यूपी एसटीएफ ने पकड़े दो जालसाज जानें कैसे ये आपके तत्काल रेल टिकट में सेंध लगाकर करते थे कमाई

2018-05-08T11:43:05Z

रेलवे के तत्काल टिकट रिजर्वेशन बुकिंग खुलने के कुछ सेकेंड बाद ही सभी टिकट बुक होने से आप भी कई बार हैरान हुए होंगे। लेकिन आपको जानकर हैरत होगी कि यह टिकट असल पैसेंजर नहीं बल्कि जालसाजों द्वारा तैयार सॉफ्टवेयर की बदौलत मुमकिन होता है। यूपी एसटीएफ ने ऐसे ही दो जालसाजों को दबोच लिया जो तत्काल रिजर्वेशन बुकिंग में सेंध लगाने वाला सॉफ्टवेयर बेचते थे।

आईआरसीटीसी ने की थी शिकायत
lucknow@inext.co.in  
लखनऊ।
यूपी एसटीएफ टीम ने उनके कब्जे से दो लैपटॉप, पांच मोबाइल फोन और नकदी बरामद की है। अब सॉफ्टवेयर के डेवलपर और खरीददार का तलाश हो रही है। फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाले एएसपी एसटीएफ डॉ. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, आईआरसीटीसी की एंटी फ्रॉड सेल के असिस्टेंट मैनेजर राकेश मिश्रा ने एसटीएफ के साइबर थाना में शिकायत की थी कि कुछ जालसाज आईआरसीटीसी की वेबसाइट में किसी सॉफ्टवेयर की मदद से सेंध लगाकर तत्काल टिकट बुकिंग खुलते ही टिकट बुक कर मोटी रकम कमा रहे हैं। टीम ने जालसाजों का सुराग लगाने के लिये इंटेलिजेंस नेटवर्क को एक्टिव किया। सोमवार को टीम को सूचना मिली कि इस फर्जीवाड़े से जुड़े जालसाज चारबाग एरिया में हैं। एसटीएफ टीम ने चारबाग में छापेमारी कर दो जालसाजों प्रतापगढ़ निवासी सुरेश कुमार मौर्या और जौनपुर निवासी राकेश कुमार गुप्ता को दबोच लिया।
पहचान छिपाने को आईपी स्पूफिंग
आरोपियों ने बताया कि सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को वे नहीं जानते बल्कि, उनसे सोशल मीडिया के जरिए जुड़े हुए हैं। वे छोटे-छोटे दुकानदारों को तलाशते और उनसे भी वाट्सएप, फेसबुक और हैंगआउट के जरिए या फिर नेट कॉलिंग के जरिए संपर्क कर तत्काल टिकट में सेंध लगाने वाले सॉफ्टवेयर के बारे में बताते थे। दुकानदार जब सॉफ्टवेयर खरीदने को राजी हो जाता तो वे डेवलपर से ऑनलाइन सॉफ्टवेयर मंगा लेते और दुकानदार को आईपी स्पूफिंक और प्रॉक्सी बाउंसिंग कर सॉफ्टवेयर बेचते थे। यह करने से वे दुकानदार और पुलिस की नजर में आने से बचे रहते थे। सुरेश ने बताया कि वे लोग दुकानदार को यह सॉफ्टवेयर एक हजार रुपये में बेचते थे।
 
पेमेंट ई-वॉलेट से  
डॉ। त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, गिरफ्त में आए आरोपियों ने बताया कि वे तत्काल रिजर्वेशन सिस्टम में सेंध लगाने के लिये ब्लैक टीएस, रेड मिर्ची, चाइना, क्लाउड, काउंटर, एचपी, स्पार्क, क्राउन और हिट पीएनआर नाम के सॉफ्टवेयर बेचते थे। इन सॉफ्टवेयर के लिये दुकानदार से वे लोग एक हजार रुपये कीमत वसूलते थे। यह पेमेंट भी दुकानदार से ई-वॉलेट के जरिए लिया जाता था। आरोपी अब तक 8 हजार से ज्यादा दुकानदारों को यह सॉफ्टवेयर बेच चुके हैं।
 
2000 तक वसूलते थे एक्स्ट्रा
आरोपियों सुरेश और राकेश ने बताया कि तत्काल टिकट बुक करने वाले दुकानदार प्रति पैसेंजर कंफर्म टिकट देने के एवज में 500 से दो हजार रुपये तक वसूलते हैं। वहीं, टिकट विंडो में खड़े होकर टिकट बनवाने वाले पैसेंजर्स को खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है।
 
डेवलपर और खरीदार राडार पर
आरोपियों की अरेस्टिंग के बाद अब एसटीएफ इन सॉफ्टवेयर के डेवलपर और आरोपियों से यह सॉफ्टवेयर खरीदने वाले जालसाजों की तलाश में जुट गई है। एएसपी सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच के बाद कई डेवलपर के सुराग हाथ लगे हैं, जिन्हें जल्द अरेस्ट किया जाएगा।
क्या कहते हैं अफसर
तत्काल रिजर्वेशन सिस्टम में सेंध लगाने के लिये ब्लैक टीएस, रेड मिर्ची, चाइना, क्लाउड, काउंटर, एचपी, स्पार्क, क्राउन और हिट पीएनआर नाम के सॉफ्टवेयर बेचते थे। इन सॉफ्टवेयर के लिये दुकानदार से वे लोग एक हजार रुपये कीमत वसूलते थे।
-डॉ. त्रिवेणी सिंह, एसपी, एसटीएफ

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