मानसिक बीमारियों के बारे में समाज हो जागरूक तो बनेगी बात

2018-10-16T11:30:29Z

बदलते सामाजिक ढांचे के कारण आम नागरिक अवसाद और अन्य मानसिक बीमारियों के शिकार बन रहे हैं। इस स्थिति में सबसे ज्यादा जरूरी मानसिक बीमारियों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने और सोच में बदलाव लाने की है। मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्ति को इलाज के साथसाथ लोगों के अच्छे व्यवहार की भी जरूरत होती है।

नई दिल्ली। ऐसा माना जाता है कि मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के प्रति लोग सहानुभूति रखते हैं, लेकिन द लिव लव लॉफ फाउंडेशन (टीएलएलएलएफ) द्वारा हाल में किए गए सर्वे से पता चलता है कि 14 फीसदी लोग मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के प्रति डर की भावना रखते हैं। सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि 28 फीसदी लोग पीड़ित व्यक्ति के प्रति नफरत का भाव रखते हैं और 42 फीसदी लोग कभी-कभी या हमेशा क्रोध महसूस करते हैं।
अवसाद वाले लोगों की देखभाल कर सकें
दूसरी ओर जागरूकता और पेशेवर सहायता की कमी के कारण, भारत में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित सिर्फ 10 से 12 फीसदी लोग ही मदद हासिल कर पाते हैं। द लिव लव लॉफ फाउंडेशन ने अक्टूबर महीने के पहले हफ्ते में पूरे देश में राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया, जिसका उद्देश्य अवसाद से जुड़ी भ्रांतियों पर जागरूकता फैलाना था। इस अभियान का एक और उद्देश्य लोगों के पूर्वाग्रहों पर सवाल उठाना है, ताकि वे अवसाद वाले लोगों की देखभाल कर सकें।
पीड़ित की देखभाल को लेकर माहौल
फाउंडेशन की कोशिश है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर विमर्श हो और पीड़ित की देखभाल को लेकर माहौल बने। संस्था उन लोगों को प्रोत्साहित भी करती है, जो अवसाद और अन्य मानसिक बीमारियों के प्रति लोगों की सोच में बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं।

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