राजधानी है साहबमिनटों का सफर घंटों में

2019-09-20T06:01:12Z

RANCHI:यह राजधानी है साहबयहां कुछ किलोमीटर का सफर जो मिनटों में पूरा किया जा सकता है उसके लिए घंटों लग जा रहे हैं। शहर के लोग ट्रैफिक जाम की समस्या से हर रोज परेशान हैं। शहर की ऐसी कोई सड़क नहीं है जिस पर आए दिन जाम की स्थिति देखने को नहीं मिले। यहां एक किमी की दूरी तय करने में घंटों समय लग जाता है। नगर विकास विभाग हो या ट्रैफिक पुलिस सभी हर दिन ट्रैफिक कंट्रोल के लिए नये-नये प्लान बनाते हैं। यहां के हरमू रोड, रातू रोड जैसी सड़कों के कट्स बंद करा दिये गए। फिर बाद में उसे खोल भी दिया गया। इन सबके बावजूद लोगों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति नहीं मिल सकी। सड़क जाम से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी ओर हर दिन सड़कें छोटी होती जा रही हैं। इतने सारे नियम बनाने के बावजूद भी लोगों को जाम से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। सही मायने में देखा जाए तो कोई भी उपाय कारगर साबित नहीं हो पा रहा है।

क्या था प्लान

राजधानी में रिमोट से ट्रैफिक सिग्नल कंट्रोल करने का प्लान है। सुजाता चौक, एजी मोड़ व करमटोली चौक स्थित ट्रैफिक सिग्नल को रिमोट से कंट्रोल करने की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है जल्द ही निगम क्षेत्र में लगाए गए सभी ट्रैफिक सिग्नलों को रिमोट कंट्रोल से कंट्रोल किया जाएगा। इस नई व्यवस्था में ट्रैफिक पुलिस अपनी सहूलियत के हिसाब से रेड, ग्रीन व येलो लाइट को परिवर्तित कर सकती है, लेकिन इसके बावजूद शहर की ट्रैफिक बुरी तरह जाम से हलकान है।

रिमोट कंट्रोल में हैं तीन बटन

ट्रैफिक पोस्ट प्रभारियों को उपलब्ध कराए गए रिमोट कंट्रोल में तीन बटन (रेड, येलो व ग्रीन) उपलब्ध हैं। ट्रैफिक पुलिस को जब भी इस्तेमाल करना होगा तुरंत बस बटन दबाना होगा। लेकिन गुरुवार को ये सारे बटन फेल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि 3 मिनट के रेड सिग्नल के बाद महज 40 सेकेन्ड के लिए ग्रीन सिग्नल हो रहा था, जिसके कारण वाहनों की लंबी कतार लग गयी।

मोबाइल ऐप पर ट्रैफिक जाम की जानकारी

राजधानी में जाम की स्थिति से निपटने के लिए ट्रैफिक पुलिस मोबाइल ऐप तैयार कर रही है। इसे गूगल के जरिए जीआइएस (जियोग्राफिकल इंफॉरमेशन सिस्टम) व ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट से जोड़ने की तैयारी है। मोबाइल ऐप के माध्यम से ट्रैफिक जाम की स्थिति का पूरा ब्यौरा कंट्रोल रूम में बैठे पदाधिकारियों को मिलेगी। मोबाइल ऐप पर आम आदमी भी जाम की स्थिति को देख सकेंगे। ऐप के माध्यम से यह भी पता चलेगा कि किस चौक पर कितनी भीड़ है। कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी भीड़-भाड़ वाले इलाकों की जानकारी लेकर मोबाइल ऐप पर शेयर करेंगे।

फेल हुए तमाम प्रयास

शहर में लगभग हर चौक चौराहे में सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं। दावा किया गया था कि इससे सड़क जाम की स्थिति की मॉनिटरिंग की जायेगी। जहां भी ट्रैफिक की समस्या होगी वहां सहायता के लिए पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचेगी और जाम से निजात दिलाएगी। लेकिन, यह भी उपाय कारगर साबित नहीं हुआ।

वाहन चेकिंग से भी जाम

शहर के हर चौक-चौराहे पर चेकिंग अभियान चलता रहता है। कभी दोपहिया वाहनों की हेलमेट चेकिंग तो कभी चारपहिया वाहनों से काली फिल्म हटाई जाती है। इस वजह से भी यहां की सड़कों पर जाम लग रहे हैं। चेकिंग के लिए ट्रैफिक पुलिस के पास अतिरिक्त पुलिस बल नहीं है, जिसके कारण जो जवान ट्रैफिक संभालने में लगे रहते हैं, उन्हीं से जांच का भी काम लिया जा रहा है। वाहनों की धर-पकड़ करने के चक्कर में सड़कों पर वाहनों की कतार लग जाती है।

शहर के कई ट्रैफिक सिग्नल खराब

शहर में ट्रैफिक सिग्नल लगाने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च किए। लेकिन, इसके बावजूद भी सारी सिग्नल लाइट खराब है। ट्रैफिक लाइट्स रहने के बाद भी ट्रैफिक पुलिस की सहायता के ट्रैफिक कंट्रोल किया जाता है। पोस्ट पर खड़े जवानों को हाथ से ही ट्रैफिक कंट्रोल करना पड़ता है। वरीय अधिकारियों को यह जानकारी होने के बाद भी इन्हें वाहन चेकिंग में लगा दिया जाता है। इसकी वजह से भी सड़कों पर जाम लग जाता है।


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