यार ही निकला गद्दार

2013-06-01T12:01:18Z

Allahabad इनके कारनामे तो शातिर और पेशेवर अपराधियों को भी मात देने वाले थे उनकी पूरी योजना पन्द्रह लाख वसूलने के बाद पॉलिटेक्नि के स्टूडेंट को ठिकाने लगा देने की थी लेकिन शुक्र है कि बचा लिया गया धूमनगंज एरिया से किडनैप हुए प्रेमी युगल को धूमनगंज पुलिस और क्राइम ब्रांच ने बचा लिया खास बात यह है कि रोंगटे खड़े कर देने वाली इस घटना को अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि उसका फ्रेंड ही था

प्रेम मिलन से शुरू हुई कहानी अमित राज उर्फ सूरज बनारस के लहरतारा एरिया में रहता है. उसके पिता श्याम कुमार रेलवे में जॉब करते हैं. अमित की बहन की शादी हो चुकी है और एक छोटा भाई है. अमित लखनऊ से पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कर रहा है. इस बार उसका सेकेंड सेमेस्टर है. अमित की रिलेटिव राधिका (काल्पनिक नाम) इलाहाबाद के कालिंदीपुरम एरिया की रहने वाली है. अमित और राधिका दोनों एक दूसरे को चाहते हैं. प्यार इतना ज्यादा था कि दोनों घर वालों से छिपकर मिलने जुलने भी लगे थे. 
22 को मिलने पहुंचा थाअमित के साथ लखनऊ में इलाहाबाद का रहने वाला रमेश तिवारी उर्फ गुड्डू भी पॉलिटेक्निक का छात्र है. अमित ने रमेश से बताया था कि उसकी प्रेमिका इलाहाबाद में रहती है और दोनों वहां मिलते हैं. 22 मई को अमित ने प्लान किया कि बनारस से लखनऊ जाने से पहले वह अपनी पे्रमिका राधिका से मिलने जाएगा. अब मिलने-जुलने में ज्यादा प्राब्लम इसलिए भी नहीं थी क्योंकि, फैमिली मेम्बर्स शादी के लिए राजी हो गए थे. 
शरण लेने पहुंचा था दोस्त के यहां एसएसपी मोहित अग्रवाल ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा करते हुए मीडिया को बताया कि अमित ने रमेश से यह बात शेयर की तो रमेश ने अपने साथी का रूम एक घंटे के लिए दिलाने को कहा. 22 की सुबह अमित जंक्शन पहुंचा. राधिका भी वहीं पहुंची थी. जंक्शन से दोनों रमेश के पास पहुंचे. रमेश उन्हें मेंहदौरी कालोनी शिवकुटी एरिया में में रहने वाले अपने मित्र के घर ले गया. अमित का प्लान एक घंटे साथ रहने के बाद राधिका को घर छोड़कर लखनऊ निकल जाने का था. 
दोस्त ने दे दिया दगा अमित को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उसके दोस्त रमेश की नीयत बदल चुकी है. वह कमरे में अपनी प्रेमिका के साथ प्यार भरी बातों में लगा था तो दूसरी ओर रमेश कुछ और ही प्लान कर चुका था. कुछ ही देर में रमेश के चार अन्य साथी प्रीतम त्रिपाठी, अंकित शुक्ला, मयंक चौधरी और अन्नू शुक्ला पहुंच गए. सभी की मंशा एक थी. युगल को कमरे में बंद कर दिया जाए और फैमिली मेम्बर्स से फिरौती की रकम मांगी जाए. 
वहशियों की तरह पीटाचारों ने कमरे में दोनों को घेर लिया तो अमित और राधिका स्तब्ध रह गए. रमेश और उसके साथियों ने दोनों को अपनी मंशा बताई तो अमित ने विरोध किया. इस पर उन लोगों ने अमित को वहशियों की तरह पीटा. रमेश के एक साथी प्रीतम ने दोनों को हैंडिल करने के लिए फोर्टविन रैनबैक्सी इंजेक्शन लगा दिया. इससे दोनों अचेत हो गए. इसके बाद उन्हें परमानेंट बेहोशी की स्थिति में रखने के लिए मुनक्का और भांग खिलाने लगे. इससे अमित और उसकी प्रेमिका की हालत इतनी बिगड़ गई कि होश नहीं रहा कि वे कहां हैं?
23 मई को की फिरौती की कॉलइसके बाद शुरू हुआ रमेश और उसके दोस्तों का असली खेल. उन्होंने 23 मई को अमित के पिता श्याम को उसी के मोबाइल से काल किया और  कहा कि तुम्हारा बेटा और उसकी प्रेमिका हमारे कब्जे में हैं. उन्हें जिन्दा देखना चाहते हैं तो 15 लाख रुपए का इंतजाम कर लें. वे गालियों के साथ धमकी भी दे रहे थे. अमित के पैरेंट्स को भी उन्होंने गाली दी. श्याम ने उनकी बात सुनने को कहा तो उन्होंने अपने एक बैंक एकाउंट के बारे में बताया और चुपचाप 15 लाख रुपए उसमें जमा कर देने को कहा. 
24 मई को पहुंचे धूमगनंज22 मई से ही एक तरफ राधिका की फैमिली तो दूसरी ओर अमित की फैमिली उनकी खोजबीन में जुटी थी. राधिका के घर वालों ने धूमनगंज थाने में उसकी गुमशुदगी भी दर्ज कराई थी. इधर, फिरौती की रकम मांगने के बाद अमित और राधिका की फैमिली मेम्बर्स ने आपस में बातचीत की. फिर अमित के पिता भी इलाहाबाद पहुंच गए. उन्होंने राजरूपपुर पुलिस चौकी में फिरौती मांगने की कंप्लेन की. पुलिस भी जांच में जुट गई. 
