नदियां मार रहीं उफान, अधूरे हैं इंतजाम

Updated Date: Sat, 05 Sep 2020 02:00 PM (IST)

i reality check

-शेल्टर्स पर नहीं हुआ प्रॉपर अरेंजमेंट, झांकने नहीं आए एरिया लेखपाल

-लगातार बढ़ रहा नदियों का पानी, खतरे के निशान के आसपास

PRAYAGRAJ: नदियों का पानी तेजी से बढ़ रहा है लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी-अधिकारी बाढ़ आने का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक शहर के आश्रय स्थलों में कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। न तो लेखपाल शेल्टर्स में झांकने गए और न ही उनके अधिकारियों ने इस बारे में सवाल जवाब किए। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने मौके पर जाकर शेल्टर्स की तैयारियों का जायजा लिया।

मौके पर जाकर लिया जायजा

हमने राजापुर स्थित ऋषिकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का दौरा किया। यह राजापुर, अशोक नगर सहित आधा दर्जन मोहल्लों का एक मात्र बड़ा आश्रय स्थल है। यहां हर साल एक हजार से अधिक लोग बाढ़ आने पर ठहरते हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इस बार हालात अलग हैं। आश्रय स्थलों में अलग से इंतजाम किए जाने हैं। ठहरने वालों के बीच संक्रमण को फैलने से रोकना है। लेकिन अभी तक कोई शुरुआत नही की गई है।

सोशल डिस्टेंसिंग का होगा पालन

स्कूल की प्रिंसिपल का कहना है कि काफी दिन पहले एक मीटिंग जरूर हुई थी, जिसमें कोरोना से सुरक्षा पर चर्चा हुई थी। प्रशासनिक अमले ने बताया था कि आश्रय स्थलों में इस बार कम लोगों को रखा जाएगा। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। लेकिन यह कैसे होगा इसका जवाब अभी तक नहीं मिला है। जिस तरह से नदियों का पानी बढ़ रहा है उससे कभी भी लोग पलायन कर आश्रय स्थलों में ठहर सकते हैं।

इन चीजों पर देना होगा ध्यान

-पर्याप्त संख्या में शौचालय

-पेयजल

-खानपान

-सोने की व्यवस्था

-आपसी दूरी बनाए रखना

-इलाज की उचित व्यवस्था

-बुजुर्गो, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को संक्रमण से दूर रखना

-सेनेटाइजेशन और साफ सफाई

इस बार बढ़ गई है संख्या

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए प्रशासन ने इस बार शहर में आश्रय स्थलों की संख्या बढ़ाकर दोगुनी यानी 50 कर दी है। लेकिन इनमें अभी तक कोई इंतजाम नहीं हो सके हैं। जिस हालात में आश्रय स्थल हैं, अगर लोग रहने पहुंचेंगे तो संक्रमण के आसार बनने लगेंगे। इसलिए प्रशासन को अभी संक्रमण को रोकने की प्लानिंग पर काम अमल करना शुरू कर देना होगा। खुद प्रशासनिक अधिकारियों ने कुछ दिन पहले तहसील स्तर के अधिकारी और कर्मचारियों को आश्रय स्थलों को दुरुस्त करने के आदेश दिए थे लेकिन इसे भी नजर अंदाज कर दिया गया।

कानपुर बैराज से 19 लाख और नरौरा से 41 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी प्रयागराज में आकर आबादी वाले इलाकों में घुस सकता है। लगातार छोड़ा जाने वाला पानी बाढ़ की संभावना को बढ़ा रहा है। इसके चलते लोगों को एलर्ट किया जा रहा है।

-ब्रजेश कुमार, ईई, सिचाई विभाग

यह बड़ा आश्रय स्थल है लेकिन अभी तक यहां एक भी लेखपाल नहीं आए हैं। यह तो मालूम है कि यहां पर बड़ी संख्या में लोग बाढ़ आने पर ठिकाना बनाते हैं। बहुत दिन पहले यह जरूर बताया गया कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ यहां लोगों को रखा जाएगा।

-शीला त्रिपाठी, प्रिंसिपल, ऋषिकुल उमा विद्यालय

Posted By: Inextlive
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