अक्सर आपने पढ़ा होगा।मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है पंख से कुछ होता हौसलों से उड़ान होती है।असल में ये लाइन सुनी और बोली तो खूब जाती हैं लेकिन इसको आत्मसात करने वाले कभी कभार ही मिलते हैं। जो ऐसा करते हैं वो समाज में मिसाल कायम कर जाते हैं।


आई स्पेशललगन के बूते ये सफलता के पायदान चढ़ती गईंpankaj.awasthi@inext.co.inLUCKNOW। कुछ ऐसी ही दास्तां बाल गृह में पलने और पढऩे वाली 19 बच्चियों की है। बचपन से ही जिनके सिर पर न मां-बाप का साया उठ गया और रिश्तेदारों ने भी इनसे मुंह फेर लिया। इसके बावजूद कड़ी मेहनत और लगन के बूते ये सफलता के पायदान चढ़ती गईं। इंटरमीडिएट के बाद प्रदेश सरकार की पहल 'उड़ान' के तहत इन्होंने बेंगलुरु के नामचीन इंस्टीट्यूट से न सिर्फ होटल मैनेजमेंट एंड हॉस्पिटेलिटी में कोर्स किया, बल्कि इस समय नामचीन होटल्स में इंटर्नशिप कर रही हैं। गौर करने वाली बात ये कि होटल मैनेजमेंट एंड हॉस्पिटेलिटी का कोर्स कर रही इन 19 बच्चियों को प्रतिष्ठित होटल्स में प्लेसमेंट भी मिल चुका है। अभाव और अकेलेपन से भरे जीवन के बाद आखिरकार इन बच्चियों के दरवाजे पर सुनहरा भविष्य दस्तक दे चुका है।
वह मुझे बाल गृह में छोड़ गई


मेरे पैदा होने के दौरान मेरी मम्मी की मौत हो गई, कुछ दिनों बाद पापा भी नहीं रहे। मेरे रिश्तेदार मुझे यह कहकर लखनऊ लाए कि मुझे अच्छी एजुकेशन देंगे। लेकिन, यहां मुझे काम वाली बाई के साथ लगा दिया। बाई से मेरी हालत नहीं देखी गई और वह मुझे बाल गृह में छोड़ गई।- ज्योति (24 वर्ष) इंटरमीडिएट फस्र्ट डिवीजन से पास कियामैं पांच साल की उम्र में खो गई थी इसके बाद कई घरों में लोगों ने नौकरानी की तरह काम कराया। 10 साल की उम्र में मैं बाल गृह लाई गई। जिसके बाद मेरा स्कूल में एडमिशन हुआ। मैने कड़ी मेहनत और लगन से पढ़ाई की और इंटरमीडिएट फस्र्ट डिवीजन से पास किया। - शमशेरा (24 वर्ष) रानी लक्ष्मीबाई महिला कोष से जमा हुई फीस

उत्तर प्रदेश महिला एवं बाल कल्याण विभाग की निदेशक अलका टंडन भटनागर के मुताबिक, राजकीय बाल गृह में रह रही निराश्रित बच्चियों के अध्ययन व पुनर्वासन के लिये प्रदेश सरकार ने 'उड़ान' योजना शुरू की थी। इसी के तहत जुलाई 2017 में राजधानी के मोतीनगर स्थित राजकीय बाल गृह (बालिका) में रह रही 16 बच्चियों, कानपुर स्थित राजकीय बाल गृह (बालिका) में रह रही एक बच्ची और बलिया स्थित राजकीय बाल गृह (बालिका) की दो बच्चियों को होटल मैनेजमेंट एंड हॉस्पिटेलिटी कोर्स के लिये चयनित किया गया। सराहनीय बात यह है कि इन बच्चियों को बेहतरीन कोर्स कराने के लिये बेंगलुरु के ईको इंस्टीट्यूट का चयन किया गया। उन्होंने बताया कि कोर्स के लिये प्रति छात्रा 94,100 रुपये फीस थी, जिसे उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मी बाई महिला एंव बाल सम्मान कोष से जमा किया गया।बेहतरीन प्लेसमेंट से उत्साहितनिदेशक अलका टंडन भटनागर ने बताया कि इन सभी 19 बच्चियों का 9 महीने का कोर्स पूरा हो चुका है और अब वे प्रतिष्ठित होटल्स में इंटर्नशिप कर रही हैं। खुशी की बात है कि इनमें से पांच को ताज ग्रुप ऑफ होटल्स में जबकि, बाकी अन्य को दूसरे प्रतिष्ठित होटल्स में प्लेसमेंट मिल गया है। उन्होंने बताया कि इस बेहतरीन रिस्पॉन्स से वे बेहद उत्साहित हैं और अब महिला एवं बाल कल्याण विभाग बाल गृहों में रहने वाले इंटर पास बच्चों के दूसरे बैच को भी इसी तरह प्रोफेशनल कोर्सेज की ट्रेनिंग दिलाने की तैयारी कर रहा है। कौन हैं ये बच्चियां?
राजकीय बाल गृह (बालिका), मोतीनगर की प्रबंधक रीता टम्टा ने बताया कि बाल गृह में कुछ बच्चियां ऐसी हैं जिनके माता-पिता उनकी परवरिश करने के काबिल नहीं थे इसलिए उन्हें खुद यहां छोड़ गए। कुछ बच्चियों के माता-पिता जीवित नहीं हैं जबकि, कुछ बच्चियां ऐसी भी हैं जिनके माता-पिता आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। रीता के मुताबिक, उनकी कोशिश होती है कि बाल गृह में रहने वाली बच्चियों को इतनी अच्छी परवरिश दी जाए ताकि, उन्हें माता-पिता की कमी का अहसास न हो। साथ ही सरकार की योजना 'उड़ान' के जरिए उनके सुखद व सुरक्षित भविष्य के लिये उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के लिये प्रोफेशनल कोर्स कराए जाएं। कोर्स करने की वाली छात्राएंखुशी, सपना, ज्योति श्रीवास्तव, करिश्मा, रजनी, गुडिय़ा, ऊषा, आस्मीन, संगीता, रिमझिम, सोनी यादव, वीना, कास्मिन, रिशु पाल, निशा, शमशेरा, आरती, प्रियंक और चांदनी तिवारीबच्चों को ट्रेनिंग के लिये भेजा जाएगाबच्चियों के बेहतरीन प्लेसमेंट से उनके सुखद भविष्य की आस जगी है। इनका कोर्स पूरा होते ही 20 अन्य बच्चों को ट्रेनिंग के लिये भेजा जाएगा। - अलका टंडन भटनागर निदेशक, उत्तर प्रदेश महिला एवं बाल कल्याण विभाग

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Posted By: Shweta Mishra