वाह रे डॉक्टर साहब एक मिनट में ही पकड़ ले रहे बीमारी

2018-12-14T06:00:09Z

- बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी का हाल

- डेली पहुंचते हैं लगभग 4500 मरीज, एक मरीज को मिलता है महज एक मिनट

- भीड़ के लोड का हवाला दे मजबूरी जता रहा बीआरडी प्रशासन

GORAKHPUR: बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीजों के साथ गजब खेल हो रहा है। यहां डॉक्टर जांच की जगह अंदाजे से ही इलाज करने में लगे हैं। हाल ये कि एमसीआई मानक के हिसाब से एक मरीज पर कम से कम 10 से 15 मिनट देने के बजाए डॉक्टर भीड़ के बीच हर मरीज को एक मिनट में ही निपटा दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की सभी ओपीडी का यही हाल है। सुबह होते ही यहां मरीजों की कतार लग जाती है। खुद यहां के कुछ डॉक्टर्स नाम ना छापने की शर्त पर बताते हैं कि भीड़ के प्रेशर को कम करने के लिए मरीजों को बहुत कम समय देकर अनुभव के आधार पर ही दवा लिख दी जाती है। गुरुवार को भी बीआरडी की ओपीडी में लगभग 4300 मरीज पहुंचे जिन्हें डॉक्टर्स फटाफट निपटाते ही नजर आए।

फटाफट ओपीडी में अंदर-बाहर होते मरीज

मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों को पर्याप्त इलाज ना मिल पाने की शिकायतें ना मिल पाने की बढ़ती शिकायतों पर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर यहां के हालात जानने पहुंचा। जो नजारा देखने मिला वह सरेआम बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल रहा था। आर्थो ओपीडी की गैलरी में मरीजों की काफी भीड़ जमा थी। कुछ मरीज लाइन में लगे थे तो कुछ कुर्सी पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। डॉक्टर्स कक्ष में सीनियर व जूनियर डॉक्टर मरीजों को देख रहे थे। एक मरीज निकलता तो दूसरा ओपीडी के अंदर इंट्री करता। एक मरीज को देखने में डॉक्टर को केवल एक मिनट ही लग रहा था। वहीं मेडिसिन विभाग में पर्ची लेने के बाद मरीज को अलग से टोकन दिया जा रहा था जिसके साथ वह ओपीडी के अंदर जा रहा थे। एक से आधे मिनट के अंदर ही उन्हें बाहर भी भेज दिया जा रहा था।

क्या करें इतनी भीड़ है

साथ ही चर्म रोग, मानसिक रोग, ईएनटी, चेस्ट, दंत, कैंसर आदि डिपार्टमेंट्स का भी यही हाल रहा। इस संबंध में जब एक सीनियर डॉक्टर से बात की गई तो उनका कहना था कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है लेकिन अभी भी डॉक्टर्स का अभाव है। उन्होंने माना कि एक मरीज पर दस से 15 मिनट का समय देना जरूरी है लेकिन वर्क लोड के चलते मरीज को पूरा समय नहीं दे पाते हैं।

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इमरजेंसी केस पर देते ध्यान

वहीं, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगर इमरजेंसी केस जूनियर व सीनियर डॉक्टर्स के समझ से बाहर होता है तो उसे कंसल्टेंट ही देखते हैं। उसके बाद उस केस को हैंडल किया जाता है। ऐसे केस पर दस से 20 मिनट का समय भी डॉक्टर्स देते हैं। लेकिन खांसी, जुखाम, बुखार आदि मर्ज के लिए आधे मिनट का समय भी बमुश्किल ही दिया जा रहा है।

गुरुवार को ओपीडी में पहुंचे मरीज

डिपार्टमेंट पेशेंट

मेडिसिन विभाग 600

चर्म रोग 500

सर्जरी 400

मानसिक रोग 300

ईएनटी 500

नेत्र रोग 400

गायनी 400

पीडिया 500

टीबी व चेस्ट 500

कैंसर 200

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में स्टाफ

कंसल्टेंट डॉक्टर - 50

सीनियर रेजीडेंट - 25

जूनियर रेजीडेंट - 150

एमबीबीएस स्टूडेंट्स - 400

इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टर्स -100

बेड -1050

प्रतिदिन की ओपीडी - लगभग 4500

इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीज - 500

वर्जन

ओपीडी में आने वाले मरीजों के इलाज का डॉक्टर्स पर काफी लोड होता है। नियम से देखा जाए तो 40 मरीज की ओपीडी होनी चाहिए लेकिन मरीजों की तादाद अधिक होने के कारण उन्हें भी देखना मजबूरी है। हर दिन की ओपीडी में अलग-अलग कंसल्टेंट के साथ सीनियर रेजीडेंट व जूनियर रेजीडेंट होते हैं।

- डॉ। आरएस शुक्ला, प्रभारी एसआईसी, बीआरडी


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