रिवरफ्रंट घोटाले में तीन इंजीनियरों की एक करोड़ की प्रापर्टी जब्त

2019-07-05T10:08:47Z

इन तीनों इंजीनियरों की बाकी चलअचल संपत्तियों का भी पता लगा रही है ताकि उनको भी अटैच किया जा सके।

- रूप सिंह यादव, अनिल यादव और एसएन शर्मा की संपत्तियां अटैच
- ठेकेदारों ने बैंक से पैसा निकालकर दिया कमीशन तो खरीद ली प्रॉपर्टी

- ईडी की जांच में खुले कई राज, रिश्तेदारों के नाम खरीदी थी प्रॉपर्टी

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW : सपा सरकार में हुए गोमती रिवरफ्रंट घोटाले में इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने ठेकेदारों से लाखों रुपये की रिश्वत लेने वाले तीन आरोपी इंजीनियरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी एक करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी को अटैच कर लिया है। गुुरुवार को ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह के निर्देश पर आरोपी इंजीनियर रूप सिंह यादव के नोएडा स्थित प्लॉट, अनिल यादव के लखनऊ के तीन प्लॉट और एसएन शर्मा का गाजियाबाद का फ्लैट अटैच किया है। इन तीनों इंजीनियरों की बाकी चल-अचल संपत्तियों का भी पता लगा रही है ताकि उनको भी अटैच किया जा सके।

बैंक से पैसे निकाल कर दी रिश्वत

गोमती रिवरफ्रंट घोटाले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज करने के बाद ईडी के अफसरों ने आरोपी इंजीनियरों को तलब करना शुरू कर दिया था। साथ ही रिवरफ्रंट का निर्माण कार्य करने वाले तमाम ठेकेदारों से भी गहन पूछताछ हुई थी। वहीं आरोपी इंजीनियरों और ठेकेदारों के बैंक खातों की पड़ताल में सामने आया कि तीनों इंजीनियरों द्वारा ठेकेदारों को किए गये भुगतान के बाद उनसे लाखों रुपये रिश्वत ली गयी। यह रकम नगद और बैंक के जरिए तीनों आरोपित इंजीनियरों रूप सिंह यादव, अनिल यादव और एसएन शर्मा को बांटी गयी जिससे तीनों ने अपनी पत्नी और करीबी रिश्तेदारों के नाम से कई प्रॉपर्टी खरीदी ताकि वे आयकर समेत जांच एजेंसियों की नजरों से बच सकें। यह लिंक मिलने से ईडी को इस मामले में मनी लांड्रिंग के पुख्ता प्रमाण हाथ लगे जिसके बाद तीनों की एक करोड़ की संपत्तियों को अटैच करने की कवायद शुरू कर दी गयी।

ईडी को छकाते रहे रूप सिंह

ध्यान रहे कि बीती 24 जनवरी को ईडी ने गोमती रिवरफ्रंट घोटाले में चार राज्यों में घोटालेबाजों के नौ ठिकानों पर छापेमारी कर कई अहम सुबूत जुटाए थे। इस दौरान लंबे समय से ईडी के नोटिस के बावजूद पूछताछ के लिए पेश नहीं हो रहे सिंचाई विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर रूप सिंह यादव का नोएडा स्थित आवास भी खंगाला गया था। छापेमारी की कार्रवाई लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और भिवाड़ी में हुई थी जिसमें ठेकेदारों और इंजीनियरों के बीच हुए तमाम संदिग्ध बैंकिंग ट्रांजेक्शन का पता चला था। इसके अलावा रिवरफ्रंट का निर्माण करने वाली कंपनी गैमन इंडिया का ऑफिस और एक विधायक के भाई का विशाल खंड स्थित आवास भी खंगाला गया था।

फैक्ट फाइल

- 747.49 करोड़ की लागत से होना था गोमती रिवरफ्रंट का निर्माण कार्य
- 1990.561 करोड़ बेतहाशा फिजूलखर्ची से योजना की बढ़ी लागत
- 1437.83 करोड़ रुपये हो चुके थे खर्च, कुल 1513.51 करोड़ दिए गये थे

टाइमलाइन

- 04 अप्रैल 2017 को सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिए रिवरफ्रंट घोटाले की जांच के निर्देश
- 16 मई 2017 को रिटायर्ड जस्टिस आलोक वर्मा ने राज्य सरकार को सौंपी जांच रिपोर्ट
- 19 जून 2017 को सिंचाई विभाग की ओर से आठ इंजीनियरों पर दर्ज की गयी एफआईआर
- 24 नवंबर 2017 को सरकार ने रिवरफ्रंट घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति की
- 02 दिसंबर 2017 को सीबीआई ने गोमती रिवरफ्रंट घोटाले का केस किया दर्ज
- 28 मार्च 2018 को ईडी ने सिंचाई विभाग की एफआईआर के आधार पर केस दर्ज किया



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