जियो टैगिंग में जुटी तीन सदस्यीय टीम

2019-07-17T06:00:57Z

रिमोट सेंसिंग टीम ने किया शहर के विभिन्न स्थलों का दौरा

तीन सदस्यीय टीम पहुंची मेरठ, 6 दिन तक करेगी सर्वे

Meerut। शहर की अवैध कॉलोनियां और अवैध निर्माण अब गूगल मैप पर दिखेंगे। मंगलवार को प्रदेश सरकार की रिमोट सेंसिंग टीम ने मेरठ पहुंचकर अवैध निर्माणों का सर्वे, गूगल मैपिंग और जियो टैगिंग शुरू कर दी है। तीन स्थानों पर अलग-अलग टीमों ने गूगल मैपिंग का कार्य किया।

टीम ने शुरू किया सर्वे

मंगलवार मेरठ में अवैध निर्माणों का डीमार्केशन शुरू हो गया। मेरठ विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष राजेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि उप्र शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन सेंटर की टीम ने सर्वे का कार्य शुरू कर दिया है। मंगलवार को प्राधिकरण की टीम के साथ एक्सपर्ट के साथ तीन क्षेत्रों का सर्वे किया। यूनीवर्सिटी रोड से अब्दुल्लापुर, तेजगढ़ी चौराहा, पीवीएस रोड पर एक टीम ने सर्वे किया। दूसरी टीम ने रोहटा रोड पर अवैध कॉलोनियों का डोजियर तैयार किया। तीसरी टीम ने भोला रोड पर सर्वे कर अवैध कॉलोनियों की गूगल मैपिंग की। एमडीए वीसी ने बताया कि टीमों ने 2017 से पहले के अवैध कॉलोनियों का सर्वे किया है। अवैध कॉलोनियों की लिस्ट प्राधिकरण ने उपलब्ध कराई है। सर्वे का कार्य पूर्ण होने के बाद जन सामान्य को एक क्लिक में मेरठ की अवैध कॉलोनियों और निर्माणों के बारे में विस्तृत जानकारी मिल जाएगी।

मेरठ में अवैध निर्माणों के डीमार्केशन का कार्य शुरू हो गया है। मंगलवार को जोन डी-3, सी-2 और सी-1 में अलग-अलग टीमों ने सर्वे किया। टीम 24 जुलाई तक मेरठ में अवैध कॉलोनियों का सर्वे करेगी।

राजेश कुमार पाण्डेय, उपाध्यक्ष, मेरठ विकास प्राधिकरण


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