जानिए नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष कैसे बने अरविंद पनगढ़‍िया

2015-01-06T13:00:00Z

मोदी सरकार ने योजना आयोग की जगह नीति आयोग को दे दी है इसके साथ ही इस आयोग का उपाध्‍यक्ष अरविंद पनगढ़‍िया को बनाया गया है आइए जानें आखिर पीएम मोदी ने अरविंद पनगढ़‍िया को नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष के रूप में क्‍यों चुना

मोदी के पुराने सर्पोटर हैं अरविंद
अरविंद पनगढ़िया को उन खास लोगों में से एक माना जाता है जो पीएम मोदी की नीतियों का गुजरात के समय से समर्थन करते आए हैं. लोकसभा चुनाव 2014 के परिणाम आने से पहले अरविंद पनगढ़िया से पूछा गया था कि वह गुजरात मॉडल को कैसे देखते हैं. तो इसके जवाब में पनगढ़िया ने कहा, 'कुछ लोग कहते हैं कि गुजरात के लोग उद्यमी होते हैं. ऐसे तो मेरे राज्य राजस्थान में मारवाड़ी भी बहुत उद्यमी होते हैं तो उन मारवाड़ियों का क्या हुआ? वे आधे से ज़्यादा जाकर गुजरात में बैठे हैं, क्योंकि राजस्थान में प्रशासन बहुत कमज़ोर है. उद्योग-व्यापार विकास नहीं कर पाए हैं.'
मोदी जैसी ही कहानी है अरविंद की

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया की कहानी भी काफी कुछ भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की तरह है. मोदी की तरह पनगढ़िया भी जयपुर के बेहद गरीब परिवार में 30 सितंबर 1952 में पैदा हुए. इसके बाद काफी मुश्किलों से जूझते हुए पनगढ़िया ने जयपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद अमेरिका में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स से पीएचडी किया. फिलहाल वह कोलंबिया यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स प्रोफेसर हैं. गौरतलब है कि पनगढ़िया ने एशियन डेवलपमेंट टीम के चीफ इकॉनोमिस्ट के साथ-साथ आईएमएफ, डब्ल्यूटीओ और यूएन में भी काम किया है.

लिख डाली गुजरात मॉडल पर किताब

अरविंद पनगढ़िया ने जगदीश भगवती के साथ मिलकर 'इंडियाज ट्रस्ट विद् डेस्टिनी: डिबंकिंग मिथ्स दैट अंडरमाइन प्रोग्रेस एण्ड एड्रेसिंग न्यू चैलेंजेज' किताब लिखी है. इस बुक में पनगढ़िया ने गुजरात मॉडल को ऐसे विकास का प्रतीक बताया है जो उच्च वृद्धि और एंट्रप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देकर प्राप्त किया जा सकता है. गौरतलब है कि पनगढ़िया ने जगदीग भगवती के साथ मिलकर करीब 15 किताबें लिखी हैं. इसके अलावा वह मेरीलैंड यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल इकॉनोमिक्स सेंटर के सह-निदेशक के रूप में भी काम कर चुके हैं. इसके अलावा राजस्थान सरकार को हाल ही में आर्थिक सलाहकार परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया था.
अमर्त्य सेन के धुर-विरोधी
62 वर्षीय अरविंद पनगढ़िया और उनके दोस्त जगदीश भगवती को नोबेल पुरुस्कार विजेता अमर्त्य सेन के धुर-विरोधियों में देखा जाता है. इन दोनों इकॉनोमिस्ट्स ने अमर्त्य सेन के भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर विचारों की खुली आलोचना की है. साल 2012 में यूपीए सरकार अरविंद पनगढ़ियो पद्म भूषण सम्मान से नवाज चुकी है.

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