जगह सॉल्वर को परीक्षा देने के लिए बैठाते हैं।

-अभ्यर्थी की जगह प्रवेश पत्र पर सॉल्वर की फोटो मैच कराने के लिए वे पटना बिहार निवासी राजीव रंजन एवं नवीन उर्फ नागमणि पांडेय के पास जाया करते थे।

-यह काम वो कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर से किया करता है।

-पटना में ही सॉल्वरों के फर्जी प्रपत्र भी तैयार कराते थे। वही दोनों इस काम के मेन व्यक्ति हैं।

-परीक्षा में बैठने के लिए सॉल्वरों को राजीव रंजन व नवीन 50 से 60 हजार रुपए दिया करते थे।


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