नंगा करके पीटा फिर बनाई क्लिपिंगचार दिन हो चुके थे. फोन से मिलने वाली धमकी के बाद भी अमित की फैमिली ने बदमाशों ने फिरौती की रकम नहीं दी तो रमेश और उसके साथियों ने क्रूरता की सभी हदें पार करते हुए अमित के पिता को सबक सिखाने की प्लानिंग कर ली. 25 मई को अमित को न्यूड करके लाठी डंडे से पीटा और मोबाइल से वीडियो क्लीपिंग बनाई. एक दो नहीं बल्कि तीन चार क्लीपिंग में अमित के सिर से लेकर पैर तक के जख्म के निशान इसमें दिखाए गए. 
खून से सना लेटर भेजा25 मई को ही बदमाशों ने अमित की पिटाई करते हुए उसके नाखून तक निकाल लिए और उसकी खून से लेटर लिखा. 26 मई की सुबह किडनैपर रमेश के साथी अंकित के खून से सना धमकी भरा लेटर, रोते बिलखते और जख्मी हालत में बनी अमित की वीडियो क्लीपिंग और उसके गले हार लेकर बनारस पहुंचे. चुपचाप वह अमित के घर के बाहर एक पैकेट में सारा सामान रखकर निकल गए. अमित के पिता श्याम ने लेटर पढ़ा तो उसमें एक मोबाइल चिप भी मिला. मोबाइल चिप को जब मोबाइल में लगाया तो वह वीडियो देखकर उनका दिल दहल गया. वीडियो में अमित की पिटाई और उसके साथ हो रहे जुल्म का सारा खेल कैद था. 
किडनैपिंग का केस दर्ज किया26 को जब इस सनसनीखेज घटना की जानकारी धूमनगंज पुलिस को हुई तो पुलिस को यकीन हो गया कि प्रेमी युगल ने कोई ड्रामा नहीं किया बल्कि वे किडनैप हुए हैं. धूमनगंज एसओ  धर्मेन्द्र ने 28 मई को किडनैपिंग की रिपोर्ट दर्ज की और क्राइम ब्रंाच के साथ जांच में जुट गए. इस टीम में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर मनोज रघुवंशी, एसआई अजय सिंह, राकेश सिंह और उनकी पूरी टीम जांच में लग गई. सर्विलांस की मदद से बदमाशों का लोकेशन सर्च ऑपरेशन शुरू  हुआ. 
रात भर चला सर्च ऑपरेशनपुलिस के पास बदमाशों के खिलाफ कोई क्लू नहीं था. सर्विलांस से भी पुलिस को कुछ खास मदद नहीं मिल पा रही था. क्योंकि, बदमाशों ने अमित का ही मोबाइल यूज किया था. फिर  शुरू हुआ सर्च आपरेशन. इस सर्च आपरेशन में पुलिस को इतना यकीन हो गया कि बदमाशों ने शिवकुटी एरिया के बद्री आवास योजना में ही अमित और राधिका को छिपा कर रखा है. 30 मई की रात पुलिस को मुखबिर से बदमाशों के बारे में सटीक जानकारी मिल गई. धूमनगंज एसओ धर्मेन्द्र और क्राइम ब्रांच की टीम ने 31 मई को दबिश देकर बदमाशों को अरेस्ट कर लिया और अमित और राधिका को बचा लिया. 
हत्या की तैयारी थीइस ऑपरेशन में क्राइम ब्रांच टीम ने प्रीतम, रमेश, मयंक और अंकित को अरेस्ट कर लिया. उनका एक साथी वहां से भागने में सफल रहा. पुलिस ने अमित और राधिका को किडनैपर्स के चंगुल से छुड़ाया और उन्हें सीधे हॉस्पिटल ले गए. फ्राइडे को प्रेस कांफ्रेंस में एसएसपी ने जब बदमाशों से पूछताछ शुरू की तो पता चला कि बदमाश पैसा मिलने के बाद अमित को मारने की प्लानिंग कर चुके थे. क्योंकि अमित, रमेश को पहचानता था और उसके जिन्दा होने पर उसका राज पता चल जाता. 
गिरफ्तार-प्रीतम उर्फ सूरज- बद्री आवास योजना स्थायी पता सुल्तानपुर -रमेश तिवारी उर्फ गुडडू- सुल्तानपुर -मयंक चौधरी -मेंहदौरी-अंकित शुक्ला-शांतिपुरम फाफामऊ रिकवरी -रिवाल्वर, डंडे के टुकड़े, भोला मुनक्का, फोर्टविन रैनबैक्सी का  पैकेट, दो सीरिंज, एक निडिल, चार मोबाइल, सिम कार्ड, ममोरी कार्ड, एटीएम कार्ड वह भी चोरी का. प्राइज-अमित के पिता ने 5000 रुपए  पुलिस टीम को दिया. एसएसपी ने  भी क्राइम ब्रांच और धूमनगंज पुलिस को प्राइज देने की घोषणा की. 
रिकॉर्डेड आवाजपापा मुझे प्लीज बचा लीजिए. आप जो कहेंगे वो मानूंगा. मैं मरना नहीं चाहता. इन लोगों ने मुझे बहुत मारा है. आप पुलिस के पास गए थे. इसलिए दो दिन से मुझे खाना और पानी नहीं दिया. मेरा नाखून  उखाड़ा गया. अगर आप ने इन्हें पैसे नहीं दिए तो अगली बार ये मेरा गला काट देंगे. मैं दर्द बर्दाशत नहीं कर पा रहा हूं...
चिट में लिखा दर्दप्लीज आप फिर पुलिस के पास मत जाइएगा. वरना मेरे टुकड़े घर भेजवा देंगे. इस चिप में जितना दिखाया गया है हर समय इससे ज्यादा...मुझे दी जा रही है. नाखून उखाडऩे पर इतना खून तो अगर सर काटा  तो... 

