नाटक में जुड़ी है प्रोफेशनल्स की टीम

2014-03-27T07:00:02Z

- मेकअप आर्टिस्ट से लेकर म्यूजिशियन तक का है अपना किरदार

- कालिदास रंगालय में तीन सौ से अधिक प्रोफेशनल आर्टिस्ट का जमावड़ा

PATNA : यूथ हॉस्टल के कमरों से अलग-अलग तरह की आवाजें सुनाई पड़ती है। कहीं ढोल थाप तो कहीं हारमुनियम की धुन, कहीं पायलों की झनकार तो कहीं सुरीले गानों की टुकरियां। ये लोग कोई और नहीं बल्कि ये नाटक और थियेटर के कलाकार है। जिन्होंने इसे ही अपना प्रोफेशन बनाया है। बजायफ्ता पैसे पर प्रोग्राम करते है। सिने युग में नाटक को गोल्डन तो नहीं कह सकते है। लेकिन यूथ डायरेक्टर, आर्टिस्ट, म्यूजिशियन, प्रोडक्शन जैसे भारी भरकम लग्जरी आइटम के साथ अब ये लोग भी एक शहर से दूसरे शहर पहुंचने लगे है। कालिदास रंगालय में ख्9 वे पाटलिपुत्रा नाट्य महोत्सव के मौके पर आए फ्00 से अधिक आर्टिस्ट और उनकी टीम मेंबर्स वो काम नहीं करते है। जो अमूमन दूसरी जगहों के आर्टिस्ट करते हैं।

आंखों के रास्ते दिलों तक

प्रांगण की ओर से आयोजित इस फेस्ट में आए पश्चिम बंगाल, एमपी, राजस्थान सहित अन्य जगहों के कलाकारों की ओर से बेहतरीन नाटक की प्रस्तुति की जा रही है। सोमा चक्रवती ने बताया कि अब कहानी को बढ़ाने और रोचक बनाने के लिए इस तरह का सहारा लेना पड़ता है। और इसके लिए आपके साथ एक प्रोडक्शन टीम का होना जरुरी होता है। तभी आप कुछ कर पाते है। कालिदास रंगालय में इंद्रवती नाट्य समिति सिंधी की ओर से पंच भगता का मंचन किया गया है। इसमें भगत सिंह को पांच रंग में दिखलाया गया है।

एक्टिंग अपने आप में हीं बहुत बड़ा काम है। थियेटर, नाटक, फिल्म, हर चीजों की डिमांड है। आप कितनी बेहतर एक्टिंग करते है। यह साबित आपको करना होता है। फिर कहीं दूसरी जगह जाने की जरुरत नहीं होती है।

योगेश सिंह परिहार

प्रोफेशनल आर्टिस्ट

नाटक में उसकी कहानी के अनुसार म्यूजिक रहता है। तभी दर्शक कुर्सी से जमे रहते है। लोकल धुन कहानी को बांधे रखता है। इसलिए इस फिल्ड में प्रोफेशनल हर नाटक के लिए एक बेहतरीन धुन तैयार करते है।

लखन बौद्ध

म्यूजिशियन

अब कहानियों को समझने और जीनने की कला कलाकारों में खूब आने लगी है। इसका नतीजा है कि भगत सिंह जैसे चरित्र और उसके अंतरद्वंद जैसे सब्जेक्ट को आसानी से प्रजेंट किया जा रहा है। नए राइटर और नए डायरेक्टर की सोच ही उसकी डिमांड बढ़ा रही है।

नीरज कुंदेल

आर्टिस्ट

अब आपको नाटक बोर नहीं करता है। कई शहरों की पहचान में अब नाटक शामिल होने लगा है। दंत कथा और नयी कहानी का संग्रह बढ़ते जा रहा है। कई दफा ग्रुप में नए कलाकार, नयी कहानी और नए डायरेक्टर आ जाते है और उनकी कहानी देश में चलने लगती है।

राकेश जयसवाल

आर्टिस्ट


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