मानसिक तनाव में व्यक्ति ने लाइसेंसी राइफल से खुद को गोली मारी

Updated Date: Thu, 22 Oct 2020 10:08 AM (IST)

- पिनाहट के थाना मनसुखपुरा के गांव टीकतपुरा का मामला

- पिता की मौत के बाद से परेशान चल रहा था व्यक्ति

आगरा। थाना मनसुखपुरा क्षेत्र के गांव टीकतपुरा में बुधवार सुबह करीब पांच बजे टीकतपुरा निवासी 50 वर्षीय रामहरि शर्मा पुत्र रामसनेही शर्मा ने लाइसेंसी राइफल से खुद को गोली मार ली। गर्दन में गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने राइफल को कब्जे में लेकर परिजनों से घटना की जानकारी ली। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के फैमिली मेंबर्स के मुताबिक नौ महीने पहले पिता की हार्टअटैक से मौत होने के बाद रामहरि मानसिक तनाव में चल रहे थे। उनका इलाज कराया जा रहा था।

एक लाख में 10 करते हैं आत्महत्या

नेशनल क्राइम रिकॉ‌र्ड्स ब्यूरो की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में आत्महत्या की दर 2.4 प्रति लाख जनसंख्या है। मतलब यह है कि एक लाख की आबादी पर लगभग दो लोग आत्महत्या करते हैं। वहीं राष्ट्रीय दर 10.4 प्रति लाख जनसंख्या है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि आत्महत्या लोग मानसिक तनाव में अपना मानसिक संतुलन खोकर आत्महत्या कर लेते हैं। मनोवैज्ञानिक अंशु चौहान बताती हैं कि ऐसी स्थिति एकदम से नहीं आती है। काफी समय से व्यक्ति मानसिक दबाव में होता है और खुद को हीन भावना से जोड़ लेता है। धीरे-धीरे उसकी समस्या बढ़ती जाती ह.वो इस प्रेशर को बर्दाश्त नहीं कर पाता है। ऐसी स्थिति में किसी को कोई परेशानी हो तो वो अपने फैमिली या फ्रेंड्स से अपनी परेशानी शेयर कर सकता है। इससे उसका प्रेशर रिलीज हो जाएगा।

फैमिली मेंबर्स का रखना होगा ध्यान

नैदानिक मनोवैज्ञानिक मानसिक स्वास्थ्य ममता यादव बताती हैं कि आत्महत्या प्रवृत्ति वालों की पहचान आसानी से नहीं कर सकते, लेकिन कुछ असमान्य लक्षण से पीडि़तों की मनोस्थिति के बारे में जाना जा सकता है। उन्हें ठीक से नींद नहीं आती। उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है। वे अपने मनोभावों को व्यक्त करने में भ्रमित रहते हैं, उनकी खानपान की आदतों में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है या तो वे बहुत कम खाते हैं या बहुत ज्यादा। आमतौर वे अपने फिजिकल अपियरेंस को लेकर उदासीन हो जाते हैं, उन्हें फ़र्क़ नहीं पड़ता कि वे कैसे दिख रहे हैं, धीरे-धीरे वे लोगों से कटने लगते हैं। कई बार वह खुद को नुक़सान भी पहुंचाते हैं। इस स्थिति में परिवार का योगदान महत्वपूर्ण हो जाता है, वे वस्तुस्थिति को समझकर उनका ख्याल रखें एवं जरूरत पड़ने पर उनका उपचार कराएं।

मानसिक दवाब होने पर सकारात्मक बदलाव लाएं

- जीवनशैली में बदलाव लाएं

- ख़ुद पर ध्यान देना शुरू करें

- खानपान को संतुलित करें,

- नियमित रूप से कुछ समय व्यायाम या योग करते हुए बिताएं

- नकारात्मक सोच को बाहर का रास्ता दिखाएं

- सबसे महत्वपूर्ण बात अकेले न रहें,

- परिवार और दोस्तों के संग रहें

- सकारात्मक होकर कार्य करें

वर्जन

यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से हीन भावना से ग्रस्त है अथवा आत्महत्या करने की सोच रहा है, तो वह एक मानसिक बीमारी से ग्रस्त है। इस स्थिति में आपको मनोवैज्ञानिक से संपर्क करना चाहिए या अपने मन की बात दूसरों को बतानी चाहिए। मानसिक अस्वस्थ होने के कारण ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो सकती है। उचित परामर्श और चिकित्सा पद्धति के माध्यम से इसका उपचार किया जा सकता है।

-डॉ। अंशु चौहान, मनोवैज्ञानिक

जब व्यक्ति डिप्रेशन या तनाव में होता है, तो वह चीजों को वर्तमान स्थिति के अनुसार देखने लगता है। जबकि एक सप्ताह अथवा एक माह के बाद यही चीजें अलग रूप में दिखाई देने लगती हैं। जो आत्महत्या करने के बारे में सोचते है, वह मरना नहीं चाहते बल्कि केवल अपनी पीड़ा को मारना चाहते हैं। ऐसे में उन्हें अकेले उस स्थिति का सामना करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र अथवा किसी सहयोगी से बात भर कर लेने पर उसका समाधान मिल सकता है।

-ममता यादव, नैदानिक मनोवैज्ञानिक

Posted By: Inextlive
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