प्रेम मिलन से शुरू हुई कहानी 

अमित राज उर्फ सूरज बनारस के लहरतारा एरिया में रहता है. उसके पिता श्याम कुमार रेलवे में जॉब करते हैं. अमित की बहन की शादी हो चुकी है और एक छोटा भाई है. अमित लखनऊ से पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कर रहा है. इस बार उसका सेकेंड सेमेस्टर है. अमित की रिलेटिव राधिका (काल्पनिक नाम) इलाहाबाद के कालिंदीपुरम एरिया की रहने वाली है. अमित और राधिका दोनों एक दूसरे को चाहते हैं. प्यार इतना ज्यादा था कि दोनों घर वालों से छिपकर मिलने जुलने भी लगे थे. 

22 को मिलने पहुंचा था

अमित के साथ लखनऊ में इलाहाबाद का रहने वाला रमेश तिवारी उर्फ गुड्डू भी पॉलिटेक्निक का छात्र है. अमित ने रमेश से बताया था कि उसकी प्रेमिका इलाहाबाद में रहती है और दोनों वहां मिलते हैं. 22 मई को अमित ने प्लान किया कि बनारस से लखनऊ जाने से पहले वह अपनी पे्रमिका राधिका से मिलने जाएगा. अब मिलने-जुलने में ज्यादा प्राब्लम इसलिए भी नहीं थी क्योंकि, फैमिली मेम्बर्स शादी के लिए राजी हो गए थे. 

शरण लेने पहुंचा था दोस्त के यहां 

एसएसपी मोहित अग्रवाल ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा करते हुए मीडिया को बताया कि अमित ने रमेश से यह बात शेयर की तो रमेश ने अपने साथी का रूम एक घंटे के लिए दिलाने को कहा. 22 की सुबह अमित जंक्शन पहुंचा. राधिका भी वहीं पहुंची थी. जंक्शन से दोनों रमेश के पास पहुंचे. रमेश उन्हें मेंहदौरी कालोनी शिवकुटी एरिया में में रहने वाले अपने मित्र के घर ले गया. अमित का प्लान एक घंटे साथ रहने के बाद राधिका को घर छोड़कर लखनऊ निकल जाने का था. 

