'जिंदा हैं वो लोग जो मौत से टकराते हैं' कादर खान के 7 यादगार डायलाॅग

2019-01-01T13:48:53Z

वेटरन एक्टर और राइटर कादर खान ने 31 दिसंबर को हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह दिया। वो अब भले ही हमारे बीच नहीं हैं पर उनके बेहदरीन अभिनय और दमदार डायलाॅग से बाॅलीवुड में उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा

कानपुर। कादर खान एक बेहतरीन लेखक के साथ-साथ गजब के अभिनेता भी थे। उन्होंने कई फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से जान फूंक दी थी। ऐसी ही एक फिल्म है 'मुक्कदर का सिकंदर'। इस फिल्म में उनका सबसे फेमस डायलाॅग है, 'जिंदा हैं वो लोग जो मौत से टकराते हैं... मुर्दों से बत्तर हैं वो लोग जो मौत से घबराते हैं।'
'सुख तो बेवफा है...'

फिल्म 'मुक्कदर का सिकंदर' का ही एक और डायलाॅग है जो हमेशा हमें उनकी याद दिलाता रहेगा। ये डायलाॅग है, 'सुख तो बेवफा है... चंद दिनों के लिए आता है और चला जाता है।'
'दौलत तो आती जाती है'
जुलाई, 1998 को रिलीज हुई गोविंदा स्टारर फिल्म 'दूल्हे-राजा' में उनके कई डायलाॅग्स को लोगों ने खूब पसंद किया है। ऐसा ही एक डायलाॅग है, 'दौलत का क्या है, वो तो आती-जाती रहती है... मगर बेटी तो घर की इज्जत है... और इज्जत एक बार चली जाए तो वो लौट कर वापस नहीं आया करती।'

'मौत से खेलो'

1978 में रिलीज हुई फिल्म 'मुक्कदर का सिकंदर' का एक डायलाॅग और काफी फेमस हुआ था। वो डायलाॅग है, 'जिंदगी का अगर सही लफ्ज उठना है... तो मौत से खेलो।' इस तरह के डायलाॅग फिल्मों में करके उन्होंने समाज को कई तरह की सीख भी दी है।
'दौलत शुरु में सुख तो देती है...'
जून, 1989 में रिलीज हुई फिल्म 'जैसी करनी वैसी भरनी' को कादर खान के एक डायलाॅग ने खास बना दिया था। फिल्म में उन्होंने डायलाॅग बोला था, 'हराम की दौलत इंसान को शुरु में सुख जरूर देती है... मगर बाद में ले जा कर एक ऐसे दुख के सागर में धकेल देती है... जहां मरते दम तक सुख का किनारा कभी नजर नहीं आता है।'
'इंसान, इंसान बन कर रहे'
16 जून, 2000 को रिलीज हुई गोविंदा की काॅमेडी जेनेर की फिल्म 'जोरू का गुलाम' को लोगों ने खूब पसंद किया था। वहीं इसमें कादर खान के एक डायलाॅग को भी लोगों ने खूब सराहा, 'इंसान इस दुनिया में इंसान बन कर रहे... यही उसके लिए काफी है।'

'इंसान की नहीं कपड़ों और धन की कद्र होती है'

गोविंदा स्टारर सुपर हिट फिल्म 'हीरो नंबर वन' में भी कादर के इस यादगार डायलाॅग को भूल नहीं पाएंगे आप। फिल्म 21 फरवरी, 1997 को रिलीज हुई थी जिसमें कादर खान ने डायलाॅग मारा था, 'दुनिया में आदमी की नहीं... उसके कपड़ों की, उसके धन की कदर होती है।'
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