ताजमहल इन दिनों विवादों में है. पहले भी ताजमहल को तेजोमहालय बताने और उसकी हिस्ट्री को बदलने की मांग उठ चुकी है. सन 2000 में इतिहासकार पीएन ओक ने सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर पीआईएल दाखिल की थी. तब उसे शीर्ष कोर्ट ने निरस्त कर दिया था. ये जानकारी सिविल सोसायटी ऑफ आगरा ने बुधवार को घटिया स्थित हरियाली वाटिका में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दी.


आगरा। सोसायटी के सेक्रेटरी अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) को सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन ने फटकार लगाई है। अनिल शर्मा ने एएसआई से प्रोटेक्टेड मॉन्यूमेंट्स को लेकर बीते चालीस साल में कोर्ट में की गई अपील के बारे में आरटीआई (राइट टू इंफॉर्मेशन) के तहत जानकारी मांगी थी। जिसपर एएसआई ने संतुष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद अनिल शर्मा ने प्रथम अपीलीय अधिकारी से अपील की। इसके बाद कमीशन ने एएसआई को दस साल का तथ्यामत्मक और पारदर्शी डाटा देने के निर्देश दिए।

जल्द सुझलाना चाहिए मामला
अनिल शर्मा ने बताया कि हमारा उद्देश्य है कि कोर्ट में अपील के जरिए आगरा के विकास को रोका तो नहीं जा रहा। क्योंकि ताजमहल के कारण आगरा टूरिस्ट सिटी है और इससे आगरा के एक बड़े तबके को रोजगार मिलता है। इसलिए यदि इस बार जो याचिका दाखिल की गई है। यदि इसमें भी सन 2000 वाले तथ्य दिए गए हैैं तो इसे निरस्त करना चाहिए। सोसायटी के सदस्य राजीव सक्सेना ने बताया कि ऐसे मुद्दों को जल्द न सुलझाने से सामाजिक सौहार्द खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए इस मुद्दे को जिम्मेदारों को जल्द सुलझाना चाहिए।

Posted By: Inextlive