दोस्त ने दे दिया दगा 

अमित को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उसके दोस्त रमेश की नीयत बदल चुकी है. वह कमरे में अपनी प्रेमिका के साथ प्यार भरी बातों में लगा था तो दूसरी ओर रमेश कुछ और ही प्लान कर चुका था. कुछ ही देर में रमेश के चार अन्य साथी प्रीतम त्रिपाठी, अंकित शुक्ला, मयंक चौधरी और अन्नू शुक्ला पहुंच गए. सभी की मंशा एक थी. युगल को कमरे में बंद कर दिया जाए और फैमिली मेम्बर्स से फिरौती की रकम मांगी जाए. 

वहशियों की तरह पीटा

चारों ने कमरे में दोनों को घेर लिया तो अमित और राधिका स्तब्ध रह गए. रमेश और उसके साथियों ने दोनों को अपनी मंशा बताई तो अमित ने विरोध किया. इस पर उन लोगों ने अमित को वहशियों की तरह पीटा. रमेश के एक साथी प्रीतम ने दोनों को हैंडिल करने के लिए फोर्टविन रैनबैक्सी इंजेक्शन लगा दिया. इससे दोनों अचेत हो गए. इसके बाद उन्हें परमानेंट बेहोशी की स्थिति में रखने के लिए मुनक्का और भांग खिलाने लगे. इससे अमित और उसकी प्रेमिका की हालत इतनी बिगड़ गई कि होश नहीं रहा कि वे कहां हैं?

23 मई को की फिरौती की कॉल

इसके बाद शुरू हुआ रमेश और उसके दोस्तों का असली खेल. उन्होंने 23 मई को अमित के पिता श्याम को उसी के मोबाइल से काल किया और  कहा कि तुम्हारा बेटा और उसकी प्रेमिका हमारे कब्जे में हैं. उन्हें जिन्दा देखना चाहते हैं तो 15 लाख रुपए का इंतजाम कर लें. वे गालियों के साथ धमकी भी दे रहे थे. अमित के पैरेंट्स को भी उन्होंने गाली दी. श्याम ने उनकी बात सुनने को कहा तो उन्होंने अपने एक बैंक एकाउंट के बारे में बताया और चुपचाप 15 लाख रुपए उसमें जमा कर देने को कहा. 

24 मई को पहुंचे धूमगनंज

22 मई से ही एक तरफ राधिका की फैमिली तो दूसरी ओर अमित की फैमिली उनकी खोजबीन में जुटी थी. राधिका के घर वालों ने धूमनगंज थाने में उसकी गुमशुदगी भी दर्ज कराई थी. इधर, फिरौती की रकम मांगने के बाद अमित और राधिका की फैमिली मेम्बर्स ने आपस में बातचीत की. फिर अमित के पिता भी इलाहाबाद पहुंच गए. उन्होंने राजरूपपुर पुलिस चौकी में फिरौती मांगने की कंप्लेन की. पुलिस भी जांच में जुट गई. 

नंगा करके पीटा फिर बनाई क्लिपिंग

चार दिन हो चुके थे. फोन से मिलने वाली धमकी के बाद भी अमित की फैमिली ने बदमाशों ने फिरौती की रकम नहीं दी तो रमेश और उसके साथियों ने क्रूरता की सभी हदें पार करते हुए अमित के पिता को सबक सिखाने की प्लानिंग कर ली. 25 मई को अमित को न्यूड करके लाठी डंडे से पीटा और मोबाइल से वीडियो क्लीपिंग बनाई. एक दो नहीं बल्कि तीन चार क्लीपिंग में अमित के सिर से लेकर पैर तक के जख्म के निशान इसमें दिखाए गए. 

खून से सना लेटर भेजा

25 मई को ही बदमाशों ने अमित की पिटाई करते हुए उसके नाखून तक निकाल लिए और उसकी खून से लेटर लिखा. 26 मई की सुबह किडनैपर रमेश के साथी अंकित के खून से सना धमकी भरा लेटर, रोते बिलखते और जख्मी हालत में बनी अमित की वीडियो क्लीपिंग और उसके गले हार लेकर बनारस पहुंचे. चुपचाप वह अमित के घर के बाहर एक पैकेट में सारा सामान रखकर निकल गए. अमित के पिता श्याम ने लेटर पढ़ा तो उसमें एक मोबाइल चिप भी मिला. मोबाइल चिप को जब मोबाइल में लगाया तो वह वीडियो देखकर उनका दिल दहल गया. वीडियो में अमित की पिटाई और उसके साथ हो रहे जुल्म का सारा खेल कैद था. 

