नेशनल हाइवे 19 पर रोजाना करीब 30 हजार हैवी वेहिकल आगरा से होकर गुजर रहे हैं. शहर के बीच से गुजर रहे इस हाइवे पर हैवी वेहिकल के बीच लोकल ट्रैफिक भी ट्रैवल कर रहा है. शनिवार को हुए हृदयविदारक हादसे की वजह भी हैवी वेहिकल का शहर के बीच से गुजरना है. जान हथेली पर रखकर शहरवासी हाइवे से गुजरने को मजबूर हैं.


आगरा(ब्यूरो)। वहीं, हाइवे से हैवी ट्रैफिक के लोड को कम करने के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट अधर में हैं। जबकि, होना यह चाहिए कि उत्तरी बाईपास और इनर रिंग रोड के तीसरे फेस (डायमंड सर्कल) का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए, दोनों प्रोजेक्ट को 'क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर' घोषित किया जाए और जेवर एयरपोर्ट की तरह निर्धारित समय से पहले कार्य को पूरा किया जाए।

गुजर रहे 30 हजार हैवी वेहिकल
आगरा सीमा में शहर के बीच से गुजर रहे नेशनल हाइवे 19 पर मौजूदा समय में रोजाना लगभग 30 हजार हैवी वेहिकल गुजर रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में स्थित ऑटो मोबाइल्स कंपनियों समेत अन्य उत्पादों को यहां से देश के पूर्वी राज्यों में भेजा जाता है। खास प्रयोजन के अलावा इस हाइवे पर हैवी वेहिकल्स के आवागमन पर न तो कोई रोकटोक है और न ही कोई नो एंट्री प्रभावी है। आगरा के गुरुद्वारा गुरु का ताल क्रॉसिंग और सिकंदरा क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर के न बनने से स्थिति बद से बदतर हो रही है। यहां बेतरतीब और ओवर स्पीड दौड़ रहे ट्रक और ट्राला आए दिन हो रहे हादसों की वजह बन रहे हैं। दिल्ली एनसीआर से पूर्वी राज्यों की ओर जाने और पूर्वी राज्यों से आने वाले इन हैवी वेहिकल्स को आगरा सीमा में प्रवेश से रोककर शहर में ट्रैफिक की स्थिति को सामान्य किया जा रहा है। इसको लेकर समय-समय पर प्रोजेक्ट बनते रहे हैं। किंतु हर स्तर पर इच्छा शक्ति की कमी से योजनाएं पूरी नहीं की जा सकी हैं।


अधर में क्यों उत्तरी बाईपास?
एनएचएआई ने छह लेन के आगरा बाईपास को उत्तरी बाईपास रूप में यमुना एक्सप्रेसवे से सीधे जोडऩे की योजना को मंजूरी तो दी है किंतु इस पर अभी निर्माण कार्य आरंभ नहीं हो सका है। 17 किलोमीटर के उत्तरी बाईपास को यमुना एक्सप्रेस-वे पर कुबेरपुर से जोड़ा जाना है। एनएचएआई की ओर से उत्तरी बाईपास के लिए 483 करोड़ रुपए की लागत भी तय कर ली गई है। बता दें कि उत्तरी बाईपास का प्रस्ताव आठ साल से लंबित है। एक बार डीपीआर भी बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन इसमें मथुरा के कई गांवों की भूमि अधिग्रहीत की जानी थी। इस डीपीआर को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। मौजूदा प्रस्ताव के तहत यह बाईपास रैपुरा जाट के निकलकर मिडावली के समीप एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा। इस प्रोजेक्ट को 'क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर' की श्रेणी में रखकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य का पूरा कराया जाए, जिससे शहर सीमा में एनएच 19 पर हैवी वेहिकल को आने से रोका जा सके।


कब पूरा होगा इनर रिंग रोड का तीसरा चरण?
आगरा में पांच साल से अधूरे पड़ा इनर रिंग रोड के डायमंड सॢकल भी पूरा नहीं हो पा रहा है। 21 किमी के इस सर्किल के पूरा होने से शहर सीमा में एनएच 19 पर हैवी वेहिकल का लोड घट जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को तीसरे चरण में इनर रिंग रोड की 7.77 किमी। लंबी फोरलेन सड़क निर्माण की मंजूरी तो मिल गई है किंतु इसका निर्माण कार्य अधर में लटका है। देवरी रोड से ग्वालियर रोड तक प्रस्तावित इनर रिंग रोड की लागत करीब 350 करोड़ रुपए है। डायमंड सर्किल के पूरा होने से आगरा-दिल्ली हाईवे से कुबेरपुर होते हुए भारी वाहन ग्वालियर हाईवे, उत्तरी बाईपास से मिल जाएंगे। इस सड़क का निर्माण कार्य भी 'क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर' श्रेणी में शामिल कर जल्द से जल्द कराया जाए।


