वकीलों के साथ आए व्यापारी, नौ को प्रयागराज बंद का आह्वान

Updated Date: Wed, 03 Mar 2021 01:38 PM (IST)

आज होगी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की आमसभा, पार्षदों को भी आमंत्रण

शिक्षा सेवा अधिकरण की मुख्य पीठ प्रयागराज में स्थापित कराने के लिए आंदोलनरत इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों को समाज के विभिन्न वर्गो का समर्थन मिल रहा है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को समर्थन देने के लिए मंगलवार को व्यापारी नेता न्यायविद हनुमान मंदिर के पास चल रही आमसभा स्थल पर आए। व्यापारियों के विभिन्न संगठनों ने वकीलों को हर स्तर पर समर्थन देने का आश्वासन दिया। इसके साथ नौ मार्च को प्रयागराज बंद करने की योजना बनाई गई। वहीं, बुधवार को शहर के पार्षद वकीलों को समर्थन देने सभा स्थल पर आएंगे।

सरकारी की मनमानी बर्दाश्त नहीं

आमसभा की अध्यक्षता कर रहे एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्रनाथ सिंह ने कहा कि अधिकरण के मुद्दे पर सरकार की मनमानी किसी रूप में स्वीकार नहीं की जाएगी। संचालन कर रहे महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने कहा कि सरकार हाईकोर्ट की गरिमा के विपरीत काम कर रही है। जब तक हमारी मांग नहीं मानी जाएगी तब तक न्यायिक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। सभा में जमील अहमद आजमी, अजय कुमार मिश्र, अनिल पाठक, रजनीकांत राय, केके मिश्र, राजेंद्र कुमार सिंह आदि मौजूद रहे। वहीं, एसोसिएशन ने माफी मांगने पर अधिवक्ता सुनील कुमार चौधरी की सदस्यता को बहाल कर दिया है।

गुमराह है सरकार : राधाकांत

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा ने कहा कि प्रदेश सरकार अधिकारियों की राय पर चलकर गुमराह हो गई है, जिससे वो नियम व कानून के विरुद्ध कदम उठा रही है। नौकरशाहों के साजिश के आगे वकील किसी कीमत पर नहीं झुकेंगे।

मूल संविधान में अधिकरण की परिकल्पना नहीं : अमरनाथ

शिक्षा सेवा अधिकरण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हैं। इस पर अधिकरण की उपयोगिता व उसकी वैधानिकता पर बहस छिड़ गयी है। संविधानविद् वरिष्ठ अधिवक्ता अमरनाथ त्रिपाठी कहते है कि मूल संविधान में अधिकरण की परिकल्पना नहीं थी। 42वें संविधान संशोधन से अनुच्छेद-323 ए के तहत संसद के कानून से केंद्रीय प्रशासनिक सेवा अधिकरण बनाने की व्यवस्था की गयी है। अनुच्छेद-323 बी में राज्य सरकार को अन्य अधिकरण बनाने का अधिकार दिया गया है। लेकिन, उसमें शिक्षा शामिल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट शिक्षण संस्थान के लिए अधिकरण देने की बात की थी, लेकिन राज्य सरकार ने वित्तीय सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान के अध्यापकों व कर्मचारियों के लिए अधिकरण बनाकर सुप्रीम कोर्ट की राय के विपरीत कार्य किया है। शिक्षा सेवा अधिकरण की पीठ लखनऊ में बनाकर सरकार हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप कर रही है।

कानून की डिग्री नहीं, फिर भी करेंगे न्याय

यंग लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा सेवा अधिकरण में ऐसे आइएएस अधिकारी न्याय देंगे जिन्हे कानून का कोई ज्ञान ही नहीं है। न ही उनके पास कानून की डिग्री है। उन्होंने सरकार पर नौकरशाही के चंगुल में फंसकर कोर्ट के फैसलों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

Posted By: Inextlive
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