किडनैपिंग का केस दर्ज किया

26 को जब इस सनसनीखेज घटना की जानकारी धूमनगंज पुलिस को हुई तो पुलिस को यकीन हो गया कि प्रेमी युगल ने कोई ड्रामा नहीं किया बल्कि वे किडनैप हुए हैं. धूमनगंज एसओ  धर्मेन्द्र ने 28 मई को किडनैपिंग की रिपोर्ट दर्ज की और क्राइम ब्रंाच के साथ जांच में जुट गए. इस टीम में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर मनोज रघुवंशी, एसआई अजय सिंह, राकेश सिंह और उनकी पूरी टीम जांच में लग गई. सर्विलांस की मदद से बदमाशों का लोकेशन सर्च ऑपरेशन शुरू  हुआ. 

रात भर चला सर्च ऑपरेशन

पुलिस के पास बदमाशों के खिलाफ कोई क्लू नहीं था. सर्विलांस से भी पुलिस को कुछ खास मदद नहीं मिल पा रही था. क्योंकि, बदमाशों ने अमित का ही मोबाइल यूज किया था. फिर  शुरू हुआ सर्च आपरेशन. इस सर्च आपरेशन में पुलिस को इतना यकीन हो गया कि बदमाशों ने शिवकुटी एरिया के बद्री आवास योजना में ही अमित और राधिका को छिपा कर रखा है. 30 मई की रात पुलिस को मुखबिर से बदमाशों के बारे में सटीक जानकारी मिल गई. धूमनगंज एसओ धर्मेन्द्र और क्राइम ब्रांच की टीम ने 31 मई को दबिश देकर बदमाशों को अरेस्ट कर लिया और अमित और राधिका को बचा लिया. 

हत्या की तैयारी थी

इस ऑपरेशन में क्राइम ब्रांच टीम ने प्रीतम, रमेश, मयंक और अंकित को अरेस्ट कर लिया. उनका एक साथी वहां से भागने में सफल रहा. पुलिस ने अमित और राधिका को किडनैपर्स के चंगुल से छुड़ाया और उन्हें सीधे हॉस्पिटल ले गए. फ्राइडे को प्रेस कांफ्रेंस में एसएसपी ने जब बदमाशों से पूछताछ शुरू की तो पता चला कि बदमाश पैसा मिलने के बाद अमित को मारने की प्लानिंग कर चुके थे. क्योंकि अमित, रमेश को पहचानता था और उसके जिन्दा होने पर उसका राज पता चल जाता. 

गिरफ्तार

-प्रीतम उर्फ सूरज- बद्री आवास योजना स्थायी पता सुल्तानपुर 

-रमेश तिवारी उर्फ गुडडू- सुल्तानपुर 

-मयंक चौधरी -मेंहदौरी

-अंकित शुक्ला-शांतिपुरम फाफामऊ 

रिकवरी 

-रिवाल्वर, डंडे के टुकड़े, भोला मुनक्का, फोर्टविन रैनबैक्सी का  पैकेट, दो सीरिंज, एक निडिल, चार मोबाइल, सिम कार्ड, ममोरी कार्ड, एटीएम कार्ड वह भी चोरी का. 

प्राइज-अमित के पिता ने 5000 रुपए  पुलिस टीम को दिया. एसएसपी ने  भी क्राइम ब्रांच और धूमनगंज पुलिस को प्राइज देने की घोषणा की. 

रिकॉर्डेड आवाज

पापा मुझे प्लीज बचा लीजिए. आप जो कहेंगे वो मानूंगा. मैं मरना नहीं चाहता. इन लोगों ने मुझे बहुत मारा है. आप पुलिस के पास गए थे. इसलिए दो दिन से मुझे खाना और पानी नहीं दिया. मेरा नाखून  उखाड़ा गया. अगर आप ने इन्हें पैसे नहीं दिए तो अगली बार ये मेरा गला काट देंगे. मैं दर्द बर्दाशत नहीं कर पा रहा हूं...

 

चिट में लिखा दर्द

प्लीज आप फिर पुलिस के पास मत जाइएगा. वरना मेरे टुकड़े घर भेजवा देंगे. इस चिप में जितना दिखाया गया है हर समय इससे ज्यादा...मुझे दी जा रही है. नाखून उखाडऩे पर इतना खून तो अगर सर काटा  तो... 

Posted By: Inextlive

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