भारत के सबसे सफल कप्तान के अच्‍छे दिन खत्म हो रहे हैं। धोनी पर कप्तानी से इस्तीफे का दबाव है। भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी में पर्दे के पीछे भी एक कहानी होती है...


गावस्कर से लेकर धोनी तक नाम बदले हैं। पर किरदार नहीं बदले..टीम इंडिया की कप्तानी के पीछे की कहानी का इतिहास ये बताता है कि धोनी के साथ कुछ नया नहीं हो रहा...यही होता आया है और यही होना था। पेश है सीनियर न्यूज एडिटर उमंग मिश्र का खास विश्लेषण....भगवान बड़ा कारसाज है..ये शब्द तो मुंशी प्रेमचंद की कहानी मंत्र के हैं। लेकिन ये भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान की कहानी का मंत्र भी है...एक से बढ़कर एक ऐतिहासिक सफलताएं दिलाने वाले कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के इस्तीफे पर बहस चल रही है।  धोनी जैसा कप्तान आज तक भारत में नहीं हुआ और आज भी उनके जैसा दूसरा कप्तान भारत में नहीं है ।माही आज भी भारत के बेस्ट अवेलेबल विकेटकीपर बल्लेबाज हैं।  इस सबके बाद भी इस बात की मांग हो रही है कि धोनी को वन डे की कप्तानी से भी इस्तीफा दे देना चाहिए।


समय का चक्र एक बार फिर घूम कर वहीं पहुंच गया जहां से धोनी का उदय हुआ था। ये वही महेन्द्र सिंह धोनी हैं। जिन्होंने सीनियर खिलाडिय़ों को एक एक कर विदा किया था। सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़...इस सबकी विदाई की बेला जल्दी लाने में धोनी का योगदान रहा। लक्ष्मण ने तो शिकायत की थी कि कप्तान धोनी ने उनके संन्यास के ऐलान के बाद उन्हें फोन तक नहीं किया था। तब धोनी सफलता के रथ पर सवार थे। जवान थे। उनके दिमाग में धार और शरीर में ताकत थी। बीसीसीआई में उनका सिक्का चलता था और जनता के दिलों पर वो राज करते थे। अब वक्त बदला है। बीसीसीआई में धोनी के खास श्रीनिवासन नहीं रहे, बढ़ती उम्र की वजह से चमत्कारिक बैटिंग करना आसान नहीं रहा और अब जवानी विराट कोहली के पास है। धोनी अब भी लोकप्रिय हैं लेकिन लोग भविष्य अब विराट कोहली में देखते हैं। धोनी ने अपने प्रताप के दिनों में किसी को नहीं बख्शा। युवा खिलाडिय़ों का गुट बनाया। एक जमाने में आरपी सिंह और आजकल रवीन्द्र जडेजा उसी ग्रुप के लोग हैं।टीम इंडिया को चेन्न्ई सुपरकिंग की टीम बना दिया।।इंग्लैंड दौरे पर वीरेन्द्र सहवाग से विवाद की खबर आई तो धीरे धीरे दिल्ली के सभी दिलेर टीम से बाहर होते गए। वक्त का खेल देखिए आज उसी दिल्ली के विराट कोहली धोनी युग का अंत करने पर तुले हैं। असल में धोनी और विराट की कहानी भारतीय क्रिकेट की वो कहानी है जिसमें वक्त के साथ सिर्फ नाम बदलते हैं किरदार नहीं बदलते।

1:-  सुनील गावस्कर बनाम कपिल देव
मो अजहरुद्दीन को एक कप्तान के रूप में सफल बनाने वाले खिलाड़ी का नाम सचिन तेंदुलकर है। ये वो दौर था जब टीम इंडिया सचिन के बल पर ही जीतती थी और सचिन के आउट होते ही लोग टीवी बंद कर देते थे। सचिन और अजहर के बीच बात तब बिगड़ी जब टीम इंडिया की लगातार हार और अजहर की खराब कप्तानी और बल्लेबाजी के कारण सचिन तेंदुलकर को कप्तान बना दिया गया और अजहर को टीम से बाहर कर दिया गया। अजहर ने बल्लेबाज के तौर पर फिर वापसी की और शानदार प्रदर्शन कर पहले तो टीम में जगह पक्की की लेकिन उसके बाद शुरू हुआ असली खेल।अजहर रन बनाते थे लेकिन टीम हारती थी...मैच फिक्सिंग की जांच के लिए बने आयोग के सामने सचिन तेंदुलकर ने खुद माना था कि उनकी कप्तानी में अजहर अंडरपरफार्म करते थे लेकिन वो क्यों ऐसा करते थे नहीं पता। चयनसमिति की राजनीति का फायदा उठाकर अजहर फिर कप्तान बने और उसके बाद शुरू हुआ वो दौर जो अजहरूद्दीन पर दाग है। अजहर और सचिन के सम्बंध फिर कभी सामान्य नहीं हुए। दरार की शुरुआत कप्तानी से ही हुई थी।

3:- सचिन बनाम सौरव-द्रविड़
गावस्कर ने मुंबई का गुट बनाया, सौरव गांगुली ने नए खिलाडिय़ों का गुट बनाया और धोनी ने चेन्न्ई सुपरकिंग्स गुट बनाया। कपिल उत्तर क्षेत्र के खिलाडिय़ों को चुनवाते थे और सचिन समीर दीघे जैसों के समर्थक बन जाते थे। अजहर तो अलग किस्म का ही गुट चलाते थे। फिर हर कप्तान के सामने आया एक युवा सितारा। गावस्कर के सामने कपिल, अजहर के सामने सचिन और सौरव-द्रविड़ के बाद धोनी। अब धोनी के सामने विराट कोहली है।बदला कुछ नहीं है माही।।बड़े से बड़े कप्तान के साथ यही हुआ है। तुम्हारे साथ भी यही होना था।

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राहुल द्रविड़ के स्वेच्छा से कप्तानी छोडऩे के बाद सचिन की सलाह पर महेन्द्र सिंह धोनी को टी -20 विश्व कप के लिए कप्प्तान बनाया गया था। धोनी ने युवा खिलाडिय़ों के बल पर ऐसा इतिहास रचा कि वो आगे बढ़ते ही चले गए। इंसटिंग्टिव कप्तानी, साहस, लीडिंग फ्रॉम द फ्रंट ये सब धोनी की पहचान बन गए। धोनी को धीरे धीरे सीनियर खिलाड़ी अखरने लगे। एक एक करके लक्ष्मण, गांगुली और द्रविड़ ने संन्यास लेकर इज्जत बचाई। भारतीय क्रिकेट में कप्तानी विवाद की कहानी अब एक नए मोड़ पर पहुंची है। टेस्ट में कप्तान बनने के बाद अब विराट कोहली वन डे की कप्तानी के भी दावेदार हैं।उम्र अब उनके साथ है। वक्त कोहली का है। भारतीय कप्तानी का इतिहास बताता है कि जो आज धोनी के साथ हो रहा है वही हर कप्तान के साथ हुआ है। धोनी ने जो किया वही हर कप्तान ने किया भी था। बोर्ड में सबके अपने अपने खंभे थे। गावस्कर के पास राजसिंह डूंगरपुर, गांगुली के पास डालमिया और धोनी के पास श्रीनिवासन। कप्तानों की गुटबाजी Posted By: Abhishek Kumar Tiwari