यमुना एक्सप्रेस-वे को ईस्टर्न पेरीफेरल कब जोड़ेंगे?
यमुना एक्सप्रेस-वे को ईस्टर्न पेरीफेरल से जोड़कर भी ट्रैफिक का लोड कम किया जा सकता है। फिलहाल ईस्टर्न पेरीफेरल के लिए यमुना एक्सप्रेस-वे से इंटरचेंज नहीं है, जिससे कि एक्सप्रेस-वे से गुजर रहे वाहनों को फरीदाबाद-गुरुग्राम जाने के लिए दिल्ली-एनसीआर से होकर गुजरना होगा। जबकि इंटरचेंज के बन जाने से पूर्वी राज्यों से आ रहा हैवी ट्रैफिक एनएच 19 और लखनऊ एक्सप्रेस-वे से शहर में घुसने के बजाय यमुना एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरीफेरल होता हुआ पलवल पर उतरेगा। हालांकि यह प्रयास के लिए आगरा सांसदों को केंद्र सरकार में पैरवी करनी होगी। इसके बाद ही सफलता मिल सकती है। इस दिशा में अभी तक कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं।


लोहामंडी को शिफ्ट करें
शहर के बीचोबीच लोहामंडी बाजार को शिफ्ट करने की आवश्यकता है। यहां रोजाना करीब 3 हजार ट्रकों को आवागमन है जो लोहा, सरिया, गार्डर आदि लेकर आते और जाते हैं। पीढिय़ों से यहां कारोबार कर रहे लोहा कारोबारियों को अब शहर के बाहर शिफ्ट करने की आवश्कयता है, जिससे शहर से गुजर रहे हैवी वेहिकल्स के लोड को कम किया जा सकता है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर की शिफ्टिंग की योजना पर भी तेजी से काम किया जाए। एनएच 19 से सटे ट्रांसपोर्ट नगर में दिनभर ट्रक्स का जमावड़ा रहता है। गुरु का ताल और सिकंदरा पर फ्लाईओवर-एलीवेटेड रोड के प्रोजेक्ट में आ रही रुकावटों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों को एकदूसरे से तालमेल बैठाकर इन प्रयासों पर अमल करना चाहिए।

उत्तरी बाईपास
- नेशनल हाईवे-19 स्थित रैपुरा जाट से मिडावली सादाबाद हाथरस तक बनेगा।
- 483 करोड़ रुपये की लागत आ रही है।
- बाईपास को यमुना एक्सप्रेस वे से जोड़ा जाएगा।
- इससे शहर से होकर गुजरने वाले वाहनों की संख्या में कमी आएगी।
- इस रोड की लंबाई 17 किमी है।

इनर रिंग रोड के तीसरे चरण की रोड
- देवरी रोड से ग्वालियर रोड तक इनर रिंग रोड के तीसरे चरण की रोड बन रही है।
- आठ किमी लंबी रोड 350 करोड़ रुपये से बनेगी।
- इस रोड के बनने से इनर रिंग रोड के तीन चरण का काम पूरा हो जाएगा।
- इससे वाहन यमुना एक्सप्रेस से सीधे ग्वालियर रोड पहुंच सकेंगे।
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शहर के चारों ओर बाईपास के लिए उत्तरी बाईपास और इनर रिंग रोड के तीसरे चरण का निर्माण कार्य शेष है। इसे क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर की श्रेणी में शामिल करते हुए जल्द से जल्द निर्माण कार्य को पूरा किया जाए। शहर के चारों ओर 360 डिग्री पर बाईपास के निर्माण की परियोजनाओं को जल्द पूरा करके शहर से हैवी ट्रैफिक के लोड को कम किया जा सकता है।
-डॉ। अरुण प्रताप सिकरवार, असिस्टेंट प्रोफेसर, दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट
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शहर से हैवी ट्रैफिक लोड को कम करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना होगा। बाईपास का निर्माण कार्य जल्द पूरा करें साथ ही आगरा शहर के बीच में संचालित हो रही लोहामंडी को शिफ्ट करें। ट्रांसपोर्ट नगर की शिफ्टिंग की योजना को अमल में लाया जाना चाहिए। गुरु के ताल के समीप आईएसबीटी पर बसों का संचालन बेतरतीब तरीके से हो रहा है। यहां रोडवेज की बसों और डग्गेमार वाहनों ने हाइवे को कब्जा लिया, जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं।
-केसी जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता व रोड सेफ्टी एक्टिविस्ट

Posted By: Inextlive