दुनिया में अन्‍य देशों में पोर्न वेबसाइट को भले ही अनुमति मिली हो लेकिन भारत में अब इस पर पूरी तरह से रोक लग चुकी है। सरकार ने 857 अश्लील पोर्न वेबसाइटों को ब्लॉक करने का आदेश दिया है। इसके बाद सोशल मीडिया में सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस शुरू हो गई है। एक अधिकारी ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को 857 अश्लील वेबसाइटों को हटाने का आदेश दिया है।

लेकिन ऐसे देखा जा सकेगा
भारत सरकार द्वारा पोर्न वेबसाइट को ब्लॉक करने प्राइवेट और राज्य स्तरीय इंटरनेट प्रोवाइडर पर काफी असर पड़ने वाला है। MTNL Mumbai, BSNL, Vodafone और ACL जैसी कई इंटरनेट प्रदाता कंपनियां अब इस तरह का एडल्ट और पोर्न कंटेंट नहीं उपलब्ध करा पाएंगी। वैसे यह पाबंदी बच्चों के मद्देनजर लगाई गई है। अगर कोई वयस्क चाहे तो वह यह वेबसाइट एक्सेस कर सकता है। यूजर्स VPN प्रोवाइडर और प्रॉक्सी के जरिए इन वेबसाइट को खोल सकेंगे। यह सर्विस पीसी, मैक, लैपटॉप और सभी आईओएस डिवाइस के लिए उपलब्ध है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

लेकिन, सरकार के इस आदेश को लेकर सोशल मीडिया में छिड़ी बहस में कई टिप्पणीकारों ने इसे सेंसरशिप तथा अभिव्यक्ति की आजादी में कटौती करार दिया है। अधिकारी ने आदेश का औचित्य बताते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रही है। कोर्ट ने पॉर्न खासकर बच्चों के पॉर्न वेबसाइटों को ब्लॉक करने के लिए कदम उठाने को कहा था। हालांकि उन्होंने कहा कि यह एक अस्थायी उपाय है, जो इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतिम फैसला सुनाए जाने तक के लिए है। उल्लेखनीय है कि 8 जुलाई को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया था कि ऐसे वेबसाइटों को ब्लॉक करने के हरसंभव उपाय किए जाएंगे।
क्या आएगा फैसला!
इससे पहले प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई थी कि इस मामले में बातें आगे नहीं बढ़ रही हैं, जबकि याचिककर्ता ने सारी दलीलें दे रहे हैं। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा तथा अमिताव राय की सदस्यता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद से कहा था- 'आपने वेबसाइटों को ब्लॉक नहीं किया है। याचिकाकर्ता बहुत सारी बातें कह रहे हैं।'

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Posted By: Abhishek Kumar Tiwari