एक झपकी इंसान का सुकून देती है तो वहीं जान भी लेती है. यमुना एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटना का कारण ओवर स्पीड नहीं झपकी है. दस साल में 488 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 3873 लोग घायल हुए हैं. करीब सात हजार से अधिक हादसे हुए हैं

आगरा(ब्यूरो)। ये खुलासा आरटीआई मेें हुआ है। इसमें अधिकतर जानें नींद की झपकी से गई हैं, वहीं वाहन चलाने में लापरवाही भी एक कारण सामने आया है।

एक पल की झपकी से मौत
अभी तक यमुना एक्सप्रेसवे पर होने वाले सड़क हादसों का प्रमुख कारण ओवरस्पीडिंग समझा जाता था लेकिन हाल ही में 13 अप्रैल को जो यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (येड़ा) ने सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत जो खुलासा हुआ है, उसमें कुछ और ही बात निकलकर सामने आई है। सड़क हादसों का मुख्य कारण ओवरस्पीडिंग नहीं बल्कि वाहन चालकों को नींद या झपकी आ जाना है। इसमें चालक की एक पल की नींद की झपकी से मौत हो जाती है।

44.2 फीसदी झपकी, 17.94 फीसदी स्पीड से हादसेे
सूचना का अधिकार के अंतर्गत हादसों कारण पूछा गया था, इसमें वर्ष 2012 से अब तक वर्ष 2023 के बीच यमुना एक्सप्रेसवे पर जो हादसे हुए हैं, इसमें से 44.2 फीसदी हादसे वाहन चालक को झपकी आ जाने से हुए थे, जबकि हादसों का दूसरा मुख्य कारण ओवर स्पीडिंग था लेकिन उसकी वजह से 17.94 फीसदी ही हादसे हुए थे। यह सूचना वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन को सूचना अधिकार के अन्तर्गत दी गयी है।

चालक है मशीन नहीं, रखें ध्यान
इस सूचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अधिवक्ता जैन ने कहा कि येड़ा द्वारा उपलब्ध कराए गए, आंकड़े चौंकाने वाले हैं। वाहन स्वामियों को इस बात का ध्यान रखना है कि वाहन के ड्राइवर को नींद तो नहीं आ रही है, एक साथ वह कितने घण्टे ड्राइविंग कर चुका है, क्या यात्रा के दौरान ड्राइवर को राहत देने के लिए ब्रेक लिया है या नहीं। गंतव्य पहुंचने की जल्दी में लंबी दूरियां एक साथ तय न करें और ड्राइवर को मशीन न समझें। आपकी जान उसके हाथ में है। इसलिए उसे भी उचित घंटे सोने दें। अधिक थकान से भी झपकी आने का डर होता है। ब्रेक के दौरान चाय कॉफी को जरूर पिलायें और बाहरी खाने से भी परहेज करें। अधिवक्ता ने केन्द्र सरकार से एडवाइजरी जारी करने की मांग की है।

लापरवाही से वाहन चलाने का नहीं रिकॉर्ड
येडा ने 11 अप्रैल को उपलब्ध कराई गई, दूसरी सूचना में बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे पर 20 स्थानों पर इलैक्ट्रोनिक निगरानी के लिए कैमरे लगे हैं। कैमरों से प्राप्त हुए समस्त डाटा को ट्रैफिक पुलिस के लिए नेशनल इनफोरमेटिक सेन्टर (एनआईसी) के सर्वर को भेजा जाता है और येड़ा के पास लापरवाही से वाहन चलाने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इलैक्ट्रोनिक निगरानी व्यवस्था को एनआईसी के साथ अप्रैल 2018 से जोड़ दिया गया है ताकि चालान ऑटोमेटिक हो सके।


-यमुना एक्सप्रेसवे पर वर्ष 2012 से अब तक हादसे
7256
-यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों की संख्या
3873
-इस दौरान हुए अलग-अलग हादसों में मौत
1242
-जिसमें से नींद की झपकी आने से मौत
488
-ओवर स्पीड से मौत के आंकड़े
197

थके हैं तो गाड़ी न चलाएं
-यात्रा की योजना ऐसे बनाएं कि हर दो घंटे पर 15 मिनट का एक ठहराव मिले।
-अगर आप थके हुए हैं तो लंबी दूरी की यात्रा की योजना न बनाएं।
-अगर आपको एक लंबी यात्रा के लिए असामान्य रूप से जल्दी उठना पड़े तो इसके ख़तरों को याद करें।
-आधी रात से सुबह छह बजे तक लंबी यात्रा से बचें, इस दौरान आपको नींद आ सकती है।
-अगर आपको नींद आने लगे तो किसी सुरक्षित जगह पर रुकिए। दो कप कॉफी पीजिए और 10-15 मिनट तक आराम कीजिए ताकि कैफ़ीन को अपना काम करने का मौका मिल जाए।
-याद रखिए, नींद आने का असली इलाज अच्छी तरह सोना ही है। कैफ़ीनयुक्त पेय और एक झपकी आपको सिफऱ् थोड़ी देर के लिए यात्रा करने के काबिल बना सकता है।

आरटीआई में खुलासा हुआ है कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटना का कारण ओवरस्पीड नहीं नींद की झपकी है। केन्द्र सरकार से इसे गंभीरता से लेते हुए एडवाइजरी जारी करने चाहिए।
केसी जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता

Posted By: Inextlive