- अमरूद की 20 स्पेसीज की बागवानी में जुटा है कृषि विज्ञान केंद्र

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देहरादून,

अब दून सहित पूरे राज्य में थाईलैंड, ताइवान, लखऊवी और इलाहाबादी अमरूद के प्लांट्स न केवल बगीचों में नजर आएंगे। बल्कि, आपको इस फल का स्वाद भी चखने को मिलेगा। कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी इस प्रयास पर जुट गया है। बाकायदा, विकासनगर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी की नर्सरी में ऐसे देश-दुनिया के फेमस अमरूद का प्लांटेशन शुरू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों से ये प्लांट्स किसानों तक पहुंचेंगे और उनकी आय दोगुनी होने के साथ ही अमरूद के शौकीनों को तमाम प्रकार के अमरूदों का स्वाद भी मिलेगा।

दो वर्षो से जुटा हुआ है केवीके

आजकल बाजारों में आपको तमाम प्रकार से अमरूद देखने को मिल जाएंगे। लेकिन, अब ऐसे अमरूद की वैराइटीज का उत्पादन आपके शहर में होगा। जिनका वजन डेढ़ किलोग्राम तक होगा। ये अमरूद तमाम रंगों के होंगे। इस पर बाकायदा, दो वर्षो से कृषि विज्ञान केंद्र जुटा हुआ है। विज्ञान केंद्र ने दुनियाभर के करीब 20 स्पेसीज के प्लांट्स को उगाना शुरू कर दिया है। केंद्र के प्रभारी डा। एके शर्मा के अनुसार अमरूद की बढ़ रही डिमांड को देखते हुए ढकरानी में मदर ऑर्चिड डेवलेप कर दिया गया है। जहां कई अमरूद के प्लांट्स ग्रो कर रहे हैं। डा। शर्मा ने बताया कि अमरूद के इन प्लांट्स के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हार्टिकल्चर रिसर्च(आईआईएचआरर), सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ टेंपरेचर हार्टिकल्चर (सीआईटीएच), सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर एबट्रॉपिकल हार्टिकल्चर (सीआईएसएच) जैसे संस्थानों से भी मदद ली है।

ये स्पेसीज हैं मेन

-वीएनआर

-रेड फ्लैश।

-अर्का किरन।

कई स्पेसीज सीडलैस

बेंगलुरू, थाईलैंड, ताइवान, लखनवी व इलाहाबादी अमरूद की स्पेसीज को एजेंसीज के जरिए इंपोर्ट किया गया है। केंद्र के प्रभारी डा। एके शर्मा के मुताबिक जिन अमरूद की स्पेसीज को केंद्र में ग्रो किया जा रहा है। उनमें कई सीडलैस भी शामिल हैं। खासकर ताइवान की जिस अमरूद की स्पेसीज को ग्रो किया जा रहा है। वह कलरफुल पिंक, सफेद व खुशबूदार है। जिसकी मार्केट में काफी डिमांड है। दावा किया गया है कि ऐसे स्पेसीज के अमरूद के प्लांट्स दो वर्षो के भीतर फ्रूट्स देना शुरू कर देंगे।

यह होंगे फायदे

- किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

- मार्केट में कई स्पेसीज के अमरूद के डिमांड ज्यादा।

- ऐसे स्पेसीज 1 एकड़ में 400 पौधे हो सकते हैं रोपित।

- मैदानी क्षेत्रों के अलावा मिडहिल्स में हो सकता प्रोडक्शन।

- संक्रमण फ्री किए गए रोपे गए प्लांट्स.्र

- ऐसे प्लांट्स पानी वाले इलाकों में हो सकते हैं ग्रो।

210 हेक्टेअर पर 276 मैट्रिक टन प्रोडक्शन

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार अमरूद की मार्केट में डिमांड बढ़ रही है। लेकिन, वर्तमान में देहरादून जिले में केवल 210 हेक्टेअर पर 276 मैट्रिक टन अमरूद का उत्पादन हो पा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार इन स्पेशीज में किसानों की ओर से उगाया गया तो आने वाले दिनों में अमरूद का प्रोडक्शन काफी हद तक बढ़ सकता है।

::इन इलाकों में हो रहा अमरूद का उत्पादन::

-सहसपुर

-विकासनगर

-देहरादून

-डोईवाला।

Posted By: Inextlive