बनारसी संगीत को मिलेगी अपनी पहचान

2015-12-14T07:41:12Z

-यूनेस्को की क्रियेटिव सिटी नेटवर्क में बनारस का संगीत हुआ शामिल

-इस उपलब्धि से सिटी के कलाकारों को पूरे विश्व में परफॉर्म करने का मिलेगा मौका

VARANASI

वक्त और तेज रफ्तार संगीत ने काशी की पहचान बनारस घराने और यहां के सांस्कृतिक संगीत की पहचान धूमिल कर दी है। लेकिन यूनेस्को की क्रियेटिव नेटवर्क में बनारस के संगीत को शामिल किये जाने के बाद यहां का संगीत अब अपनी पहचान देश के साथ पूरी दुनिया में वापस पा सकेगा।

ये बातें रविवार को मेयर राम गोपाल मोहले ने नगर निगम में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताई। कहा कि यूनेस्को ने क्रियेटिव सिटी नेटवर्क में बनारस के संगीत को शामिल किया है। जो बनारस के लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है। इसके साथ ही बनारस में जापान की मदद से कल्चरल कम कन्वेंशन सेंटर की भी सौगात मिलने वाली है। इस दौरान शास्त्रीय संगीत गायिका सोमा घोष और कथक डांसर विशाल कृष्णा भी मौजूद रहीं।

भेजा गया था प्रस्ताव

म्यूजिक के लिए बनारस को क्रियेटिव सिटी नेटवर्क में शामिल करने के लिए एक साल पहले दिसंबर ख्0क्ब् में यूनेस्को को भेजा गया था। इसके लिए एडवाइजरी बॉडी फॉर इन्टेंजिवुल हेरिटेज, संगीत नाटक एकेडमी की मेम्बर सेक्रेटरी ऊषा राधाकृष्णन और राजकुमार अग्रवाल ने प्रयास किया था। इस उपलब्धि से संगीत घराने की परम्परा को नया आयाम मिलेगा और साथ ही पहचान पुख्ता होगी।

जारी रहेगी गुरु-शिष्य परंपरा

बनारस की विरासत है यहां के घरानों से चली आ रही संगीत परंपरा। इसे गुरु-शिष्य परंपरा के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। शास्त्रीय संगीत और भक्ति संगीत के संरक्षण के उद्देश्य के साथ ही इसे आगे बढ़ाया जाएगा। ताकि यह संगीत अपनी ऐतिहासिकता को न खोये। पारम्परिक त्यौहार व पर्व के साथ भी प्राचीन काल से संगीत जुड़ा हुआ है जिसे बरकरार रखा जाएगा। इसमें गुलाबबारी, बुढ़वा मंगल और रामनगर की रामलीला शामिल है।

इस उपलब्धि से बनारस के संगीत और गुमनाम हो रहे कलाकारों को विश्व में प्रस्तुति करने का मौका मिलेगा।


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